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US vs Iran: होर्मुज जलडमरूमध्य ब्लॉक करने का दांव फेल, जानें समंदर में अमेरिका के खिलाफ ईरान ने कैसे किया ‘खेला’

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ईरान की रणनीति ने अमेरिका के होर्मुज नाकाबंदी दांव को भी फेल कर दिया है. नाकाबंदी के पहले दिन ही 20 जहाज होर्मुज में अमेरिका के आंखों के सामने से गुजर गए. इन जहाजों को अमेरिका के 10 हजार सैनिक भी रोक नहीं पाए. ये जहाज चीन, लाइबेरिया के थे. इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जल्द युद्ध खत्म होने की बात कही है. ट्रंप ने कहा कि युद्ध जल्द ही रूक सकता है.

इससे पहले इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने होर्मुज की पूर्ण नाकाबंदी की घोषणा की थी. अमेरिका का कहना था कि इससे ईरान घुटने पर आ जाएगा. हालांकि, ईरान ने अपने दांव से अमेरिका को होर्मुज में भी चित कर दिया है.

ईरान ने होर्मुज में कैसे किया खेल?

1. होर्मुज से अभी तक जितने भी जहाज गुजरे हैं. उनमें अधिकांश चीन के हैं. ईरान चीन के जहाजों को पहले केशम द्वीप पर ले जाता है और फिर उसे होर्मुज से बाहर भेज देता है. अमेरिका चीनी जहाजों पर हमले से बच रहा है. इसी वजह से लाइबेरिया का जहाज भी होर्मुज को पार कर गया.

दरअसल, चीन ने अमेरिका को उसके मामले में दखल नहीं देने की चेतावनी दी है. अमेरिका जानता है कि अगर होर्मुज में चीन के जहाजों को वो निशाना बनाता है तो चीन साउथ चाइना सी में तांडव मचा सकता है. दुनिया का 33 प्रतिशत व्यापार इसी साउथ चाइना सी के जरिए होता है.

इसलिए चाहकर भी अमेरिका चीनी जहाजों पर हमला नहीं कर रहा है. ईरान चीन के जरिए अपना माल आसानी से होर्मुज के बाहर भेज रहा है.

2. ईरान प्रस्थान के लोकेशन को ही बदल दे रहा है. बुधवार को होर्मुज की तरफ ALICIA नामक जहाज की एंट्री हुई. लोकेशन के हिसाब से इस जहाज को इराक से अपना सामान उठाना था, लेकिन यह जहाज ईरान से माल उठाया. यानी लोकेशन में बदलकर भी ईरान अमेरिका के साथ खेल कर रहा है.

ईरान जानता है कि जहाज के प्रस्थान का लोकेशन अगर ईरान होता है तो उस पर अमेरिका हमला कर सकता है, लेकिन दूसरे देश के जहाजों पर कुछ नहीं करेगा.

ईरान के सामने लगातार चित हो रहा US

अमेरिका ईरान के सामने लगातार चित हो रहा है. जंग की शुरुआत में अमेरिका ने ईरान में तख्तापलट की बात कही, जिसके बाद ईरान ने अपने सैन्य ढांचे को लोकल स्तर पर विभाजित कर दिया, जिसके कारण ईरान में तख्तापलट नहीं हो पाया.

वहीं ईरान के मिसाइल सिस्टम को भी अमेरिका बर्बाद नहीं कर पाया. थक-हार कर अमेरिका ने ईरान के साथ बातचीत की प्रक्रिया शुरू की. इसमें भी ईरान ने अपनी शर्तें थोप दी.

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