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लखनऊ के होटल क्रिस्टेलिया में फर्जी विदेश मंत्रालय अफसरों का हाईड्रामा, स्टाफ को बनाया बंधक

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लखनऊ (उत्तर प्रदेश): राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके गोमतीनगर विकासखंड-3 स्थित होटल क्रिस्टेलिया में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब दो युवकों ने खुद को विदेश मंत्रालय (MEA) का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लगभग एक घंटे तक जमकर हंगामा किया।

आरोप है कि दोनों जालसाजों ने होटल कर्मियों पर धौंस जमाते हुए स्टाफ और वहां मौजूद अन्य अतिथियों को बंधक बनाकर एक कमरे में बंद कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन पुलिस को देखते ही दोनों आरोपी फरार हो गए। बाद में पुलिस टीम ने घेराबंदी कर दोनों मुख्य आरोपियों—अभिनव सिंह और शिवम चौहान को गिरफ्तार कर लिया।

🚗 तुर्कमेनिस्तान की महिला की तलाश में पहुंचे थे होटल, किराए की कार पर लिखा था ‘विदेश मंत्रालय’

पुलिस की प्रारंभिक पूछताछ और जांच में कई हैरान करने वाले खुलासे हुए हैं:

  • महिला की तलाश: दोनों आरोपी मध्य एशियाई देश तुर्कमेनिस्तान की एक विदेशी महिला की तलाश में होटल पहुंचे थे।

  • मंत्रालय का फर्जी बोर्ड: आरोपियों ने इस काम के लिए किराए की एक कार ली थी और उस पर विदेश मंत्रालय का फर्जी स्टीकर व नेमप्लेट लगा रखी थी, ताकि किसी को संदेह न हो।

  • कर्मचारियों पर रौब: होटल में प्रवेश करते ही दोनों ने खुद को मंत्रालय का अधिकारी बताकर जांच के नाम पर होटल कर्मियों को धमकाया और लोगों को कमरे में कैद कर दिया।

🪪 तलाशी में मिले 478 फर्जी ID कार्ड, जांच एजेंसियों के भी उड़े होश

गिरफ्तारी के बाद जब पुलिस ने आरोपियों की तलाशी ली, तो उनके कब्जे से बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया:

  • भारी मात्रा में फर्जी कार्ड: आरोपियों के पास से विदेश मंत्रालय के नाम पर तैयार किए गए 478 फर्जी आईडी कार्ड (ID Cards) बरामद किए गए हैं।

  • सुरक्षा एजेंसियों की एंट्री: इतनी बड़ी तादाद में संवेदनशील मंत्रालय के पहचान पत्र मिलने के बाद खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।

🔍 तीसरे साथी की तलाश में जुटी पुलिस, कई पहलुओं पर हो रही गहन जांच

इस फर्जीवाड़े के पीछे किसी बड़े सिंडिकेट के सक्रिय होने की आशंका जताई जा रही है:

  • तीसरे आरोपी की भूमिका: पुलिस जांच में एक तीसरे संदिग्ध का नाम भी सामने आया है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है।

  • मकसद की पड़ताल: पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इतने फर्जी पहचान पत्र किस उद्देश्य से बनाए गए थे, विदेशी महिला से आरोपियों का क्या कनेक्शन था और इन फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल पहले कहां-कहां किया जा चुका है।

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