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बरेली: नीली बत्ती वाली फर्जी महिला IAS का करोड़ों का जॉब स्कैम, फर्जी ज्वाइनिंग लेटर देकर करते थे ठगी; क्लर्क भी फंसा

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बरेली (उत्तर प्रदेश): खुद को आईएएस (IAS) अधिकारी बताकर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर करोड़ों रुपये ऐंठने वाले गिरोह की परतें लगातार खुलती जा रही हैं।

गैंग की मुख्य सरगना विप्रा शर्मा और उसकी बहन को पुलिस पूर्व में ही जेल भेज चुकी है। दोनों बहनें लग्जरी कार पर नीली बत्ती लगाकर घूमती थीं और युवाओं पर रौब जमाकर सरकारी विभागों में नौकरी लगवाने का दावा करती थीं। अब इस गिरोह के तार महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय से भी जुड़ गए हैं। विश्वविद्यालय में क्लर्क के पद पर कार्यरत देवप्रकाश के खिलाफ थाना बारादरी में ठगी का नया मामला दर्ज किया गया है। आरोप है कि वह नौकरी की तलाश कर रहे छात्रों को विप्रा शर्मा से मिलवाकर सौदेबाजी कराता था।

💼 क्लर्क ने दिया झांसा: ‘विप्रा मैडम से अच्छी पहचान है, पक्की नौकरी लगवा देंगी’

शाहजहांपुर निवासी पीड़ित पुष्पेंद्र ने पुलिस में दर्ज कराई शिकायत में पूरी कार्यप्रणाली का खुलासा किया:

  • यूनिवर्सिटी में परिचय: पुष्पेंद्र ने रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध पुवायां कॉलेज से बीएससी (एग्रीकल्चर) की पढ़ाई की थी, जहां उसकी पहचान क्लर्क देवप्रकाश से हुई।

  • 7 लाख रुपये की ठगी: क्लर्क ने दावा किया कि विप्रा शर्मा से उसकी सीधी पैठ है। इसके बाद वह छात्र को विप्रा के गोल्डन ग्रीन पार्क स्थित आवास पर ले गया, जहां राजस्व विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर ₹7 लाख वसूले गए।

  • पैसे वापसी का झूठा भरोसा: नौकरी न लगने पर रकम वापस दिलाने की गारंटी दी गई थी, परंतु महीनों बीत जाने के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही पैसे लौटाए गए।

📄 फर्जी नियुक्ति पत्र थमाकर विभागों में भेज देते थे, शाहजहांपुर पहुंचने पर खुली पोल

संजय नगर निवासी अरविंद कुमार ने भी बारादरी थाने में विप्रा शर्मा और गिरोह के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है:

  • दुकान पर मुलाकात व ₹4 लाख की ठगी: अरविंद को फोन कर घर बुलाया गया और सरकारी नौकरी का झांसा देकर ₹4 लाख लिए गए।

  • फर्जी ज्वाइनिंग लेटर: रकम मिलने के बाद आरोपी अभ्यर्थियों को संबंधित सरकारी विभाग का कूटरचित (फर्जी) नियुक्ति पत्र थमा देते थे।

  • विभाग पहुंचने पर खुलासा: जब अरविंद नियुक्ति पत्र लेकर कार्यभार ग्रहण करने शाहजहांपुर पहुंचे, तब जाकर फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ।

⚖️ 100 से अधिक मुकदमे दर्ज, अवैध संपत्तियों की जब्ती और कुर्की की तैयारी

विप्रा शर्मा और उसके सहयोगियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज हो रही है:

  • मुकदमों का शतक: इस संगठित फर्जीवाड़े में अब तक 100 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हो चुके हैं और कई आरोपी पहले से सलाखों के पीछे हैं।

  • गैंग की संपत्तियां चिह्नित: पुलिस ने ठगी की काली कमाई से बनाई गई अचल और चल संपत्तियों को चिह्नित कर लिया है, जिन्हें गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क करने की प्रक्रिया चल रही है।

  • यूनिवर्सिटी प्रशासन पर सवाल: क्लर्क देवप्रकाश के खिलाफ पूर्व में भी शिकायतें आने के बावजूद कड़ी विभागीय कार्रवाई न होने और उसे कृषि संकाय में बनाए रखने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

👮‍♂️ एसएसपी अनुराग आर्य का सख्त रुख: ‘किसी भी संलिप्त व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा’

बरेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) अनुराग आर्य ने स्पष्ट किया है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है:

  • नए नामों की जांच: विश्वविद्यालय कर्मियों सहित गिरोह से जुड़े किसी भी नए व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • अवैध संपत्ति जब्ती: एसएसपी ने निर्देश दिए हैं कि पीड़ितों से ठगी गई रकम की भरपाई और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए संपत्तियों को नियमानुसार जब्त किया जाए।

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