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पेरेंट्स सावधान! बच्चों के फोन में आज ही बदल दें ये 5 सेटिंग, फिर कभी नहीं आएगा गंदा कंटेंट; सुरक्षित रहेगा आपका बच्चा

आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन बच्चों की भी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. ऑनलाइन क्लास हो या प्रोजेक्ट वर्क, बच्चों के हाथ में मोबाइल होना अब आम बात है लेकिन, माता-पिता के लिए यह सहूलियत एक बड़ी चिंता का विषय भी है. डर यह रहता है कि पढ़ाई के बहाने बच्चा इंटरनेट की अंधेरी दुनिया में न भटक जाए या किसी आपत्तिजनक कंटेंट के संपर्क में न आ जाए. सेल्सफोर्स का एक हालिया सर्वे बताता है कि भारत में 73% लोग एआई (AI) का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिसमें जेन-जी (Gen-Z) की हिस्सेदारी 65% है.

तकनीक की यह रफ्तार अपने साथ ‘डीपफेक’ और ‘फेक न्यूज’ जैसे खतरे भी लाई है. अमेरिका की एक दुखद घटना, जहां एक 14 साल के बच्चे ने एआई चैटबॉट से लंबी बातचीत के बाद आत्महत्या कर ली थी, यह चेतावनी देने के लिए काफी है कि बच्चों की डिजिटल दुनिया सुरक्षित नहीं है. हाल ही में ‘ग्रोक’ (Grok) पर भी आपत्तिजनक सामग्री बढ़ने की खबरें आई हैं. ऐसे में, अपने बच्चे को सुरक्षित रखने के लिए फोन में कुछ जरूरी बदलाव करना बेहद जरूरी है.

डिजिटल जासूसी नहीं, स्मार्ट मॉनिटरिंग है जरूरी

अक्सर माता-पिता को लगता है कि बच्चे पर नजर रखना उसकी आजादी में दखल है, लेकिन सुरक्षा के लिहाज से यह बेहद जरूरी है. सिर्फ कंटेंट ही नहीं, बल्कि बच्चे की पूरी डिजिटल गतिविधि पर नजर रखने के लिए ‘Watcher’ जैसे ऐप्स काफी मददगार साबित हो रहे हैं. यह ऐप अभिभावकों को एक ‘वर्चुअल आंख’ देता है. इसके जरिए आप न केवल यह देख सकते हैं कि बच्चे के फोन पर कौन से नोटिफिकेशन आ रहे हैं, बल्कि उसकी लाइव लोकेशन भी ट्रैक कर सकते हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे यह पता चलता है कि बच्चा किस ऐप पर कितना समय बिता रहा है, जिससे आप समय रहते उसे टोक सकें.

एआई को ऐसे बनाएं सुरक्षित

बच्चे स्कूल के काम के लिए चैटजीपीटी (ChatGPT) और गूगल जेमिनी (Gemini) का खूब इस्तेमाल कर रहे हैं. यहां पेरेंटल कंट्रोल बेहद कारगर है.

  1. ChatGPT: आप ‘फैमिली अकाउंट’ के जरिए नियंत्रण रख सकते हैं. इसके लिए सेटिंग्स में जाकर ‘पेरेंटल कंट्रोल्स’ चुनें और ‘एड फैमिली मेंबर’ पर क्लिक करें. बच्चे का ईमेल जोड़कर आप उसकी चैट हिस्ट्री और इस्तेमाल को सीमित कर सकते हैं.
  2. Google Gemini: गूगल ने अपने ‘फैमिली लिंक’ सिस्टम को जेमिनी से भी जोड़ा है. प्ले स्टोर से ‘Family Link’ ऐप डाउनलोड करें और बच्चे के जीमेल अकाउंट को इससे लिंक करें. इसके बाद, ‘कंट्रोल्स’ और फिर ‘एप्स’ में जाकर आप जेमिनी के एक्सेस को नियंत्रित कर सकते हैं. यह सुनिश्चित करता है कि बच्चा एआई से क्या पूछ रहा है और उसे क्या जवाब मिल रहा है.

YouTube ,Instagram पर लगाएं लगाम

सबसे ज्यादा जोखिम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर होता है. यूट्यूब बच्चों के बीच सबसे लोकप्रिय है, इसलिए यहां फिल्टर लगाना अनिवार्य है. अगर बच्चा आपके फोन पर यूट्यूब देखता है, तो ऐप की सेटिंग्स में ‘फैमिली सेंटर’ (Family Center) पर जाएं और बच्चों के लिए एक अलग प्रोफाइल बनाएं. वहीं, अगर उनका अपना डिवाइस है, तो ‘गूगल फैमिली लिंक’ के जरिए ऐसे सर्च और रिकमेंडेशन को पूरी तरह ब्लॉक कर दें. 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए इसे कड़ाई से लागू करना चाहिए.

दूसरी ओर, इंस्टाग्राम पर ‘सुपरविजन मोड’ एक बेहतरीन टूल है. प्रोफाइल मेन्यू में ‘सुपरविजन फॉर टीन्स’ (Supervision for Teens) का विकल्प चुनें और बच्चे के फोन पर इसे अप्रूव करवाएं. इससे आप यह तय कर सकते हैं कि बच्चा किस तरह के एआई कैरेक्टर से बात कर सकता है और किसे ब्लॉक करना है. आप कुछ खास आपत्तिजनक कीवर्ड्स को भी ब्लॉक कर सकते हैं, ताकि वैसा कंटेंट उनकी फीड में आए ही नहीं.

इन ऐप्स से मिलेगी एक्स्ट्रा सुरक्षा लेयर

कई बार इन-बिल्ट सेटिंग्स काफी नहीं होतीं. ऐसे में थर्ड-पार्टी ऐप्स एक अतिरिक्त सुरक्षा चक्र प्रदान करते हैं. ‘Net Nanny’ जैसे ऐप्स वेबसाइट और सोशल मीडिया पर मौजूद कंटेंट को फिल्टर करने में माहिर हैं. वहीं, ‘Canopy’ ऐप एआई की मदद से फोटो और टेक्स्ट में छिपे गंदे कंटेंट को पहचानकर उसे तुरंत ब्लॉक कर देता है. यदि आप बच्चे की पूरी ब्राउजिंग हिस्ट्री और स्क्रीन टाइम का लेखा-जोखा रखना चाहते हैं, तो ‘Qustodio’ एक अच्छा विकल्प है. ये सभी ऐप्स बैकग्राउंड में काम करते हैं और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की रिपोर्ट सीधे माता-पिता को भेजते हैं.

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