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Jabalpur News: फीस न भरने पर छात्रा को बोर्ड परीक्षा से रोका, स्कूल के बाहर जमकर हंगामा

जबलपुर के कटंगा क्षेत्र में संचालित जॉनसन स्कूल प्रबंधन के द्वारा दसवीं कक्षा की छात्रा को बोर्ड परीक्षा में शामिल न किए जाने के बाद लगातार विवाद बढ़ता जा रहा है. मामले में एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने स्कूल पहुंचकर प्रदर्शन किया और छात्रा को परीक्षा में बैठाने की मांग उठाई. आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बकाया फीस का हवाला देते हुए दसवीं की छात्रा सान्या उइके को बोर्ड परीक्षा में बैठने से वंचित कर दिया. इसी बात से नाराज एबीवीपी कार्यकर्ता स्कूल पहुंचे और प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए स्कूल के गेट पर तालाबंदी कर दी. प्रदर्शन के दौरान स्कूल स्टाफ को कुछ समय के लिए अंदर ही रोक दिया गया. स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस बल को तैनात किया गया है.

एबीवीपी नेताओं का आरोप है कि फीस बकाया होने के कारण छात्रा को एडमिट कार्ड नहीं दिया गया, जिससे उसका एक साल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है. संगठन के नेता आर्यन पुंज ने कहा कि शिक्षा संस्थानों का उद्देश्य छात्रों का भविष्य संवारना है न कि फीस के नाम पर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित करना. उन्होंने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और छात्रा को तत्काल परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए.

घर-घर जाकर काम करती है छात्रा की मां

नर्मदा घाट क्षेत्र में फ्री स्कूल चलाने वाले पराग दीवान ने बताया कि सान्या उइके बेहद मेधावी छात्रा है और उसकी मां घर-घर काम कर किसी तरह परिवार चलाती हैं. फीस जमा न हो पाने के कारण उसे पहले तिमाही परीक्षा में भी बैठने नहीं दिया गया और हॉल में बैठाकर वापस कर दिया गया था. यही स्थिति अगली परीक्षा में भी बनी रही. शुक्रवार को उसकी मां एडमिट कार्ड लेने स्कूल पहुंचीं, लेकिन उन्हें मना कर दिया गया.

पराग दीवान ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी शुक्रवार रात मिली, जबकि सुबह परीक्षा थी और बच्ची परीक्षा नहीं दे सकी. उन्होंने आग्रह किया कि छात्रा को परीक्षा में बैठने का अवसर दिया जाए. फीस पूरी जमा कर दी जाएगी, लेकिन उसका साल बर्बाद नहीं होना चाहिए. एबीवीपी के महानगर मंत्री आर्यन पुंज ने कहा कि यदि फीस बकाया थी तो भी छात्रा को बोर्ड परीक्षा से वंचित करना गलत है.

जांच की मांग

संगठन ने मांग की है कि छात्रा को तत्काल परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो. उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि यदि प्रिंसिपल अनुपस्थित थीं तो स्कूल का संचालन किस प्रकार हो रहा था. छात्रा सान्या ने बताया कि वह परीक्षा की तैयारी कर रही थी लेकिन अचानक उसे जानकारी मिली कि फीस बकाया होने के कारण उसे एडमिट कार्ड नहीं दिया गया औ, परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया.

वहीं छात्रा की मां निशा उइके का आरोप है कि आर्थिक तंगी के कारण फीस जमा करने में देरी हुई. उनका कहना है कि तिमाही परीक्षा में भी बच्ची को हॉल में बैठाकर पेपर नहीं दिया गया. उन्होंने बताया कि जब वह शुक्रवार को स्कूल पहुंचीं तो उनसे पूरे साल की फीस जमा करने के बाद ही परीक्षा में बैठाने की बात कही गई. आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे तत्काल पूरी फीस जमा नहीं कर सकीं.

क्या कहना है स्कूल प्रबंधन का?

वहीं स्कूल की प्रबंधिका निशा बहागे ने आरोपों से इनकार करते हुए सफाई दी. उनका कहना है कि संबंधित छात्रा नवंबर माह से स्कूल नहीं आ रही थी और नियमित उपस्थिति भी नहीं थी. इसके साथ ही छात्रा की करीब नौ हजार रुपये फीस बकाया थी, लेकिन केवल फीस के आधार पर उसे नहीं रोका गया.

उन्होंने बताया कि कुल 22 छात्रों की फीस बकाया थी, जिनमें से 21 छात्रों को एडमिट कार्ड जारी कर दिए गए हैं. प्रबंधन का कहना है कि नियमों और उपस्थिति के आधार पर निर्णय लिया गया है, न कि केवल फीस के कारण. कई मामलों में प्रिंसिपल और शिक्षक स्वयं परीक्षा केंद्र जाकर विद्यार्थियों को एडमिट कार्ड सौंपकर आए हैं.

प्रबंधन के अनुसार संबंधित छात्रा नवंबर माह से नियमित रूप से स्कूल नहीं आ रही थी. कई बार फोन कॉल कर छात्रा और उसके अभिभावकों को बुलाया गया, जिसकी कॉल डिटेल भी स्कूल के पास मौजूद है. बावजूद इसके न तो छात्रा और न ही उसके अभिभावक स्कूल पहुंचे. स्कूल का कहना है कि यदि छात्रा निर्धारित तिथि पर आती तो उसे भी एडमिट कार्ड दे दिया जाता.वहीं एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने मामले में प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की. पुलिस अधिकारियों ने दोनों पक्षों से बातचीत कर मामला शांत कराने का प्रयास किया.

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