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प्यासा सिवनी: जल संकट ने प्रशासनिक दावों की पोल खोली

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सिवनी। जिले में बीते चार दिनों से जारी पेयजल संकट ने न सिर्फ प्रशासन की तैयारियों पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं, बल्कि जल प्रबंधन से जुड़ी तमाम योजनाओं की जमीनी सच्चाई को भी उजागर कर दिया है। गांगिया, ढाकनीपुरा समेत कई गांवों में हैंडपंप सूख चुके हैं, नलजल योजनाएं ठप पड़ी हैं और ग्रामीणजन खेतों व पड़ोसी गांवों से पानी ढोने को मजबूर हैं।
2025 में पानी की ऐसी किल्लत शर्मनाक
वर्ष 2025 में जब ‘हर घर नल से जल’ जैसी योजनाओं के दावे किए जा रहे हैं, तब लोगों का बूंद-बूंद पानी के लिए भटकना एक बड़ी विडंबना बन गया है। इस संकट के पीछे लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) की निष्क्रियता, नगर पालिका की लापरवाही, पंचायतों की उदासीनता और जिला प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं।
महत्वाकांक्षी योजनाएं, अधूरे वादे
पायली समूह जल प्रदाय योजना, जो बरगी डैम से सिवनी और जबलपुर तक जल आपूर्ति के लिए बनाई गई थी, वर्षों बाद भी अधूरी है। जल जीवन मिशन के तहत जिले में 2.69 लाख कनेक्शन देने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन अब तक मात्र 95,000 घरों तक ही जल आपूर्ति संभव हो सकी है।
टैंकर नहीं, चाहिए स्थायी समाधान
फिलहाल प्रशासन पानी के टैंकरों से जरूरतों को पूरा करने का प्रयास कर रहा है, जो केवल एक अस्थायी समाधान है। जरूरत इस बात की है कि योजनाओं को समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए और ग्रामीण इलाकों को प्राथमिकता देते हुए जल संकट का स्थायी समाधान खोजा जाए।
सिर्फ सिवनी नहीं, ये है चेतावनी
सिवनी का जल संकट महज एक जिले की समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर चेतावनी है। अगर जल योजनाओं को ज़िम्मेदारी से और तय समयसीमा में लागू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में कई जिले इसी त्रासदी का सामना कर सकते हैं।
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