विश्व आदिवासी दिवस पर छत्तीसगढ़ में ‘आदिवासी बनाम वनवासी’ की सियासत: दीपक बैज का सीएम पर बड़ा हमला, मांगी माफी
रायपुर (छत्तीसगढ़): विश्व आदिवासी दिवस (World Tribal Day) के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ में ‘आदिवासी बनाम वनवासी’ के संवेदनशील मुद्दे को लेकर राजनीतिक तापमान अत्यधिक बढ़ गया है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष दीपक बैज ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर मूल आदिवासी समाज की मूल स्वरूप और पहचान को ‘वनवासी’ के रूप में परिवर्तित कर पेश करने का गंभीर आरोप लगाया है। इस विषय पर उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री पर सीधा निशाना साधा। बैज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज की कुल आबादी 32 प्रतिशत से अधिक है; ऐसी स्थिति में विश्व आदिवासी दिवस पर राज्य सरकार द्वारा शासकीय आयोजन न किया जाना संपूर्ण आदिवासी समाज का घोर अपमान है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने की मांग करते हुए कहा कि भाजपा सरकार आदिवासी दिवस का आयोजन न करके इस वर्ग की भावनाओं पर आघात कर रही है।
🏹 “मुख्यमंत्री आदिवासी समाज से हैं, लेकिन खुद को मानते हैं वनवासी”: दीपक बैज का सीधा हमला
दीपक बैज ने मुख्यमंत्री पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि भले ही मुख्यमंत्री स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं, किंतु वे स्वयं को आदिवासी के स्थान पर ‘वनवासी’ मानते हैं।
बैज ने आरोप मढ़ा कि भाजपा और आरएसएस की विचारधारा द्वारा आदिवासियों के लिए ‘वनवासी’ शब्द का प्रयोग जानबूझकर किया जाता है, जो आदिवासी समाज की ऐतिहासिक पहचान, संवैधानिक गरिमा और अधिकारों के मूलभूत सवाल से जुड़ा हुआ है।
🏛️ 32 प्रतिशत आबादी वाले प्रदेश में शासकीय आयोजन न होने पर उठाए गंभीर सवाल
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आज संपूर्ण विश्व में आदिवासी दिवस की धूम है और छत्तीसगढ़ जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इस वर्ग की जनसंख्या 32 प्रतिशत से अधिक है।
इसके बावजूद राज्य सरकार की ओर से शासकीय स्तर पर इस महत्वपूर्ण दिवस पर कोई आधिकारिक आयोजन आयोजित नहीं किया गया। उन्होंने इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि आदिवासी बहुल प्रदेश में इस प्रकार का उपेक्षात्मक रवैया सरकार की आदिवासी समाज के प्रति संकीर्ण मानसिकता को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।
🌲 “आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन को उद्योगपतियों को सौंप रही सरकार”: कांग्रेस के गंभीर आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के शासनकाल में आदिवासी समुदाय लगातार विकास की मुख्यधारा से उपेक्षित रहा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासियों को बेहतर शिक्षा, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तथा उनके मूलभूत अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों के जल, जंगल, जमीन और बहुमूल्य खनिज संसाधनों को स्थानीय समाज के हितों की रक्षा करने के बजाय सरकार अपने चहेते उद्योगपतियों के हाथों में सौंप रही है।
💥 identity की राजनीति पर हमला, दीपक बैज बोले— “आयोजन न करना समाज की भावनाओं का तिरस्कार”
दीपक बैज ने कहा कि भाजपा और आरएसएस लगातार आदिवासी समाज को केवल ‘वनवासी’ की संज्ञा देकर उनकी मूल संस्कृति को दबाने का प्रयास करते हैं।
उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जब प्रदेश में इतनी विशाल आदिवासी आबादी निवास करती है, तब उनके सम्मान और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस दिवस को शासकीय सम्मान के साथ क्यों नहीं मनाया गया?
“विश्व आदिवासी दिवस का शासकीय आयोजन न करना महज किसी एक कार्यक्रम का टल जाना नहीं है, बल्कि यह प्रदेश के गौरवशाली आदिवासी समाज की भावनाओं और अस्मिता का सीधा अपमान है। सरकार इस दिवस को न मनाकर एक तरह से इसका खुलकर विरोध कर रही है।” — दीपक बैज, पीसीसी अध्यक्ष, छत्तीसगढ़
🙏 मुख्यमंत्री से की सार्वजनिक माफी की मांग, अधिकारों की रक्षा का दिलाया याद
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने मुख्यमंत्री से इस उपेक्षा के लिए आदिवासी समाज से तत्काल माफी मांगने की पुरजोर मांग की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को केवल बयानों तक सीमित न रहकर आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान, सांस्कृतिक सम्मान, संवैधानिक अधिकार और उनके जल-जंगल-जमीन की रक्षा के प्रति अपनी नैतिक व प्रशासनिक जिम्मेदारी का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.