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थर्ड क्लास से हिंदी पढ़ाने पर हंगामा, मनसे के तेवर देख झुका चांदिवली स्कूल प्रशासन

महाराष्ट्र में एक बार फिर मराठी भाषा को लेकर विवाद गरमा गया है. मुंबई के चांदिवली इलाके में स्थित सेंट मेरीज मलंकारा हाई स्कूल में महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के कार्यकर्ताओं ने हिंदी भाषा को तीसरी कक्षा में अनिवार्य करने के स्कूल के फैसले का जमकर विरोध किया है. मनसे का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने प्राथमिक स्कूलों में हिंदी अनिवार्यता का आदेश पहले ही रद्द कर दिया है. इसके बावजूद स्कूल प्रशासन द्वारा तीसरी कक्षा के छात्रों को हिंदी पढ़ने के लिए फॉर्म भरवाए जाने पर कार्यकर्ताओं ने स्कूल प्रबंधन को आड़े हाथों लिया है.

बता दें कि शनिवार को मनसे कार्यकर्ता स्कूल परिसर में पहुंचे. जहां उन्होंने प्रशासन से इस मुद्दे पर सफाई मांगी है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि राज्य सरकार के आदेशों की अवहेलना किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी. कार्यकर्ताओं ने गुस्से में कहा कि ‘स्कूल एक मंदिर है, हम यहां हंगामा या मारपीट नहीं करना चाहते है. अगर यह कोई और जगह होती, तो मनसे स्टाइल में जवाब दे चुके होते.’

स्कूल प्रशासन ने माफी मांगी

मनसे के कड़े रुख के सामने स्कूल प्रशासन ने अपनी गलती स्वीकार की और आश्वासन दिया कि भविष्य में सरकारी नियमों का पूरी तरह पालन किया जाएगा. प्रशासन ने कहा कि हिंदी अनिवार्यता से संबंधित कोई भी कदम अब नहीं उठाया जाएगा. मनसे ने चेतावनी दी कि अगर भविष्य में किसी अन्य स्कूल में इस तरह का अनधिकृत फैसला लिया गया, तो वे व्यापक आंदोलन छेड़ेंगे. कार्यकर्ताओं ने स्कूलों से अपील की कि वे केवल सरकारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और किसी भी भाषा को जबरदस्ती थोपने की कोशिश न करें.

क्या था पूरा मामला?

यह घटना चांदिवली विधानसभा क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है. स्थानीय लोग इस मुद्दे पर अलग-अलग राय रख रहे हैं. कुछ लोग मनसे के कदम का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि स्कूलों को बच्चों की बेहतरी के लिए स्वतंत्रता मिलनी चाहिए. जिससे वे सभी भाषाओं का ज्ञान प्राप्त कर सकें. बता दें कि महाराष्ट्र इन दिनों भाषा विवाद काफी तूल पकड़ रहा है जिसके चलते आए दिन ऐसे मामले सामने आ रहे हैं. जहां मराठी-हिंदी के भाषा विवाद से ऐसी घटनाएं हो रही हैं.

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