अलीगढ़ में मानवता शर्मसार: 8.5 महीने की गर्भवती नाबालिग का अवैध गर्भपात, नहर किनारे दफनाया नवजात का शव; फर्जी डॉक्टर-संचालक गिरफ्तार
अलीगढ़ (उत्तर प्रदेश): उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले से एक अत्यंत संवेदनशील एवं हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने सामाजिक ताने-बाने और कानून व्यवस्था दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौंडा थाना क्षेत्र में साढ़े आठ माह की गर्भवती नाबालिग युवती का कथित रूप से अवैध तरीके से प्रसव व गर्भपात कराने तथा नवजात शिशु के शव को नहर के किनारे मिट्टी में दबाने के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बड़ा पर्दाफाश किया है। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अवैध रूप से संचालित अस्पताल के संचालक एवं डॉक्टर सहित चार आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।
🏥 सामाजिक बदनामी के डर से कानून ताक पर, इगलास के निजी अस्पताल में कराया अवैध प्रसव
यह पूरा प्रकरण अलीगढ़ के गौंडा थाना क्षेत्र से संबंधित है।
पुलिस से प्राप्त प्रामाणिक विवरण के अनुसार, गांव के ही एक युवक के संपर्क में आने से नाबालिग युवती गर्भवती हो गई थी। जब गर्भकाल करीब साढ़े आठ महीने का हो गया, तो परिजनों को सामाजिक लोक-लाज और बदनामी का डर सताने लगा। आरोप है कि युवती के परिजनों ने इगलास स्थित एक निजी अस्पताल के प्रबंधन से संपर्क किया और कानूनी प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन करते हुए अवैध तरीके से प्रसव/गर्भपात की प्रक्रिया को अंजाम दिलवाया।
💔 नहर के किनारे दफनाया गया मासूम का शव, बरामदगी के दौरान भावुक हुए पुलिसकर्मी
इस गंभीर अपराध को छुपाने और साक्ष्यों को नष्ट करने की नीयत से आरोपियों ने नवजात शिशु के शव को नहर किनारे गड्ढा खोदकर दफना दिया।
तथापि, घटना की भनक लगते ही पीआरवी (PRV) के माध्यम से स्थानीय पुलिस को तत्काल सूचना प्राप्त हो गई। सूचना मिलते ही क्षेत्राधिकारी (CO) इगलास कमलेश कुमार ने स्वयं जांच का कमान संभाली और गौंडा थाना पुलिस टीम के साथ घटनास्थल पर पहुँचे। पुलिस ने फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) टीम के साथ दबिश देकर दफनाए गए मासूम के शव को बाहर निकलवाया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब साढ़े आठ माह के मासूम का शव बाहर निकाला गया, तो वहां उपस्थित पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक कर्मचारी भी स्तब्ध और भावुक हो गए। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर विधिक पोस्टमार्टम हेतु भेज दिया।
🩺 फर्जी अस्पताल और मुन्नाभाई डॉक्टरों पर कड़ा कानूनी चाबुक, स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच जारी
पुलिस की प्राथमिक जांच में इगलास स्थित निजी अस्पताल की भूमिका पूर्णतः संदिग्ध और अवैध पाई गई है।
स्वास्थ्य विभाग एवं पुलिस की संयुक्त टीम अब अस्पताल के पंजीकरण, वैधता, डॉक्टरों की डिग्री और मानकों की गहन जांच कर रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से अस्पताल संचालित करने, बिना अर्हता के जानलेवा चिकित्सकीय कृत्य में संलिप्त होने और नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कठोरतम प्रशासनिक व कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
💬 “पॉक्सो एक्ट और आईपीसी/बीएनएस की गंभीर धाराओं में केस दर्ज, 4 आरोपी सलाखों के पीछे”: पुलिस प्रशासन
“मामले की अत्यंत संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और सुसंगत आपराधिक धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी पंजीकृत की है। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी संतोषी, सचिन, अस्पताल संचालक ईशान और डॉक्टर भावना को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। मामले की विस्तृत विवेचना जारी है।”
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.