ठप पड़ा JPSC का कामकाज: डेढ़ महीने से आयोग में न चेयरमैन न सदस्य; BJP बोली- ‘छात्रों का भविष्य अंधकारमय’
रांची (झारखंड): झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) इन दिनों गंभीर प्रशासनिक और भर्ती विवादों के चलते सुर्खियों में बना हुआ है। प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर अनियमितता और धांधली के आरोपों के बाद आयोग के अध्यक्ष से लेकर सभी सदस्यों को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते, परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता गुप्ता और अन्य संबंधित कर्मियों को जेल तक जाना पड़ा। छात्रों के भारी विरोध प्रदर्शन और आक्रोश के बाद सरकार ने कई परीक्षाएं रद्द कर दीं, लेकिन अब आयोग के भविष्य और कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
📋 22 जुलाई को अध्यक्ष और 9 अगस्त को सदस्यों ने दिया था इस्तीफा: आयोग पूरी तरह ठप
इस्तीफों का घटनाक्रम और वर्तमान स्थिति:
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अध्यक्ष का इस्तीफा: 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और अभ्यर्थियों के व्यापक आंदोलन के दबाव में तत्कालीन अध्यक्ष ने 22 जुलाई को अपने पद से त्यागपत्र दे दिया था।
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सदस्यों का सामूहिक इस्तीफा: इसके उपरांत 9 अगस्त को आयोग के तीनों सदस्यों—डॉ. अजीता भट्टाचार्य, डॉ. अनिमा हांसदा और डॉ. जमाल अहमद ने भी अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया।
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सुधार कमेटी का गठन: यद्यपि राज्य सरकार ने व्यवस्थागत सुधार के लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है, परंतु अब तक आयोग के नए चेयरमैन और सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ा है।
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विपक्ष के तीखे सवाल और बयान:
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छात्रों के भविष्य पर संकट: बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता दीनदयाल वर्णवाल ने राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये पर कड़ा प्रहार करते हुए आयोग में तत्काल प्रभाव से अध्यक्ष एवं सदस्यों की नियुक्ति करने की मांग उठाई।
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डेढ़ महीने से रुकी परीक्षाएं: उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे जेपीएससी को लेकर राज्य सरकार का क्या रुख है, यह जनता के सामने स्पष्ट होना चाहिए। पिछले डेढ़ महीने से न तो कोई नई परीक्षा आयोजित हो पा रही है और न ही आयोग में दैनिक प्रशासनिक कार्य हो रहे हैं, जिससे लाखों छात्रों का भविष्य अंधकारमय हो गया है।
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जांच की गति और कार्यप्रणाली पर सवाल:
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सरकार की हठधर्मिता: बीजेपी प्रवक्ता ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि सरकार आयोग को स्थायी रूप से बंद करना चाहती है या वास्तविक सुधार लाकर छात्रों के हित में कदम उठाना चाहती है।
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CBI जांच की मांग: उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मामले में चल रही सीआईडी जांच की सुस्त गति से निष्पक्ष और त्वरित न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। छात्रों की न्यायसंगत मांग को स्वीकार करते हुए पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी जानी चाहिए।
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