सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च में शामिल 1,000 लोगों का निकला आपराधिक रिकॉर्ड; दिल्ली पुलिस की रिपोर्ट में खुलासा
नई दिल्ली: नीट और पेपर लीक मामले को लेकर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) का आंदोलन भले ही समाप्त हो चुका हो, लेकिन प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा, तोड़फोड़ और उपद्रव में शामिल लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमों की जांच जारी है। अब दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया है कि 20 जुलाई को सीजेपी के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमला करने और सरकारी व निजी वाहनों में तोड़फोड़ करने वाले करीब एक हजार लोगों का आपराधिक रिकॉर्ड (Criminal History) दर्ज पाया गया है।
नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और फेस रिकग्निशन सॉफ्टवेयर के माध्यम से पहचाने गए 2,873 प्रदर्शनकारियों में से 989 लोगों का पुराना आपराधिक इतिहास मिला है। इन अभियुक्तों पर हत्या, डकैती, लूट, यौन उत्पीड़न, किडनैपिंग और अन्य गंभीर अपराधों के मुकदमे दर्ज हैं।
📊 101 पर मर्डर और 284 पर डकैती-लूट के मुकदमे, रिपोर्ट में आदतन अपराधियों का भी चला पता
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार को सौंपी गई पुलिस की एक गोपनीय रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि पहचाने गए उपद्रवियों में से 101 के खिलाफ हत्या (302) के गंभीर मामले लंबित हैं। इसके अलावा 284 पर डकैती व लूट तथा 92 पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों के मुकदमे चल रहे हैं।
चौंकाने वाली बात यह है कि हत्या के आरोपी 101 लोगों में से 42 पर दो या उससे अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 12 आरोपियों की क्राइम हिस्ट्री में कम से कम 10-10 केस दर्ज हैं। इसी तरह डकैती और लूट के 284 आरोपियों में से 155 के खिलाफ बहुसंख्यक आपराधिक केस दर्ज हैं, जिनमें से 31 लोग 10 या उससे अधिक संगीन वारदातों में शामिल रहे हैं।
🔫 आर्म्स एक्ट के तहत 229 और एनडीपीएस में 67 आरोपी, पुलिस बोली—’आदतन अपराधी थे शामिल’
पुलिस जांच की सूची में 135 आरोपियों के नाम झपटमारी (Snatching) के केस में दर्ज हैं। इसी तरह आर्म्स एक्ट (अवैध हथियार) के तहत 229 लोगों पर मुकदमे दर्ज हैं, जबकि एनडीपीएस एक्ट (नशीले पदार्थ) में 67 लोग और अपहरण के मामलों में 19 लोग आरोपी हैं।
मामले की जांच कर रहे अधिकारी ने बताया कि प्रदर्शन के दौरान हिंसा फैलाने वाले कई लोग आदतन और पेशेवर अपराधी हैं, जिनके खिलाफ विभिन्न थानों में कई तरह के आपराधिक मामले पहले से लंबित चल रहे हैं।
📜 सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, लाठीचार्ज और नंदन नीलेकणि टास्क फोर्स का गठन
उल्लेखनीय है कि पेपर लीक मामले और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर सीजेपी की अगुवाई में पिछले महीने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू हुआ था। इस आंदोलन को तब और गति मिली जब प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के साथ इसमें शामिल हो गए।
CJP और सोनम वांगचुक ने 20 जुलाई को ‘संसद मार्च’ का आह्वान किया था, जिसमें हजारों की संख्या में भीड़ ने संसद भवन की तरफ बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने सुरक्षा घेरा तोड़ रही भीड़ को रोकने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। बाद में केंद्र सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगें मान लीं, जिनमें शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए आईटी विशेषज्ञ नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन शामिल था। इसके बाद CJP ने 25 जुलाई को 37 दिन से चले आ रहे विरोध प्रदर्शन को समाप्त कर दिया था।
⚠️ ‘सभी एफआईआर वापस न हुईं तो फिर से शुरू होगा आंदोलन’, CJP प्रवक्ता आशुतोष रांका का अल्टीमेटम
दूसरी ओर, CJP की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज मुकदमे अभी तक आधिकारिक रूप से वापस नहीं लिए हैं। पार्टी का कहना है कि अगर निर्दोष छात्रों पर दर्ज सभी एफआईआर (FIR) तुरंत वापस नहीं ली गईं, तो वे दोबारा सड़कों पर उतरकर देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे।
CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह यह सुनिश्चित करे कि किसी भी छात्र के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई न हो और हिरासत में लिए गए सभी अभ्यर्थियों को अविलंब रिहा किया जाए। रांका ने वार्ता में शामिल केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से भी तुरंत हस्तक्षेप की अपील की है।
आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हमारी स्पष्ट मांग है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस ली जाएं, निर्दोष छात्रों को रिहा किया जाए और दिल्ली पुलिस या बीजेपी शासित राज्यों की पुलिस द्वारा भविष्य में कोई नई एफआईआर दर्ज न की जाए।”
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