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सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बढ़े वन्यजीव: 90 बाघ, 300 तेंदुए और 5600 बायसन! जानिए TPF कैसे कर रही जंगल की सुरक्षा

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नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश): सतपुड़ा टाइगर रिजर्व पचमढ़ी के ऊंचे पठारों और साल के विशाल, घने जंगलों में बाघों का कुनबा अब तेजी से बढ़ने लगा है।

जंगल के इस अनुकूल माहौल में बाघों को जहां एक ओर आसानी से प्राकृतिक शिकार मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर शिकारियों और असामाजिक तत्वों की संदिग्ध गतिविधियों से कड़ा सुरक्षा घेरा भी मिल रहा है। यह सब मध्य प्रदेश की पहली ‘टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स’ (TPF) की 24 घंटे मौजूदगी से संभव हो पा रहा है। पचमढ़ी के संवेदनशील जंगलों से शुरू हुई यह विशेष टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स अब सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के चारों प्रमुख सब-डिविजनों में मुस्तैदी से काम कर रही है। इसकी सफलता को देखते हुए प्रदेश के अन्य राष्ट्रीय उद्यानों और टाइगर रिजर्व में भी इस मॉडल को लागू किया जा रहा है।

🐅 सतपुड़ा में 90 तक पहुंची बाघों की संख्या, TPF बनी वन्यजीवों और शिकारियों के बीच ढाल

पचमढ़ी के विशाल जंगलों की मुख्य पहचान यहां के साल के पेड़ और ऊंचे-ऊंचे पठार हैं, जिनकी आड़ में पूर्व में कई स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियां बढ़ जाती थीं।

इसके चलते सीमावर्ती क्षेत्रों के जंगलों में शाकाहारी वन्यप्राणियों की संख्या घटने लगी थी, जिसके प्रत्यक्ष प्रभाव से बाघ और तेंदुओं की मौजूदगी भी सीमित हो गई थी। लेकिन अब इनके बीच ‘टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स’ एक अभेद्य दीवार बनकर खड़ी हो गई है। यही मुख्य कारण है कि अकेले पचमढ़ी के ऊंचे पठार और साल के जंगलों में 10 से अधिक बाघों की सक्रिय मौजूदगी के ठोस साक्ष्य मिल रहे हैं। वहीं, प्रबंधन के अनुसार वर्तमान में संपूर्ण सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों की कुल संख्या 75 से 90 के बीच पहुंच गई है।

🥾 वनग्रामों के स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार, प्रतिदिन 25 किमी पैदल गश्त कर रहे जांबाज

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में लगभग 6 माह पूर्व मध्य प्रदेश की पहली स्थानीय ‘टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स’ का गठन किया गया था।

इस दूरदर्शी पहल के माध्यम से स्थानीय वनग्रामों के प्रतिभावान युवाओं को सीधे रोजगार से जोड़ा गया। जंगल के कठिन से कठिन माहौल में ढलकर रहने और चप्पे-चप्पे को पहचानने की प्राकृतिक खासियत के कारण ही इन वनवासी युवाओं को फोर्स में शामिल किया गया। घने जंगलों के ऊंचे-नीचे और दुर्गम रास्तों पर ये युवा प्रतिदिन औसतन 25 किलोमीटर पैदल गश्त (Patrolling) करते हैं। इसके साथ ही वे संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी नजर रखते हैं और अवैध प्रवेश रोककर वन अपराधों पर अंकुश लगा रहे हैं।

📡 वायरलेस और हाई-टेक सुविधाओं से लैस हैं युवा, 4 सब-डिविजनों में 24 जवान तैनात

सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के रणनीतिकार और पचमढ़ी के सहायक संचालक संजीव शर्मा के नेतृत्व में सबसे पहले 6 स्थानीय वनवासी युवाओं की टीम के साथ इस फोर्स की नींव रखी गई थी।

सहायक संचालक संजीव शर्मा बताते हैं, “आज पचमढ़ी के साथ-साथ पिपरिया, इटारसी और सोहागपुर सब-डिविजनों में कुल 24 प्रशिक्षित युवा टाइगर प्रोटेक्शन Force का हिस्सा हैं, जो पूरी सक्रियता से जंगल की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे हैं। ये स्थानीय युवा जंगल में किसी भी संदिग्ध हलचल पर नजर रखते ही वायरलेस सेट से तत्काल कंट्रोल रूम को सूचना देते हैं। इन सभी जवानों को आधुनिक तकनीकी सुविधाओं और उपकरणों से लैस किया गया है।”

🎓 मटकुली में TPF जवानों को दी गई विशेष ट्रेनिंग, दूर हुई गश्त की दिक्कतें

सहायक संचालक संजीव शर्मा आगे बताते हैं कि पचमढ़ी में TPF के गठन के बाद जमीनी स्तर पर व्यापक सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं।

पचमढ़ी के कुछ अति-संवेदनशील और दुर्गम स्थानों पर असामाजिक तत्व चोरी-छिपे प्रवेश कर जाते थे, जो स्थान नियमित पेट्रोलिंग टीमों की पहुंच से काफी दूर थे। TPF के बनने के बाद इन कठिन रास्तों तक टीम की पहुंच आसान हुई है और अवैध गतिविधियां लगभग शून्य हो गई हैं। अब इन क्षेत्रों में बाघ व अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी पहले से कहीं ज्यादा देखी जा रही है। जवानों की कार्यकुशलता बढ़ाने और वन्यजीव सुरक्षा को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए मटकुली में 24 जुलाई को TPF के सभी सदस्यों को विशेष व्यावहारिक प्रशिक्षण (Training) भी दिया गया है।

📊 सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में बाघों के साथ चीतल, सांभर, बायसन और तेंदुओं का भी बढ़ा कुनबा

वर्ष 2022 की राष्ट्रीय बाघ गणना के आंकड़ों के अनुसार, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में बाघों की संख्या 50 से 55 दर्ज की गई थी।

लेकिन अब आधुनिक कैमरा ट्रैपिंग, प्रत्यक्ष दर्शन और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कोर और बफर दोनों क्षेत्रों में बाघों का कुनबा तेजी से बढ़ा है, जो वर्तमान में 75 से 90 होने का अनुमान है। केवल बाघ ही नहीं, बल्कि रिजर्व में अन्य वन्यजीवों की संख्या में भी भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ताज़ा आंकड़ों के अनुसार पार्क में लगभग 8,200 चीतल, 8,000 सांभर, 2,400 नीलगाय, 5,600 भारतीय बायसन (गौर), 8,000 जंगली सूअर, 22,000 लंगूर और लगभग 300 तेंदुए स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं।

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