राष्ट्र चंडिका न्यूज़,सिवनी । सिवनी जिला अस्पताल की बदहाल स्थिति अब किसी से छिपी नहीं है। गंदगी, बदबू, अव्यवस्था और इलाज में घोर लापरवाही ने इस अस्पताल को बदहाली का अड्डा बना दिया है। अस्पताल में हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज की आस में आते हैं, लेकिन यहां की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मानो गरीबों की जान की कोई कीमत नहीं बची।
स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खुली – मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. जयपाल सिंह ठाकुर के अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी साफ दिख रही है। जिले में कई अवैध क्लीनिक, अस्पताल और पैथोलॉजी लैब बिना किसी रोक-टोक के चल रहे हैं। इन पर कार्रवाई के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हो रही है।
अस्पताल का बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन भी सवालों के घेरे में है। इसे ‘बेस्ट कृपा वेस्टेज’ कंपनी को सौंपा गया है, लेकिन अस्पताल परिसर में फैली गंदगी और बदबू से साफ है कि सफाई केवल कागजों में हो रही है। ये हालात मरीजों के लिए गंभीर खतरा हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चुप्पी – जिला कलेक्टर संस्कृति जैन जहां ‘गिफ्ट अ डेस्क’ जैसी योजनाओं से सुर्खियों में हैं, वहीं जिला अस्पताल की दयनीय हालत पर उनकी चुप्पी प्रशासनिक असंवेदनशीलता को दर्शाती है। विधायक दिनेश राय मुनमुन और सांसद भारती पारधी भी अस्पताल को लेकर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठा पाए हैं। जनता सवाल पूछ रही है कि क्या जनप्रतिनिधियों का काम सिर्फ मंच पर भाषण देना और सोशल मीडिया की शोभा बढ़ाना रह गया है?
जनता की बढ़ती नाराज़गी –अस्पताल की बदहाली को देखते हुए आम नागरिकों में रोष बढ़ता जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही अस्पताल की स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरकर विरोध करना पड़ेगा।
अब सवाल यह है- क्या जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग नींद से जागेंगे?क्या जनप्रतिनिधि जनता के वास्तविक मुद्दों की ओर ध्यान देंगे?और सबसे बड़ा सवाल, क्या सिवनी के नागरिकों को एक साफ, सुरक्षित और सुविधाजनक अस्पताल मिल पाएगा?यदि समय रहते जिम्मेदार नहीं जागे, तो सिवनी अस्पताल किसी बड़े हादसे का गवाह बन सकता है।