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मोदी सरकार का बड़ा कदम: 5 देशों की सरहद पर बसेंगे ‘स्मार्ट विलेज’, पलायन रुकेगा और दुश्मन पर रहेगी कड़ी नजर!

बॉर्डर से सटे गांवों की स्थिति सुधारने के लिए केंद्र की मोदी सरकार ने 2023 में वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) की शुरुआत की थी. इसके पहले चरण में चीन से सटे गांवों पर फोकस किया गया था, लेकिन दूसरे फेज में इसको और बढ़ाया गया है. इस फेज में सरकार का ध्यान पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, भूटान और म्यांमार की सीमा से सटे गांवों पर है. प्रोग्राम के दूसरे चरण की शुरुआत कल यानी शुक्रवार से हो रही है

VVP का मकसद असल में चीन बॉर्डर के पास के गांवों में डेवलपमेंट में मदद करना था. VVP-II को अप्रैल 2025 में केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी थी. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 20 फरवरी को बांग्लादेश सीमा पर असम के कछार जिले के नाथनपुर गांव में VVP-II कार्यक्रम शुरू कर सकते हैं.

क्या है इस योजना का मकसद?

मंत्रालय ने कहा कि अक्सर बॉर्डर के गांवों के लोग गैर-कानूनी कामों, छोटे-मोटे अपराधों, बॉर्डर पार के अपराधों में शामिल हो जाते हैं और शहरी इलाकों में पलायन करने की आदत डाल लेते हैं, जिससे एक खालीपन पैदा होता है. मंत्रालय ने कहा कि इससे डेमोग्राफिक बदलाव और गैर-कानूनी माइग्रेशन होता है. VVP प्रोग्राम का मकसद बॉर्डर पर रहने वाली आबादी को देश के साथ मिलाना, उन्हें बॉर्डर गार्डिंग फोर्स (BGFs) की आंख और कान बनाना, बेहतर रहने की स्थिति और रोजी-रोटी के सही मौके बनाना और बॉर्डर पर रहने वाली आबादी को गलत कामों से दूर रखना है.

सरकार इंटरनेशनल बॉर्डर के पास रहने वाले समुदायों के साथ जुड़ने, भरोसा बनाने, जानकारी देने और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए कल्चरली सेंसिटिव बॉर्डर-स्पेसिफिक आउटरीच एक्टिविटीज की भी योजना बना रही है. गृह मंत्रालय ने राज्यों के साथ शेयर की गई अपनी गाइडलाइंस में कहा, इन एक्टिविटीज से बॉर्डर गार्डिंग एजेंसियों और लोकल आबादी के बीच अच्छे रिश्ते बनेंगे और बॉर्डर मैनेजमेंट में शेयर्ड जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा मिलेगा.

दूसरे फेज के बारे में और क्या-क्या?

VVP-I का मकसद चीन बॉर्डर के पास के गांवों को कवर करना था. इसके दूसरे फेज में कुल 6,839 करोड़ रुपये खर्च होंगे. फाइनेंशियल ईयर 2028-29 तक इसे अरुणाचल प्रदेश, असम, बिहार, गुजरात, जम्मू और कश्मीर, लद्दाख, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुछ खास गांवों में लागू किया जाएगा. हर गांव में 3 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रस्ताव है.

गृह मंत्रालय ने कहा कि VVP-II का मुख्य मकसद बॉर्डर पर रहने वाले लोगों की डेवलपमेंट की जरूरतों को पूरा करना है, साथ ही देश की पूरी ग्रोथ स्टोरी के साथ अलग-अलग तरह के रोजगार के मौकों को बढ़ावा देना है. मंत्रालय ने कहा, इन गांवों में प्रोफेशनल ग्रोथ और नेशनल इंटीग्रेशन के मौके बढ़ाए जाएंगे ताकि यह पक्का हो सके कि बॉर्डर वाले इलाके देश के डेवलपमेंट के सफर में पीछे न रहें और उन्हें ग्रोथ सेंटर के तौर पर डेवलप किया जाए.

क्या है सरकार का प्लान?

इस स्ट्रेटेजी में सरकार की मौजूदा स्कीमों को योग्य लोगों और परिवारों तक पहुंचाना, बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना और रोजी-रोटी के मौके बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और कैपेसिटी बनाना शामिल है. आउटरीच एक्टिविटीज का मकसद बॉर्डर कंट्रोल एजेंसियों और लोकल कम्युनिटीज के बीच भरोसा बनाना होगा.

इसके लिए बॉर्डर सिक्योरिटी प्रोसेस, इमिग्रेशन कानूनों के बारे में साफ और सही जानकारी दी जाएगी. साथ ही, बॉर्डर कम्युनिटीज को संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्टिंग में एक्टिव हिस्सा लेने के लिए बढ़ावा दिया जाएगा और पूरी सिक्योरिटी कोशिशों में मदद की जाएगी.

पंजाब में हुई थी शुरुआत

केंद्र सरकार ने 1986-87 में बॉर्डर एरिया डेवलपमेंट प्रोग्राम (BADP) को अपनी पश्चिमी सीमा पर एक खास मकसद से शुरू किया था ताकि बॉर्डर के लोगों को बेसिक सुविधाएं और सर्विस दी जा सकें और उनका पलायन रोका जा सके और उन्हें सुरक्षा का एहसास भी हो. अगले दस सालों में इस प्रोग्राम को देश के दूसरे बॉर्डर तक बढ़ाया गया ताकि इन दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों की इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरतों को पूरा किया जा सके. 2000 के दशक के बीच तक जैसे-जैसे देश आर्थिक रूप से बढ़ रहा था नई दिल्ली में पॉलिसी बनाने वालों को धीरे-धीरे बॉर्डर के इलाकों को भी डेवलप करने की जरूरत महसूस हुई.

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