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पूर्व बीजपी सांसद बृजभूषण सिंह मामले में क्लोजर रिपोर्ट पर फैसला टला, अब 15 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई

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भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व प्रमुख और पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह पर चल रहे मामले की सुनवाई गुरुवार को टल गयी. बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ एक नाबालिग पहलवान द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत को रद्द करने की पुलिस रिपोर्ट को स्वीकार किया जाए या नहीं, नई दिल्ली की कोर्ट 15 अप्रैल को अपना फैसला सुना सकती है.

बता दें कि गुरुवार को इस मामले की सुनवाई होनी थी, लेकिन सुनवाई स्थगित कर दी गई. इस मामले की सुनवाई अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गोमती मनोचा की कोर्ट में होनी थी. गुरुवार को छुट्टी पर थीं. इस कारण इस मामले पर फैसला नहीं हो सका.

इससे पहले 1 अगस्त, 2023 को कोर्ट में इन-चैंबर कार्यवाही हुई थी. उस दौरान नाबालिग पहलवान ने कोर्ट को सूचित किया था कि उस इस मामले में पुलिस की जांच रिपोर्ट से पूरी तरह से संतुष्ट है.

क्लोजर रिपोर्ट से कोई विरोध नहीं, बोली थी नाबालिग पहलवान

नाबालिग पहलवान ने इन-चैंबर कार्यवाही के दौरान बताया था कि पुलिस ने जांच के दौरान जो क्लोजर रिपोर्ट दी थी. वह उसका विरोध नहीं करती है.

बता दें कि नाबालिग पहलवान द्वारा दर्ज यौन उत्पीड़न की शिकायत के मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से 15 जून, 2023 को कोर्ट के समक्ष एक रिपोर्ट दाखिल की गई थी.

इस रिपोर्ट में नाबालिग लड़की से जुड़े मामले को रद्द करने की मांग की गई थी. रिपोर्ट में यह कहा गया था कि नाबालिग के पिता ने जांच के दौरान चौंकाने वाला दावा किया था. रिपोर्ट में कहा गया था कि उसने लड़की के साथ कथित अन्याय का बदला लेने के लिए इस तरह की शिकायत की थी. उसने बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न की झूठी शिकायत की थी.

आरोप साबित होने पर तीन साल की सजा का प्रावधान

बृज भूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम के प्रावधानों को हटाने की पुलिस ने सिफारिश की थी. पर छह महिला पहलवानों की ओर से दर्ज एक अलग मामले में पूर्व बीजेपी सांसद पर यौन उत्पीड़न और पीछा करने का आरोप लगाया था.

पुलिस की ओर से नाबालिग पहलवान से जुड़ी इन शिकायतों को रद्द करने की सिफारिश की गई थी. पुलिस की ओर से कहा गया था कि इन शिकायतों को कोई पुष्टि करने वाला सबूत नहीं मिला है

बता दें कि POCSO अधिनियम में आरोप साबित हो जाने पर आरोपी को कम से कम तीन साल की कैद का प्रावधान है, हालांकि यह इस बात पर निर्भर करता है कि अपराध किस धारा के तहत दर्ज किया गया है.

क्लोजर रिपोर्ट के बावजूद, अदालत को यह तय करना है कि इसे स्वीकार किया जाए या आगे की जांच का आदेश दिया जाए. बृज भूषण शरण सिंह ने लगातार आरोपों से इनकार किया है.

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