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छात्रों पर लाठीचार्ज पर भड़के पूर्व सीएम चंपई सोरेन: हेमंत सरकार पर साधा निशाना, JPSC-JSSC धांधली की CBI जांच की मांग

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रांची (झारखंड): राजधानी रांची में 21 अगस्त को मुख्यमंत्री के पुतला दहन कार्यक्रम के दौरान आंदोलनकारी छात्रों के साथ हुए कथित दुर्व्यवहार और लाठीचार्ज के विरोध में पूर्व मुख्यमंत्री एवं भाजपा नेता चंपई सोरेन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर हेमंत सोरेन सरकार पर कड़ा प्रहार किया।

चंपई सोरेन ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर ही संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज करा रहे छात्रों पर हमला किया गया। उन्होंने कहा कि यह घटना केवल छात्रों के लोकतांत्रिक आंदोलन को कुचलने की कोशिश नहीं है, बल्कि झारखंड में अपनी बात रखने की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक परंपराओं पर भी गंभीर कुठाराघात है।

⚖️ 7 वर्षों में एक भी पारदर्शी नियुक्ति नहीं, परीक्षाएं रद्द कर छात्रों को लड़ाने की साजिश

नियुक्ति प्रक्रिया और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल:

  • पारदर्शिता का अभाव: पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि गठबंधन सरकार पिछले 7 वर्षों से सत्ता में है, लेकिन एक भी नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्षता व पारदर्शिता के साथ पूरी नहीं करा पाई।

  • सीबीआई जांच से इनकार: छात्र लगातार सभी विवादित परीक्षाओं की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनके विश्वास के साथ धोखा किया।

  • कोर्ट में नहीं टिकी घोषणाएं: एक सुनियोजित रणनीति के तहत 22 परीक्षाओं को रद्द किया गया, किंतु सरकार का यह फैसला अदालत में टिक नहीं सका, जिससे सरकार की विभाजनकारी मंशा उजागर होती है।

🛑 रांची, गिरिडीह और हजारीबाग में लाठीचार्ज निंदनीय, भाजपा पर गलत आरोप

छात्र आंदोलन और प्रशासनिक कार्रवाई की निंदा:

  • राजनीतिक आंदोलन नहीं: चंपई सोरेन ने स्पष्ट किया कि अपनी प्रशासनिक विफलताओं को छिपाने के लिए सत्ता पक्ष के लोग इस आंदोलन का दोष भाजपा पर मढ़ रहे हैं, जबकि यह पूरी तरह बेरोजगार छात्रों का गैर-राजनीतिक आंदोलन था।

  • दमनकारी नीति की निंदा: उन्होंने कहा कि जिस तरह रांची, गिरिडीह और हजारीबाग में हक मांग रहे निर्दोष युवाओं पर बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाई गईं, उसकी जितनी भी निंदा की जाए वह कम है।

⚖️ राजस्थान SI भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का दिया हवाला, व्यवस्था पर साधा निशाना

भ्रष्टाचार और न्यायिक टिप्पणियों का उल्लेख:

  • सुप्रीम कोर्ट का दृष्टांत: चंपई सोरेन ने राजस्थान सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परिणाम पर शीर्ष अदालत के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी की थी कि ‘यदि गिलास में दो बूंद भी जहर हो, तो पूरा पानी फेंकना पड़ता है।’

  • नौकरियां बेचने का आरोप: उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड की वर्तमान सरकार भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं चाहती, क्योंकि यहां नौकरियों की खरीद-फरोख्त का खेल चल रहा है और तानाशाही रवैये के चलते युवाओं को न्याय नहीं मिल पा रहा।

🔍 JPSC और JSSC गड़बड़ियों की CBI जांच की मांग, कहा- सच सामने आना जरूरी

जांच की अनिवार्यता और कानूनी पहलू:

  • सीबीआई जांच ही एकमात्र विकल्प: उन्होंने कहा कि जब वे मुख्यमंत्री पद पर थे, तब सीजीएल (CGL) परीक्षा में अनियमितताओं की बात सामने आने पर उन्होंने एसआईटी (SIT) जांच के आदेश दिए थे, लेकिन रिपोर्ट आने से पहले ही उन्हें पद छोड़ना पड़ा।

  • संवैधानिक संस्थाओं की साख: जेपीएससी (JPSC) एक संवैधानिक संस्था है और इसके अधिकारियों की नियुक्ति सरकार द्वारा की जाती है; ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए केवल सीबीआई जांच ही सच सामने ला सकती है।

🤝 युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए अंत तक साथ खड़े रहने का संकल्प

छात्रों के प्रति समर्थन और भविष्य का संकल्प:

  • मूल उद्देश्य से भटकी सरकार: चंपई सोरेन ने कहा कि झारखंड राज्य आंदोलन का मूल उद्देश्य स्थानीय युवाओं को सम्मानजनक रोजगार और अधिकार दिलाना था, लेकिन वर्तमान शासन व्यवस्था उस मूल भावना से पूरी तरह भटक गई है।

  • अंतिम सांस तक संघर्ष: उन्होंने विश्वास दिलाया कि जब तक पीड़ित छात्रों को उनका वाजिब हक और न्याय नहीं मिल जाता, तब तक वे पूरी मजबूती के साथ उनके संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।

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