अयोध्या (उत्तर प्रदेश): अयोध्या के राम मंदिर में चंदा विवाद उजागर होने के लगभग 3 महीने बाद जांच और कार्रवाई के बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने अपने पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नाम की घोषणा कर दी है।
यह अहम जिम्मेदारी भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को सौंपी गई है, जो विभिन्न विशिष्ट उपलब्धियों के साथ-साथ प्रसिद्ध ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भी रणनीतिक भूमिका निभा चुके हैं। दो आईपीएस और एक आईएएस अधिकारियों के नामों पर विचार के बाद एक सेवानिवृत्त सैन्य कमांडर का चयन रणनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है। प्रशासनिक दृष्टि से स्वच्छ छवि और सैन्य अनुशासन से जुड़े व्यक्तित्व को मंदिर प्रबंधन की कमान सौंपकर संस्थागत पारदर्शिता को मजबूत करने का संदेश दिया गया है।
📜 गोविंद देव गिरी बने पूर्णकालिक महासचिव: एजेंडे से बाहर था यह बड़ा निर्णय
ट्रस्ट के पुनर्गठन और महत्वपूर्ण नियुक्तियां:
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महासचिव पद पर बदलाव: ट्रस्ट के सबसे प्रभावशाली पद ‘महासचिव’ पर चंपत राय के स्थान पर अब स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज को पूर्णकालिक और स्थायी महासचिव नियुक्त किया गया है।
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गोपनीय निर्णय: बैठक के पूर्व-निर्धारित 12 सूत्रीय एजेंडे में महासचिव पद में बदलाव या कोषाध्यक्ष बदलने का कोई उल्लेख नहीं था, किंतु बैठक उपरांत जारी आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में इस बड़े फैसले की पुष्टि की गई।
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संस्थान में सर्वोच्च अधिकार: ट्रस्ट द्वारा जारी संरचना के अनुसार, नवनियुक्त CEO सीधे महासचिव को रिपोर्ट करेंगे। इसका अर्थ यह है कि ट्रस्ट के नीतिगत और प्रशासनिक पदानुक्रम में स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज ही सर्वोच्च निर्णयकर्ता की भूमिका में होंगे।
⚙️ विहिप महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा का बयान: ‘प्रबंधन नहीं, नीति निर्धारण है ट्रस्ट का काम’
संगठनात्मक भूमिकाओं और CEO के अधिकारों की रूपरेखा:
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कार्यक्षेत्र का विभाजन: विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय महामंत्री बजरंग लाल बागड़ा ने स्पष्ट किया कि मंदिर के रोजमर्रा के प्रबंधन और संचालन का जिम्मा ट्रस्ट के सदस्यों का नहीं, बल्कि कार्यकारी तंत्र का है; ट्रस्ट का मूल कार्य केवल नीति निर्धारण करना है।
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3-सदस्यीय चयन समिति की संस्तुति: उन्होंने बताया कि CEO पद पर पेशेवर नियुक्ति का विमर्श काफी समय से चल रहा था, जिसे हालिया घटनाक्रमों के बाद गति दी गई। 3 सदस्यीय चयन समिति ने तीन नामों की अनुशंसा की थी, जिसमें सर्वसम्मति से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर मुहर लगी।
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कार्यभार की प्रक्रिया: नवनियुक्त CEO अयोध्या पहुंचकर पहले रामलला के दर्शन करेंगे, तत्पश्चात ट्रस्ट पदाधिकारियों से व्यवस्थागत समझ बनाकर औपचारिक पदभार ग्रहण करेंगे।
🛑 चंपत राय की भूमिका पर विराम: क्या अयोध्या में खत्म हुआ प्रभाव?
चंपत राय की संगठनात्मक स्थिति और भावी दायित्व:
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री-एंट्री के आसार नहीं: हालिया दिनों में क्लीन चिट और आंतरिक चर्चाओं के बाद चंपत राय की वापसी की जो अटकलें लगाई जा रही थीं, नई नियुक्तियों के बाद उन पर पूर्ण विराम लग गया है।
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उम्र का तकाजा: बजरंग लाल बागड़ा के अनुसार, 82 वर्षीय चंपत राय संगठन में आयु और अवस्था के अनुरूप आगे कार्य करेंगे। वे वर्तमान में विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष हैं, जो संगठनात्मक रूप से किसी भी ट्रस्ट के पद से उच्च पद है।
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राष्ट्रीय प्रवास का दायित्व: वे आगामी महीनों में विभिन्न राज्यों के प्रवास पर रहेंगे और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन करेंगे। वर्तमान में अयोध्या में उनकी प्रत्यक्ष जिम्मेदारी केवल कारसेवकपुरम स्थित गोशाला के अध्यक्ष पद तक सीमित रह गई है।
🔗 नई टीम और अशोक सिंघल फाउंडेशन का अहम कनेक्शन
ट्रस्ट के नए पदाधिकारियों का संस्थागत जुड़ाव:
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महेश भगचंदका बने कोषाध्यक्ष: M2K ग्रुप के चेयरमैन और अशोक सिंघल पर पुस्तक लिख चुके महेश भगचंदका को ट्रस्ट का नया ट्रस्टी और कोषाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टियों में शामिल हैं।
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सांस्थानिक संबंध: पद छोड़ने वाले चंपत राय, नए महासचिव गोविंद देव गिरी और नए कोषाध्यक्ष महेश भगचंदका—तीनों ही हस्तियों का अशोक सिंघल फाउंडेशन से सीधा जुड़ाव रहा है।
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संरक्षक मंडल की संरचना: फाउंडेशन के संरक्षक मंडल (पैट्रन) में स्वामी अवधेशानंद गिरि, गोविंद देव गिरी और आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश भैयाजी जोशी शामिल हैं, जो राम मंदिर ट्रस्ट की नई संगठनात्मक संरचना में भी वैचारिक समन्वय को स्पष्ट करता है।
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