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देहरादून में त्रिपुरा के छात्र पर नहीं की गई थी नस्लीय टिप्पणी, मौत पर पुलिस की जांच में क्या निकला?

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देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की मौत से पहले उस पर किसी प्रकार की नस्लीय टिप्पणी नहीं की गई थी. पुलिस जांच में इस बात की जानकारी सामने आई है. देहरादून पुलिस ने त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की मौत के मामले में कहा कि जांच के दौरान अब तक नस्लीय दुर्व्यवहार या भेदभाव का कोई सबूत नहीं मिला है. पुलिस के अनुसार, यह मामला एक पार्टी के दौरान हुए विवाद और झगड़े के बाद जानलेवा हमले में बदल गया.

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) अजय सिंह ने बताया कि सोशल मीडिया पर इस घटना को नस्लीय हमले से जोड़कर पोस्ट किया जा रहा है, लेकिन जांच रिपोर्ट में ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है. पुलिस ने स्पष्ट किया कि पीड़ित परिवार और गवाहों ने भी किसी नस्लीय टिप्पणी की शिकायत नहीं की थी.

कैसे शुरू हुआ विवाद?

यह घटना 9 दिसंबर 2025 को सेलाकुई क्षेत्र में हुई. एसएसपी के अनुसार, आरोपी सूरज ख्वास ने अपने बेटे के जन्मदिन पर पार्टी रखी थी. पार्टी के दौरान सामान्य मजाक और बातचीत के बीच कुछ टिप्पणियां पीड़ित पक्ष को आपत्तिजनक लगीं, जिसके बाद बहस शुरू हो गई. यह विवाद बढ़कर झगड़े में बदल गया जिसमें एंजेल चकमा और उसके भाई माइकल घायल हो गए. इलाज के दौरान एंजेल ने 26 दिसंबर को अस्पताल में दम तोड़ दिया.

कहां तक पहुंची जांच?

पुलिस ने इस मामले में दर्ज एफआईआर के आधार पर 6 में से 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. इसमें से दो नाबालिगों को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया है. एक आरोपी यज्ञराज अवस्थी फरार है. यज्ञराज नेपाली नागरिक है. उसकी गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है. घटना की जांच के लिए सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और डिजिटल सबूत जुटाए गए हैं.

पुलिस का कहना है कि झगड़े में एंजेल को रीढ़ और गर्दन में गंभीर चोटें आई थीं, जो उसकी मौत का कारण बनीं. अब तक की जांच में किसी आरोपी द्वारा नस्लीय टिप्पणी या हिंसा का प्रमाण नहीं मिला है, लेकिन पुलिस ने कहा कि अगर आगे कोई नया सबूत मिलता है, तो उसे शामिल किया जाएगा.

एसएसपी अजय सिंह ने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चल रही है. उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों पर कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी और किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा.

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