Local & National News in Hindi
ब्रेकिंग
‘गैंगस्टरां ते वार’ की शुरुआत के बाद पंजाब में गैंगस्टरों से संबंधित हत्याओं में भारी कमी, गोलीबारी ... मुख्य मंत्री ने हॉलैंड के महान हॉकी खिलाड़ी फ्लोरिस जान बोवेलैंडर से की मुलाकात, पंजाब के खिलाड़ियों... Road Accident: जिस घर से उठनी थी बेटे की बारात, वहां से उठी पिता की अर्थी; शादी के कार्ड बांटने निकल... Indore Viral News: गले में वरमाला और शादी का जोड़ा पहन DM ऑफिस पहुंचा दूल्हा, बोला- 'दुल्हन कैसे लाऊ... Bihar Bridge Collapse: तीन बार गिरे सुल्तानगंज पुल में 'वास्तु दोष'? निर्माण कंपनी अब करवा रही चंडी ... Kolkata Hospital Fire: कोलकाता के आनंदलोक अस्पताल में भीषण आग, खिड़कियां तोड़कर निकाले गए मरीज; पूरे... Kota British Cemetery: कोटा में हटेगा 168 साल पुराना 'विवादित' शिलालेख, भारतीय सैनिकों को बताया था '... Novak Djokovic Virat Kohli Friendship: विराट कोहली के लिए नोवाक जोकोविच का खास प्लान, भारत आकर साथ म... Salman Khan Vamshi Film Update: वामशी की फिल्म में सलमान खान का डबल रोल? हीरो के साथ विलेन बनकर भी म... Crude Oil Supply: भारत के लिए खुशखबरी! इराक और सीरिया का 15 साल से बंद बॉर्डर खुला, क्या अब और सस्ता...

सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का मामला! SC में सुनवाई टली, पत्नी ने कानूनी रूप से दी है चुनौती, क्या उन्हें मिलेगी राहत? अगली तारीख पर सबकी निगाहें

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत की गई हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई. वांगचुक को हिरासत में लेने के खिलाफ उनकी पत्नी गीतांजलिअंगमो ने याचिका दाखिल की है.कोर्ट ने सोमवार (15 दिसंबर) को याचिका पर सुनवाई 7 जनवरी, 2026 तक के लिए स्थगित कर दी. जज अरविंद कुमार और जज एनवी अंजारी की बेंच ने समय की कमी की वजह से मामले को स्थगित कर दिया. अब अगली सुनवाई 7 जनवरी दोपहर 2 बजे होगी.

सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत हिरासत में लिया गया था. उनकी पत्नी ने याचिका में दावा किया गया है कि हिरासत अवैध और मनमानी कार्रवाई है जो उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करती है. याचिका में आरोप लगाया गया है कि लद्दाख में राज्य का दर्जा मांगने के लिए हुए प्रदर्शनों के बाद (जो सितंबर में हिंसक हो गए थे) वांगचुक को गैर-कानूनी तरीके से हिरासत में लिया गया. वांगचुक फिलहाल जोधपुर जेल में बंद हैं.

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने का विरोध

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 8 दिसंबर को मामलेपर सुनवाई स्थगित कर दी थी. इसी दौरान, केंद्र सरकार ने वांगचुक को जोधपुर जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश करने के अनुरोध का विरोध किया था. सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया था कि वांगचुक जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जुड़े रहना चाहते हैं. लेकिन केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि ऐसा करने से देशभर के सभी बंदियों को समान सुविधा देनी पड़ेगी, इसलिए यह अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए.

कोर्ट ने केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब दाखिल करने के लिए पहले भी समय दिया था, 24 नवंबर को भी केंद्र ने अतिरिक्त समय मांगा था, जिसके बाद सुनवाई टल गई थी. 29 अक्टूबर को शीर्ष अदालत ने अंगमो की संशोधित याचिका पर केंद्र और लद्दाख प्रशासन से जवाब मांगा था. अब कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगली सुनवाई 15 दिसंबर को होगी.

26 सितंबर को हिरासत में लिया गया था

जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को 26 सितंबर को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया था. इससे दो दिन पहले लद्दाख में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों में हिंसा भड़क गई थी. इन झड़पों में चार लोगों की मौत हुई थी और 90 लोग घायल हुए थे. सरकार का आरोप है कि वांगचुक ने माहौल भड़काया, जबकि परिवार का दावा है कि उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है.

याचिका में क्या कहा

वांगचुक की पत्नी अंगमो की याचिका में कहा गया है कि गिरफ्तारी पुराने एफआईआर, अस्पष्ट आरोपों और बिना किसी ठोस प्रमाण के आधार पर की गई है. याचिका में तर्क दिया गया है कि यह गिरफ्तारी संविधान में दिए गए मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है और सत्ता का दुरुपयोग है. अंगमो ने कहा कि वांगचुक पिछले तीन दशक से शिक्षा, नवाचार और पर्यावरण संरक्षण में उल्लेखनीय काम कर रहे हैं. ऐसे व्यक्ति पर अचानक देशविरोधी गतिविधियों का आरोप लगाना पूरी तरह अविश्वसनीय है.

अंगमो ने कोर्ट को बताया था कि 24 सितंबर की हिंसा को वांगचुक ने सोशल मीडिया पर खुलकर निंदा की थी और कहा था कि हिंसा से लद्दाख की पांच साल की तपस्या खत्म हो जाएगी. उन्होंने इसे अपने जीवन का सबसे दुखद दिन बताया था. एनएसए के तहत केंद्र और राज्य सरकारें किसी भी व्यक्ति को 12 महीने तक हिरासत में रख सकती हैं, हालांकि आदेश पहले भी वापस लिया जा सकता है.

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.