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PoK में भारी तनाव और हिंसा के बीच 27 जुलाई से विधानसभा चुनाव शुरू, 3 चरणों में होगी वोटिंग

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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में 27 जुलाई से विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई है। ये चुनाव ऐसे माहौल में आयोजित हो रहे हैं, जब समूचे इलाके में पिछले दो महीनों से लगातार उग्र विरोध प्रदर्शन और हिंसक झड़पें देखने को मिली हैं। जनता के भारी आक्रोश को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने पूरे क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था अत्यधिक कड़ी कर दी है।

आधिकारिक कार्यक्रम के अनुसार, चुनाव 27 जुलाई से 10 अगस्त के बीच तीन अलग-अलग चरणों में कराए जाएंगे। निष्पक्ष मतदान कराने का दावा करते हुए सुरक्षा के लिए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से 14,000 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। दूसरी ओर, 12 विवादित रिफ्यूजी सीटों को लेकर स्थानीय नागरिकों का भारी विरोध अभी भी जारी है।

📊 PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें, 3 चरणों में इस तरह होगा मतदान का पूरा शेड्यूल

PoK की तथाकथित विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे जनता द्वारा मतदान के जरिए प्रतिनिधि चुने जाते हैं, जबकि 8 सीटें महिलाओं, टेक्नोक्रेट्स और धार्मिक गुरुओं के लिए आरक्षित रखी गई हैं।

चुनाव आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, पहले चरण में 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीटों पर मतदान हो रहा है। इसके बाद दूसरे चरण में 2 अगस्त को मुजफ्फराबाद डिवीजन की 9 सीटों और 12 विवादित रिफ्यूजी सीटों पर वोट डाले जाएंगे। अंत में तीसरे चरण में 10 अगस्त को पुंछ डिवीजन की 11 सीटों पर मतदान संपन्न होगा।

🔥 आखिर क्या है 12 रिफ्यूजी सीटों का विवाद, जिसके लिए सुलग रहा है PoK?

इस पूरे चुनाव का सबसे बड़ा विवाद 12 रिफ्यूजी सीटों को लेकर बना हुआ है। ये सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित रखी गई हैं, जो 1947 और उसके बाद के वर्षों में जम्मू-कश्मीर से पलायन करके पाकिस्तान के मुख्य हिस्से (पंजाब व अन्य प्रांतों) में जाकर बस गए थे। स्थानीय संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) का सीधा आरोप है कि पाकिस्तान सरकार इन फर्जी रिफ्यूजी सीटों के जरिए PoK की स्थानीय राजनीति और सरकार को हमेशा अपने पूर्ण नियंत्रण में रखती है। इसी वजह से JAAC इन 12 सीटों को तुरंत समाप्त करने की मांग कर रही है।

इसी मांग को लेकर पिछले दो महीनों से पूरे PoK में बड़े पैमाने पर जन-प्रदर्शन हुए हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शन इतने उग्र हो गए कि पुलिस और सुरक्षा बलों के साथ हुई हिंसक झड़पों में दर्जनों लोगों की जान चली गई। इसके बाद बौखलाई पाकिस्तान सरकार ने पिछले महीने JAAC को एक प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया था। स्थानीय निवासियों के जनाक्रोश, खूनी संघर्ष और राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हो रहे ये चुनाव पाकिस्तान की दमनकारी नीतियों और PoK में सुलगती स्वतंत्रता की आग की गवाही दे रहे हैं। पूरे इलाके में धारा 144 जैसी सख्त पाबंदियों और भारी पुलिस बल की तैनाती के साये में इस्लामाबाद इस क्षेत्र पर अपना राजनीतिक कब्जा बनाए रखने की नाकाम कोशिश कर रहा है।

🛡️ 30 प्रतिशत पुलिसकर्मी अत्याधुनिक हथियारों से लैस, PTI ने किया चुनावों का बहिष्कार

चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के उग्र जन-आंदोलन या हिंसा को कुचलने के लिए पाकिस्तान ने पंजाब प्रांत से 14,000 अतिरिक्त पुलिस जवान तैनात किए हैं। इनमें से 30 प्रतिशत पुलिसकर्मी अत्याधुनिक हथियारों से लैस हैं, जबकि शेष 70 प्रतिशत जवानों को दंगा-रोधी उपकरणों (Anti-Riot Gear) के साथ मैदान में उतारा गया है।

दूसरी तरफ, यहां का राजनीतिक मुकाबला भी बेहद दिलचस्प और पेचीदा हो गया है। पाकिस्तान की केंद्र सरकार में गठबंधन सहयोगी के रूप में साथ रहने वाली पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) PoK में एक-दूसरे के खिलाफ ताल ठोक रही हैं। वहीं, पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने वर्तमान दमनकारी हालात और पुलिस की बर्बर कार्रवाई का हवाला देते हुए इस चुनाव का पूर्ण बहिष्कार कर दिया है।

🇮🇳 भारत का रुख हमेशा की तरह बेहद साफ, PoK में हो रहे चुनावों को नहीं देता मान्यता

भारत सरकार का इस पूरे घटनाक्रम पर रुख हमेशा की तरह एकदम स्पष्ट और दृढ़ है। भारत का आधिकारिक तौर पर कहना है कि संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा हैं और पाकिस्तान ने इसके एक बड़े भू-भाग पर अवैध व अनधिकृत रूप से कब्जा कर रखा है।

भारत, PoK में पाकिस्तान द्वारा कराए जा रहे इन कठपुतली चुनावों को किसी भी प्रकार की मान्यता प्रदान नहीं करता है। नई दिल्ली का यह भी स्पष्ट रूप से कहना है कि PoK में हाल के दिनों में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन, पाकिस्तान के दशकों से चले आ रहे आर्थिक शोषण, मानवाधिकार हनन और प्रशासनिक दमन का ही स्वाभाविक परिणाम हैं।

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