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मनीष हत्याकांड : जांच से पहले मिटा दिए थे कई साक्ष्य, अब पुलिस वर्दी कब्जे में लेगी सीबीआइ

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कानपुर। बर्रा के प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की पुलिस पिटाई से मौत के मामले में सीबीआइ जल्द ही आरोपित पुलिसकर्मियों की वर्दी कब्जे में लेगी। पहले मामले की जांच कर रही एसआइटी वर्दियां कब्जे में नहीं ले पाई थी। मनीष की पत्नी का कहना था कि जब सीबीआइ उनसे पूछताछ करने के लिए आई थी तब इसकी जानकारी दी गई थी।

गोरखपुर के रामगढ़ताल के होटल कृष्णा पैलेस में पुलिस की बर्बरता का शिकार हुए बर्रा तीन निवासी प्रापर्टी डीलर मनीष गुप्ता की मौत के मामले में मुख्यमंत्री के आदेश पर एसआइटी गठित की गई थी। जांच से पहले ही वारदात में शामिल पुलिस कर्मियों ने कई साक्ष्य मिटा दिए थे। मनीष की पत्नी मीनाक्षी ने दोषी पुलिस कर्मियों की वारदात के दिन पहनी हुई वर्दियां कब्जे में न लिए जाने को लेकर सवाल खड़े करते हुए पुलिस आयुक्त से गुहार लगाई थी। कहा था कि आरोपित पुलिस कर्मियों ने मनीष को होटल के कमरे से निकाल कर अस्पताल और फिर वहां से पोस्टमार्टम हाउस पहुंचाया था।

इस बीच कहीं न कहीं वर्दी में खून भी लगा होगा, जिसकी फोरेंसिक जांच कराई जानी चाहिए। यह एक अहम साक्ष्य होगा। पुलिस आयुक्त ने उन्हें भरोसा दिलाया था कि एसआइटी सभी की वर्दियां कब्जे में लेकर बेंजाडीन टेस्ट कराएगी। सीबीआइ जांच शुरू होने से पहले तक एसआइटी की टीम वर्दियां कब्जे में नहीं ले सकी थी। मीनाक्षी का कहना है कि उसने वर्दियों के बारे में सीबीआइ से उसी दिन बात की थी, जब टीम उनके बयान दर्ज करने आई थी। सीबीआइ जल्द ही आरोपित पुलिस कर्मियों की वर्दियां कब्जे में लेगी।

एसआइटी से केस डायरी ले गई सीबीआइ

मनीष हत्याकांड में पहले अपर पुलिस आयुक्त मुख्यालय आनंद कुमार तिवारी के निर्देशन में एसआइटी जांच शुरू हुई थी। एडिशनल डीसीपी पश्चिम बृजेश कुमार श्रीवास्तव विवेचक थे। एसआइटी ने करीब 15 दिनों तक गोरखपुर में रहकर पड़ताल की थी। सीबीआइ ने जांच शुरू करने के बाद एसआइटी से केस डायरी ले ली है। एसआइटी ने गोरखपुर पुलिस के खिलाफ कई साक्ष्य भी जुटाए थे, जो सीबीआइ के हवाले कर दिए गए हैं। फिलहाल एक बात साबित हो चुकी है कि पुलिस ने मनीष गुप्ता के साथ अभद्रता और मारपीट की थी। यह जानकारी नहीं मिली है कि हत्या के सवाल पर एसआइटी जांच में कहां तक पहुंची थी।

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