चीनी पर महंगाई की ‘मीठी मार’: ₹74/किलो तक पहुंचे खुदरा दाम, आयात छूट और स्टॉक लिमिट के बाद भी राहत नहीं
नई दिल्ली: देशभर में आम उपभोक्ताओं की रसोई के बजट पर चीनी की महंगाई का गहरा असर देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार द्वारा चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देने और व्यापारियों पर स्टॉक लिमिट कड़े करने जैसे नीतिगत फैसलों के बावजूद खुदरा बाजार में चीनी के दाम नरम नहीं पड़ रहे हैं। थोक बाजार और एक्स-मिल स्तर पर कीमतों में आई नरमी के विपरीत, देश के कई प्रमुख शहरों में खुदरा चीनी ₹60 से लेकर ₹74 प्रति किलोग्राम के उच्च स्तर पर बिक रही है, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
📊 1 महीने में 30% और 1 साल में 38% से अधिक उछाल: प्रमुख शहरों के आंकड़े
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के अनुसार खुदरा बाजार की स्थिति:
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अखिल भारतीय औसत दर: उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, रविवार को चीनी की अखिल भारतीय औसत खुदरा कीमत ₹64.24 प्रति किलोग्राम दर्ज की गई, जो पिछले सप्ताह के ₹63.12 से 1.77% अधिक है।
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सालाना व मासिक वृद्धि: वर्तमान खुदरा दरें पिछले माह की तुलना में करीब 30% और पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 38.63% अधिक हैं।
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अधिकतम व न्यूनतम कीमतें: 30 अगस्त को देश में चीनी का अधिकतम खुदरा भाव ₹74 प्रति किलो और न्यूनतम ₹40 प्रति किलो दर्ज किया गया।
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प्रमुख महानगरों में भाव: राजधानी दिल्ली में चीनी ₹62, मुंबई में ₹66, चेन्नई में ₹63 और रांची में ₹68 प्रति किलोग्राम के स्तर पर बिक रही है।
🏭 थोक दरों में तेजी: मिल स्तर पर गिरावट के बावजूद नहीं घटा खुदरा अंतर
थोक बाजार और मिल कीमतों का गणित:
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थोक कीमतें मजबूत: थोक मंडियों में भी चीनी का औसत भाव ₹59.73 प्रति किलोग्राम बना हुआ है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 38.63% अधिक है।
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आयात के बाद मिल भाव गिरे: सरकार द्वारा 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दिए जाने के बाद एक्स-मिल (फैक्ट्री) कीमतों में लगभग 20% की गिरावट आई है।
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मार्जिन का असंतुलन: उद्योग के जानकारों के अनुसार सामान्यतः मिल स्तर और थोक भाव में ₹2-3 प्रति किलो तथा खुदरा भाव में ₹7-8 प्रति किलो का अंतर होता है, लेकिन वर्तमान में यह अंतर काफी अधिक बना हुआ है।
⚖️ उत्पादन अनुमान, स्टॉक लिमिट और सरकार के कड़े कदम
कीमतों में तेजी के प्रमुख कारण और आपूर्ति स्थिति:
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सख्त नीतियां लागू: सरकार ने घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ाने के लिए चीनी के निर्यात पर पूर्व में ही रोक लगा रखी है और थोक उपभोक्ताओं व डीलरों के लिए भंडारण सीमा (Stock Limit) के नियम भी कड़े किए हैं।
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पर्याप्त स्टॉक का दावा: केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और मिलों व बिचौलियों द्वारा कृत्रिम मूल्य वृद्धि पर नजर रखी जा रही है।
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उत्पादन का संशोधित अनुमान: 2025-26 मार्केटिंग सत्र (अक्टूबर-सितंबर) के लिए देश में चीनी उत्पादन का अनुमान पूर्व के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन किया गया है, जो देश की वार्षिक घरेलू मांग (लगभग 280-285 लाख टन) को पूरा करने के लिए पूरी तरह पर्याप्त है।
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