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ग्वालियर में गुमशुदा तोते ‘शकुंतला’ के लिए 50 हजार का इनाम: ढोल-लाउडस्पीकर से तलाश में जुटा ओझा परिवार, रो-रोकर बुरा हाल

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ग्वालियर (मध्य प्रदेश): इंसानी भावनाएं और बेजुबां जानवरों के प्रति प्रेम जब पराकाष्ठा पर पहुंचता है, तो पैसों की अहमियत पूरी तरह बौनी हो जाती है।

ग्वालियर के अलकापुरी इलाके में रहने वाले ओझा परिवार के लिए इन दिनों घर का चूल्हा तक ठीक से नहीं जल पा रहा है। वजह है उनके घर की सबसे लाडली और दुलारी सदस्य ‘शकुंतला’ का अचानक गायब हो जाना। शकुंतला कोई इंसान नहीं, बल्कि एक बेहद समझदार और अनूठी मादा तोता (Female Parrot) है, जिसकी जुदाई ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।

🦜 सिर पर लाल-ग्रे तिलक का अनूठा निशान, खिड़की खुली रहने से उड़ गई लाडली शकुंतला

शकुंतला एक बेहद समझदार हरे रंग की मादा तोता है, जिसके सिर पर प्राकृतिक रूप से ग्रे और लाल रंग का एक अनूठा ‘तिलक’ जैसा निशान बना हुआ है।

सोमवार को घर की खिड़की भूलवश खुली रह जाने के कारण शकुंतला अचानक उड़ गई। कई दिन बीत जाने के बाद भी जब वह वापस नहीं लौटी, तो परिवार में हड़कंप मच गया। तोते के बिछड़ने के गम में परिवार की बुजुर्ग दादी और नन्हीं पोती का रो-रोकर बुरा हाल है, दोनों की आँखें बस घर के मुख्य दरवाजे पर ही टिकी हुई हैं कि कब शकुंतला वापस आ जाए।

📢 तलाश का अनोखा अभियान: ई-रिक्शा, लाउडस्पीकर, पोस्टर और 50,000 रुपये के इनाम की घोषणा

अपने जिगर के टुकड़े को वापस पाने के लिए ओझा परिवार ने ज़मीन-आसमान एक कर दिया है।

शहर के मुख्य बाज़ारों और कॉलोनियों में ई-रिक्शा घुमाया जा रहा है। ई-रिक्शा चालक सोनू सुबह से शाम तक गलियों में लाउडस्पीकर के ज़रिए लाडली शकुंतला की खोज के लिए आम लोगों से मदद की गुहार लगा रहा है। इस खोज अभियान और मुनादी पर परिवार अब तक करीब 15 हजार रुपये खर्च कर चुका है। साथ ही, तोते को सुरक्षित लौटाने वाले व्यक्ति के लिए परिवार ने 50,000 रुपये के नकद इनाम का भी ऐलान किया है।

🕊️ कभी पिंजरे में कैद नहीं रही शकुंतला, कंधों पर बैठकर चहकती थी पूरा दिन

करीब एक साल पहले शकुंतला ओझा परिवार के जीवन में आई थी और अपनी मासूमियत से उसने सभी सदस्यों का दिल जीत लिया था।

परिवार ने उसे कभी लोहे के पिंजरे में कैद करके नहीं रखा। वह पूरे घर में आज़ादी से उड़ती थी, परिजनों के कंधों पर बैठती थी और दिनभर चहकती रहती थी। परिवार के सदस्य अनिल ओझा का कहना है कि उनके लिए 50,000 रुपये की बड़ी रकम कोई मायने नहीं रखती, उनकी असली दौलत तो शकुंतला ही है। उसके वापस लौटने पर ही उनकी मां और बेटी के चेहरे की खोई हुई मुस्कान वापस आएगी।

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