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भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में फिर गरमाई सियासत, परिजनों ने प्रशांत किशोर पर लगाए गंभीर आरोप

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भोजपुर/पटना: बिहार के भोजपुर जिले के चर्चित भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में एक बार फिर राज्य की राजनीति पूरी तरह गरमा गई है। बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव के माहौल के बीच भरत तिवारी के पीड़ित परिजनों ने जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) पर गंभीर और चौंकाने वाले आरोप लगाए हैं।

परिवार का साफ कहना है कि घटना के ठीक बाद उन्हें न्याय दिलाने का बड़ा आश्वासन दिया गया था, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बावजूद जन सुराज की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। इतना ही नहीं, परिजनों ने यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया कि उन्हें बांकीपुर चुनाव में जन सुराज के पक्ष में प्रचार में शामिल होने के लिए दबाव भी बनाया गया था। दूसरी ओर, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा सांसद मनोज तिवारी से हुई सकारात्मक मुलाकात के बाद परिवार ने राज्य सरकार पर पूरा भरोसा जताते हुए निष्पक्ष न्याय मिलने की मजबूत उम्मीद व्यक्त की है।

📞 ’15 दिनों में कार्रवाई का वादा कर फोन उठाना बंद कर दिया’, भरत तिवारी की भाभी का छलका दर्द

मामले की विस्तृत जानकारी देते हुए भरत तिवारी की भाभी सुमन देवी ने बताया कि घटना के कुछ दिनों बाद उनकी ननद को प्रशांत किशोर के पटना स्थित आवास पर बुलाया गया था। वहां परिवार को पूरा भरोसा दिलाया गया था कि 15 दिनों के भीतर मामले में जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होगी और यदि ऐसा नहीं हुआ तो जन सुराज द्वारा बड़ा आंदोलन और घेराव किया जाएगा। लेकिन, उनके अनुसार तय समय सीमा गुजर जाने के बाद भी जन सुराज की तरफ से कोई कदम नहीं उठाया गया।

सुमन देवी ने आरोप लगाया कि बाद में जब उन्होंने कई बार प्रशांत किशोर और उनकी टीम से संपर्क करने की कोशिश की, तो न तो किसी ने फोन उठाया और न ही किसी तरह की मदद मिली। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि केवल बड़े-बड़े वादे करने से न्याय नहीं मिलता, बल्कि उसके लिए जमीन पर उतरकर काम करना पड़ता है। परिवार को उम्मीद थी कि जिस तरह का भरोसा दिया गया था, उसी तरह कार्रवाई भी होगी, लेकिन डेढ़ महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कुछ नहीं हुआ।

🗳️ ‘हम राजनीति नहीं, केवल न्याय चाहते हैं’, परिजनों ने चुनाव प्रचार में ले जाने के दावे को किया खारिज

सुमन देवी ने यह भी दावा किया कि उपचुनाव के दौरान उन्हें प्रचार में शामिल होने के लिए कहा गया था। उनके अनुसार, जन सुराज के प्रतिनिधियों द्वारा उनसे कहा गया कि वे पहले चुनाव प्रचार में साथ चलें, तब आगे की कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनका पीड़ित परिवार किसी भी राजनीतिक दल का मोहरा या हिस्सा नहीं बनना चाहता। उनका एकमात्र उद्देश्य केवल भरत तिवारी को न्याय दिलाना और दोषियों को सजा दिलवाना है, राजनीति करना नहीं। सुमन देवी ने भावुक होते हुए कहा कि उनके देवर अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन जिन जन-समस्याओं को लेकर वे लगातार संघर्ष कर रहे थे, वे आज भी जस की तस बनी हुई हैं। गांव में जर्जर सड़क, जलजमाव और बुनियादी सुविधाओं की भारी समस्याएं बरकरार हैं। भरत इन्हीं जनमुद्दों को लेकर आवाज उठा रहे थे और यदि उनकी मौत के बाद भी हालात नहीं बदलते हैं तो यह बेहद दुखद है।

🤝 मनोज तिवारी और डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी से मुलाकात, 48 घंटे में कार्रवाई का मिला आश्वासन

परिजनों ने हाल ही में दिल्ली के भाजपा सांसद मनोज तिवारी से भी मुलाकात की थी। सुमन देवी के मुताबिक, उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी उन्हें विस्तार से दी, जिस पर मनोज तिवारी ने स्वीकार किया कि उन्हें मामले की पूरी सच्चाई पहले मालूम नहीं थी और स्थानीय प्रशासन की ओर से उन्हें अधूरी सूचना मिली थी। परिवार ने अपनी बात विस्तार से रखने के बाद उनसे निष्पक्ष जांच की मांग की। इस मुलाकात के बाद भाजपा की ओर से एक वीडियो भी सार्वजनिक किया गया, जिससे राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई। हालांकि परिवार लगातार यह दोहराता रहा कि उनका किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है।

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद परिवार ने राज्य सरकार की मंशा पर भरोसा जताया है। सुमन देवी ने बताया कि उपमुख्यमंत्री की ओर से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई का कड़ा आश्वासन दिया गया है और इसके लिए 48 घंटे का समय मांगा गया है। उनका कहना है कि अब तक 24 घंटे पूरे हो चुके हैं और उन्हें पूरी उम्मीद है कि तय समयसीमा के भीतर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी।

भोजपुर का यह कथित एनकाउंटर मामला पहले से ही बिहार की राजनीति का एक बड़ा और संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। तमाम राजनीतिक दल और सामाजिक संगठन इस मामले में लगातार जांच की मांग कर रहे हैं। अब परिजनों द्वारा लगाए गए इन नए आरोपों ने इस पूरे प्रकरण को एक नया राजनीतिक मोड़ दे दिया है।

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