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श्रीश्री रविशंकर ने अयोधया में किया रामलला का दर्शन, देखा मंदिर निर्माण का कार्य

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लखनऊ। वाराणसी में सोमवार को श्रीकाशी विश्वनाथ धाम के नव्य तथा भव्य स्वरूप के लोकार्पण के साक्षी रहे आध्यात्म गुरू श्रीश्री रविशंकर ने मंगलवार को रामनगरी अयोधया में रामलला का दर्शन किया। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ उन्होंन मंदिर निर्माण के कार्य को भी देखा और भव्य मंदिर निर्माण को सराहनीय बताया।

विख्यात धर्मगुरु एवं आपसी संवाद से मंदिर मस्जिद विवाद हल करने का प्रयास करने के अभियान में लगे श्रीश्री रविशंकर मंगलवार को राम नगरी पहुंचे। उन्होंने पूर्वान्ह रामलला का दर्शन पूजन किया और राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण की गतिविधियों का निरीक्षण किया। रामलला का दर्शन करने के बाद श्रीश्री विहिप के स्थानीय मुख्यालय कारसेवक पुरम पहुंचे और वहां रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय से भेंट की

इस मुलाकात के बाद मीडिया से अनौपचारिक तौर पर मुखातिब श्रीश्री ने राम जन्मभूमि पर निर्माणाधीन मंदिर की भव्यता और तकनीक को प्रशंसनीय बताया तथा इसके लिए राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रयासों की सराहना की। यहां से वह पुण्य सलिला सरयू से लगे राजघाट क्षेत्र की ओर रवाना हुए। माना जा रहा है कि श्रीश्री रविशंकर अपनी संस्था के लिए अयोध्या में जमीन तलाश रहे हैं और अयोध्या को केन्द्र बनाकर अपनी आध्यात्मिक अलख और बुलंद करना चाहते हैं। श्रीश्री रविशंकर का अयोध्या से जुड़ाव कोई नया नहीं है। दशकों पूर्व से आस्था के केन्द्र के रूप में विख्यात अयोध््या की यदा-कदा यात्रा करते रहे हैं। उन्हेंने हमेशा श्री राम, राम नगरी एवं सरयू के प्रति गहन निष्ठा का इजहार किया। नौ नवंबर 2019 को राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद का फैसला आने से करीब ढाई साल पूर्व जब सुप्रीम कोर्ट ने ही आपसी सहमति और बातचीत से विवाद के समाधान की सलाह दी, तो श्रीश्री सहमति संवाद की मुहिम के अग्रदूत की भूमिका में राम नगरी की ओर उन्मुख हुए और इस अवधि में आधा दर्जन बार अयोध्या की यात्रा की। इस विवाद का हल सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से हुआ, किंतु श्रीश्री रविशंकर दोनों पक्षों में संवाद स्थापित करने की दिशा में काफी हद तक सफल रहे।

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