राष्ट्र चंडिका न्यूज़ सिवनी ,सिवनी पुलिस महकमे को हिला देने वाले 2.96 करोड़ की हवाला राशि की हेराफेरी (कथित डकैती) के मामले में एक फोन कॉल अब सवालों के केंद्र में आ गया है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, घटना वाले दिन जब पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही थी, उस दौरान निलंबित नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) पूजा पांडेय द्वारा किए गए एक कॉल में वह किसी उच्चाधिकारी को सर कहकर संबोधित कर रही थीं।
जाँच अधिकारी और कानून के जानकारों का मानना है कि यह फोन कॉल डिटेल रिकॉर्ड ही पूरे मामले की दिशा तय कर सकता है। कॉल डिटेल सामने आने पर यह स्पष्ट हो सकता है कि इस लूटकांड में पर्दे के पीछे से कौन सा बड़ा चेहरा इस घटनाक्रम को नियंत्रित कर रहा था या साजिश में शामिल था।
एएसपी दीपक मिश्रा को जांच से हटाना बना रहस्य
सवाल यह है कि दीपक मिश्रा को हटाने की क्या वजह रही? क्या उनके प्रारंभिक कदमों से कोई असहज सच्चाई उजागर होने लगी थी? यह कदम मामले की गंभीरता और शीर्ष स्तर की संलिप्तता की ओर इशारा कर रहा है।
एक और बड़ा अधिकारी हो सकता है निलंबित
जबलपुर रेंज आईजी प्रमोद वर्मा की त्वरित कार्रवाई से पुलिस महकमे में दहशत का माहौल है। चर्चा है कि देर रात तक एक और बड़े अधिकारी पर गाज गिर सकती है। यदि आज कोई शीर्ष अधिकारी निलंबित होता है, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि यह डकैती जिला पुलिस प्रशासन के शीर्ष तक अपनी जड़ें फैला चुकी थी।
तीन पर एफआईआर दर्ज -जाँच के दायरे में हवाला
जांच प्रतिवेदन के आधार पर, 1.45 करोड़ नकद जब्त होने के मामले में हवाला का रुपया इधर-उधर करने के आरोप में लखनवाड़ा थाना पुलिस ने देर रात सोहन परमार, इरफान पठान और शेख मुख्तियार के खिलाफ संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि रुपया किसका था और कहां से लाया गया था।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल सूचना में देरी- जप्ती वैध थी, तो तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना क्यों नहीं दी गई?
रकम में अंतर-पूरी रकम 2.96 करोड़ में से केवल 1.45 करोड़ ही मालखाने में क्यों जमा की गई? (कथित तौर पर कारोबारी को लौटाई गई रकम में 25.60 लाख कम पाए गए।)
जांच एजेंसियाँ घटना की सूचना में हुई देरी और मालखाने में रकम जमा करने की 24 घंटे की देरी के पीछे के कारणों की गहनता से जांच कर रही हैं। सभी की निगाहें अब जबलपुर आईजी को सौंपे जाने वाले जांच प्रतिवेदन पर टिकी हैं।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
आयकर विभाग की कार्रवाई-कथित लूट के आरोपों में जब्त 1.45 करोड़ की जाँच करने के लिए 10 अक्टूबर को आयकर विभाग का दल जबलपुर से सिवनी पहुँचा था।
वाहन की स्थिति- जिस कार (क्र. एमच 13 ईके 3430) से रकम जब्त हुई, वह कहाँ गई, और उसमें कौन-कौन सवार थे, इसकी जाँच एफआईआर दर्ज होने के बाद स्पष्ट होगी। ड्राइवर और एक अन्य से कथित मारपीट की बात भी सामने आ रही है।
जाँच की स्थिति- पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मेहता का कहना है कि सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जाँच की जा रही है और जाँच पूरी होने के बाद पूरा सच सामने आ जाएगा।
नया प्रभार- एसपी सुनील मेहता ने एसडीओपी का अतिरिक्त लखनवाड़ा थाना पुलिस ने देर रात सोहन परमार, इरफान पठान और शेख मुख्तियार के खिलाफ संगठित अपराध की धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि रुपया किसका था और कहां से लाया गया था।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल सूचना में देरी- जप्ती वैध थी, तो तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना क्यों नहीं दी गई?
रकम में अंतर-पूरी रकम 2.96 करोड़ में से केवल 1.45 करोड़ ही मालखाने में क्यों जमा की गई? (कथित तौर पर कारोबारी को लौटाई गई रकम में 25.60 लाख कम पाए गए।)
जांच एजेंसियाँ घटना की सूचना में हुई देरी और मालखाने में रकम जमा करने की 24 घंटे की देरी के पीछे के कारणों की गहनता से जांच कर रही हैं। सभी की निगाहें अब जबलपुर आईजी को सौंपे जाने वाले जांच प्रतिवेदन पर टिकी हैं।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
आयकर विभाग की कार्रवाई-कथित लूट के आरोपों में जब्त 1.45 करोड़ की जाँच करने के लिए 10 अक्टूबर को आयकर विभाग का दल जबलपुर से सिवनी पहुँचा था।
वाहन की स्थिति- जिस कार (क्र. एमच 13 ईके 3430) से रकम जब्त हुई, वह कहाँ गई, और उसमें कौन-कौन सवार थे, इसकी जाँच एफआईआर दर्ज होने के बाद स्पष्ट होगी। ड्राइवर और एक अन्य से कथित मारपीट की बात भी सामने आ रही है।
जाँच की स्थिति- पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार मेहता का कहना है कि सभी बिंदुओं पर गंभीरता से जाँच की जा रही है और जाँच पूरी होने के बाद पूरा सच सामने आ जाएगा।
नया प्रभार- एसपी सुनील मेहता ने एसडीओपी का अतिरिक्त प्रभारी एजेके थाना प्रभारी को सौंप दिया है।
जनप्रतिनिधियों का मौन बना रहस्य
यह मामला पुलिस की साख से जुड़ा है और इसमें बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की बू आ रही है, इसके बावजूद जिले के चुने हुए जनप्रतिनिधि और विपक्ष के नेता दोनों ही मौन नजर आ रहे हैं। राजनीतिक रूप से संवेदनशील इस मुद्दे पर उनका मौन साध लेना आम जनता और सोशल मीडिया में सक्रिय संगठनों के पदाधिकारियों के बीच कई तरह की अटकलें पैदा कर रहा है। सोशल मीडिया पर लोग खुलेआम सवाल पूछ रहे हैं कि इतनी बड़ी घटना पर, जिसमें पुलिसकर्मी सीधे तौर पर संलिप्त पाए गए हैं, नेता क्यों नहीं बोल रहे हैं? इस चुप्पी को कई लोग पक्ष और विपक्ष दोनों की मिलीभगत या किसी दबाव के रूप में देख रहे हैं।
इस पूरे मामले में जिले के कई जनप्रतिनिधि भी मौन नहीं हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। वे इस बात पर जोर दे रहे हैं कि यह केवल एक लूट का मामला नहीं है, बल्कि पुलिस प्रशासन में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक गंभीर उदाहरण है, जिसकी तह तक जाना ज़रूरी है।