Local & National News in Hindi

इंदौर ने नम आंखों से दी वीर सपूत को अंतिम विदाई, मेजर हमजा आरिफ सैन्य सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक

26

इंदौर (मध्य प्रदेश): मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर ने आज एक ऐसा भावुक और गमगीन मंजर देखा, जिसने हर संवेदनशील आंख को नम कर दिया।

राजस्थान के जैसलमेर में भीषण सड़क हादसे के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए सेना के होनहार अधिकारी मेजर हमजा आरिफ को आज पूरे राजकीय एवं सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। इस दौरान दो ऐसे अत्यंत भावुक क्षण आए, जिन्होंने वहां उपस्थित हर नागरिक के दिल को झकझोर कर रख दिया। मेजर हमजा आरिफ का पार्थिव शरीर अंतिम यात्रा के साथ इमली बाजार स्थित शिया दाऊदी बोहरा कब्रिस्तान पहुंचा, जहां पूरे सैन्य सम्मान और धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

🫡 सेना के जवानों ने दिया गार्ड ऑफ ऑनर, पत्नी ज्योति अरोरा को सौंपा गया राष्ट्रीय ध्वज

समारोह के दौरान भारतीय सेना के जवानों ने गार्ड ऑफ ऑनर देकर अपने जांबाज साथी अधिकारी को अंतिम सलामी दी।

मेजर की अंतिम यात्रा में राजस्थान और मध्य प्रदेश से पहुंचे सेना के कई वरिष्ठ अधिकारी, जिनमें कर्नल, लेफ्टिनेंट और मेजर रैंक के अधिकारी शामिल थे, उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त शिया बोहरा समाज के गणमान्य नागरिक, शहरवासी और परिजन अपने वीर बेटे को अंतिम विदाई देने भारी संख्या में पहुंचे। हर आंख आंसुओं से भरी थी और हर चेहरा मेजर हमजा आरिफ की स्मृतियों में डूबा नजर आ रहा था।

💔 फूट-फूटकर रो पड़ीं पत्नी ज्योति अरोरा, मां ने सीने से लगाकर बंधाया ढांढस

सबसे दुखद और हृदयविदारक क्षण तब आया, जब पत्नी ज्योति अरोरा ने कांपते हाथों से अपने पति के पार्थिव शरीर को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित की।

पति को अंतिम बार विदा करते समय वह अपने आंसुओं को रोक न सकीं और फूट-फूटकर रो पड़ीं। उस दर्दभरे पल में उनकी मां ने उन्हें गले लगाकर सहारा दिया। गार्ड ऑफ ऑनर के पश्चात सेना के अधिकारियों ने पूरे सम्मान के साथ वह तिरंगा झंडा उनकी पत्नी को सौंपा, जिसमें लिपटकर मेजर का पार्थिव शरीर इंदौर पहुंचा था। राष्ट्रीय ध्वज को सीने से लगाकर खड़ी पत्नी की आंखों में जहां जीवनसाथी को खोने का असीम दुख था, वहीं अपने सैनिक पति की शहादत पर गर्व भी साफ झलक रहा था।

🎖️ कर्तव्य और देशसेवा के प्रति पूरी तरह समर्पित थे मेजर हमजा आरिफ

मेजर हमजा आरिफ को करीब से जानने वाले सैन्य अधिकारी और मित्र बताते हैं कि वह एक अत्यंत सरल, सौम्य, मिलनसार और अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्णतः समर्पित अधिकारी थे।

उनकी इस प्रकार असमय और अप्रत्याशित मौत से उनके परिवार, स्नेही मित्रों तथा संपूर्ण इंदौर शहर को गहरा आघात पहुंचा है। मेजर हमजा आरिफ भले ही आज भौतिक रूप से इस संसार में नहीं हैं, किंतु उनका अनुशासन, राष्ट्रसेवा का जज्बा और सर्वोच्च कर्तव्यनिष्ठा सदैव देशवासियों की स्मृतियों में अमर रहेगी।

Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.