राष्ट्र चंडिका न्यूज़.सिवनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का असर देशभर के कई बाजारों में दिख रहा है, लेकिन सिवनी के दिवाली उत्सव बाजार में अभी भी चाइनीज सामान की चमक देसी उत्पादों पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। शहर के प्रमुख बाजारों और फुटपाथों पर सजी अस्थाई दुकानों में सस्ते, आकर्षक और बहुतायत में उपलब्ध चाइनीज उत्पाद ग्राहकों की पहली पसंद बने हुए हैं।
बाजार में चीनी झालरों का ‘जलवा’-दीपावली के मौके पर सबसे ज्यादा बिकने वाली लाइटिंग और डेकोरेशन के सामान में चाइनीज झालरें, एलईडी लाइट्स और फैंसी दीये छाये हुए हैं। इनकी कम कीमत और नए-नए डिजाइन, ग्राहकों को आसानी से अपनी ओर खींच रहे हैं। कई दुकानदार भी मानते हैं कि ग्राहक सबसे पहले कम कीमत पूछता है, और इस मुकाबले में भारतीय या स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पाद महंगे साबित होते हैं।
स्थानीय कारीगर निराश-एक तरफ जहां बाजार में चाइनीज लाइट्स की भरमार है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय कुम्हारों और कारीगरों द्वारा बनाए गए मिट्टी के दीये, हस्तनिर्मित सजावटी सामान और पारंपरिक झालरें सही दाम और पर्याप्त जगह के अभाव में संघर्ष कर रही हैं। कई खरीदारों ने यह भी बताया कि बाजार में देसी उत्पादों की उतनी विविधता और उपलब्धता नहीं है, जितनी चाइनीज सामान की है।
कीमत और आकर्षण बनी वजह –सिवनी बाजार में खरीदारी करने आए ग्राहकों का कहना है कि वे देशभक्ति और ‘लोकल’ को बढ़ावा देने के महत्व को समझते हैं, लेकिन त्योहार पर घर को सजाने के लिए सस्ता और जल्दी उपलब्ध होने वाला विकल्प ही चुनना पड़ता है। एक सामान्य चाइनीज झालर जहां ₹50 से ₹100 में मिल जाती है, वहीं देसी कारीगरी वाली झालरें इससे दोगुनी कीमत पर मिलती हैं।
बाजार की यह स्थिति दिखाती है कि ‘वोकल फॉर लोकल’ के नारे को जमीन पर उतारने के लिए अभी भी कीमत, उपलब्धता और उत्पाद की विविधता के मोर्चे पर स्थानीय निर्माताओं को और अधिक समर्थन और प्रोत्साहन की आवश्यकता है। अन्यथा, सस्ते चाइनीज सामान का आकर्षण दिवाली के बाजारों पर इसी तरह हावी रहेगा।
