Local & National News in Hindi

हरियाणा में बारिश के चलते सब्जियों के दाम आसमान पर, मटर-अदरक ₹200 पार; रसोई का बजट बिगड़ा

21

हरियाणा: प्रदेश में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश और बाहरी राज्यों से आने वाली सप्लाई चेन प्रभावित होने के कारण हरी सब्जियों की कीमतों में भीषण उछाल देखा जा रहा है।

राज्य भर की प्रमुख सब्जी मंडियों में भाव अचानक बढ़ने से आम जनता और मध्यमवर्गीय परिवारों की रसोई का मासिक बजट पूरी तरह चरमरा गया है। हरी मटर और अदरक के खुदरा भाव ₹200 प्रति किलोग्राम का स्तर पार कर चुके हैं। वहीं, प्रतिदिन के भोजन का अनिवार्य हिस्सा माने जाने वाले टमाटर और प्याज की कीमतें भी महज एक महीने के भीतर दोगुनी हो चुकी हैं, जिससे गृहिणियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

📊 सब्जी मंडियों में आवक घटी, ढुलाई खर्च बढ़ा: जानिए खुदरा बाजार में सब्जियों के ताजा रेट

मंडी आढ़तियों के अनुसार दरें और प्रमुख सब्जियों के भाव:

  • आवक में भारी कमी: आढ़तियों का कहना है कि जलभराव और फसल खराब होने के चलते खेतों से मंडियों तक होने वाली आवक में भारी गिरावट आई है, जबकि परिवहन व ढुलाई भाड़े में बढ़ोतरी से लागत बढ़ गई है।

  • मटर और अदरक: खुदरा बाजारों में बढ़िया क्वालिटी की मटर ₹180 से ₹200 प्रति किलो और अदरक ₹200 से ₹220 प्रति किलो तक बिक रहा है।

  • टमाटर और प्याज की मार: कुछ सप्ताह पूर्व तक ₹30 से ₹40 प्रति किलो बिकने वाला देशी व हाइब्रिड टमाटर अब ₹70 से ₹80 प्रति किलो बिक रहा है। इसी प्रकार प्याज के भाव ₹30 से उछलकर ₹60 प्रति किलो पर पहुंच गए हैं।

  • अन्य हरी सब्जियां: फूलगोभी, भिंडी, शिमला मिर्च और तोरी जैसी मौसमी सब्जियों के दाम भी ₹60 से लेकर ₹100 प्रति किलोग्राम के दायरे में बने हुए हैं।

🛒 रसोई के बजट पर महंगाई की दोहरी मार: किलो के बदले पाव में खरीदारी करने को मजबूर ग्राहक

उपभोक्ताओं पर प्रभाव और खरीदारी का बदला तरीका:

  • जेब पर अतिरिक्त बोझ: सब्जियों की आसमान छूती कीमतों ने आम उपभोक्ताओं की जेब ढीली कर दी है, जिससे घरेलू खर्चों का संतुलन बिगड़ चुका है।

  • घटी खरीदारी की मात्रा: जो परिवार पहले सप्ताह भर की सब्जियां कई किलोग्राम के हिसाब से एक साथ खरीद लेते थे, वे अब महंगाई से बचने के लिए आधा किलो या 250 ग्राम (पाव) की मात्रा में ही जरूरत पूरी करने को विवश हैं।

  • थाली से गायब हरी सब्जियां: अत्यधिक महंगाई के चलते कई परिवारों की दैनिक थाली से हरी सब्जियां गायब होने लगी हैं और लोग दालों या अन्य विकल्पों पर निर्भर हो रहे हैं।

📉 खुदरा कारोबार में 30 से 40 फीसदी की गिरावट: दुकानदारों और वेंडर्स को भी उठाना पड़ रहा नुकसान

सब्जी विक्रेताओं की परेशानी और बाजार की स्थिति:

  • बिक्री पर सीधा असर: सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि कीमतों में अप्रत्याशित वृद्धि होने के कारण मंडियों में ग्राहकों की आमद घटी है, जिससे ओवरऑल रिटेल बिक्री में 30 से 40 प्रतिशत तक की तेज गिरावट दर्ज की गई है।

  • सड़न और बर्बादी का जोखिम: बिक्री घटने और बरसात के मौसम में नमी के कारण हरी सब्जियों के जल्दी खराब होने या सड़ने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे खुदरा दुकानदारों को दोहरी आर्थिक चपत लग रही है।

  • राहत की उम्मीद: कारोबारियों का मानना है कि जब तक मौसम पूरी तरह सामान्य नहीं होता और स्थानीय स्तर पर नई फसलों की आवक नहीं बढ़ती, तब तक कीमतों में विशेष नरमी की संभावना कम ही नजर आ रही है।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.