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सावन के दूसरे सोमवार पर बैकुंठपुर के प्रेमाशंकर महादेव मंदिर में उमड़े भक्त, जानें 105 साल पुरानी यह अमर प्रेम गाथा

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कोरिया (छत्तीसगढ़): पवित्र सावन मास के द्वितीय सोमवार के पावन अवसर पर छत्तीसगढ़ के कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर से महज कुछ किलोमीटर की दूरी पर गेज नदी के रमणीय तट पर स्थित सुप्रसिद्ध प्रेमाशंकर महादेव मंदिर में भोर से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।

कोलाहल और शहरी आबादी से दूर शांत एवं नैसर्गिक परिवेश में स्थापित इस अलौकिक धाम में भक्तजन भगवान शिव का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक एवं विशेष पूजा-अर्चना करने हेतु कतारबद्ध नजर आए। गेज नदी के पावन तट पर बने प्रेमाशंकर महादेव मंदिर की महिमा को लेकर क्षेत्र में विभिन्न पौराणिक व सामाजिक मान्यताएं प्रचलित हैं। स्थानीय सनातन धर्मावलंबियों का दृढ़ विश्वास है कि यहाँ जो भी भक्त निर्मल भाव से मनोकामना मांगता है, देवों के देव महादेव उसकी हर विपदा हरकर मनोवांछित फल प्रदान करते हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, इस सिद्ध मंदिर का इतिहास लगभग 105 वर्ष प्राचीन है।

🏰 ‘बैकुंठपुर का ताजमहल’: कोरिया रियासत के दीवान ने दिवंगत पत्नी प्रेमाबाई की स्मृति में कराया था निर्माण

प्रेमाशंकर महादेव मंदिर के निर्माण एवं स्थापना की गाथा अत्यंत अद्भुत, भावुक और अनूठी है।

इस भव्य मंदिर का निर्माण वर्ष 1921 में 14 जनवरी को तत्कालीन कोरिया रियासत के राजा के दीवान रघुवीर प्रसाद श्रीवास्तव ने अपनी दिवंगत धर्मपत्नी प्रेमाबाई की स्मृति में कराया था। अपनी अर्धांगिनी के प्रेम और मधुर स्मृतियों को अनंत काल तक जीवंत रखने के पुनीत उद्देश्य से दीवान रघुवीर प्रसाद ने मंदिर के विशाल परिसर का नाम ‘प्रेमाबाग’ रखा, जबकि यहाँ गर्भगृह में स्थापित दिव्य शिवलिंग को ‘प्रेमाशंकर महादेव’ के नाम से विभूषित किया गया। यही कारण है कि यह देवालय धार्मिक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ वैवाहिक प्रेम, समर्पण और अटूट दांपत्य निष्ठा की एक अनुपम मिसाल के रूप में पहचाना जाता है।

💖 शिवभक्ति के रूप में अमर प्रेम की अभिव्यक्ति, जानिए क्या कहते हैं स्थानीय निवासी

प्रेमाशंकर महादेव मंदिर की सर्वप्रमुख विशेषता इसकी भावनात्मक निर्माण गाथा से संबद्ध है।

जिस प्रकार आगरा का विश्वप्रसिद्ध ताजमहल एक सम्राट द्वारा अपनी प्रिय पत्नी की स्मृति में निर्मित प्रेम की अमर निशानी माना जाता है, ठीक उसी प्रकार कोरिया जिले का यह ऐतिहासिक मंदिर भी एक पति द्वारा अपनी दिवंगत पत्नी की स्मृति में निर्मित कराया गया एक अमूल्य स्मारक है। अंतर केवल इतना है कि यहाँ वैवाहिक प्रेम की अभिव्यक्ति सनातन शिवभक्ति के रूप में प्रकट होती है। मंदिर दर्शन करने पहुंचीं स्थानीय श्रद्धालु रंजना गुप्ता बताती हैं कि, “प्रेमाशंकर महादेव मंदिर से हम सभी की अगाध आस्था जुड़ी हुई है। यहाँ प्रवेश करते ही असीम मानसिक शांति की अनुभूति होती है। यह मंदिर केवल बैकुंठपुर की धार्मिक पहचान नहीं, अपितु संपूर्ण कोरिया जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है।”

🌺 प्रेमाबाग का प्राकृतिक सौंदर्य और सावन-महाशिवरात्रि में सजने वाला भव्य मेला

दीवान रघुवीर प्रसाद श्रीवास्तव ने अपनी पत्नी प्रेमाबाई के नाम को केवल कागजों तक सीमित न रखकर संपूर्ण मंदिर प्रांगण को एक भव्य उद्यान (प्रेमाबाग) का रूप प्रदान किया।

समय के साथ-साथ गेज नदी की कल-कल बहती धारा और आसपास का हरा-भरा प्राकृतिक परिवेश इस स्थल के सौंदर्य में चार चांद लगाता है। यद्यपि पूरे वर्ष यहाँ श्रद्धालुओं का आगमन बना रहता है, किंतु सावन मास तथा महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय भोलेनाथ’ के जयकारों से गुंजायमान रहता है। मान्यता है कि सच्चे मन से यहाँ शीश नवाकर प्रेमाशंकर महादेव की आराधना करने वाले भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।

🚩 छुरीगढ़ धाम तक निकाली जाती है 20 किलोमीटर की भव्य कांवड़ यात्रा

प्रेमाशंकर महादेव की महिमा का ही परिणाम है कि प्रतिवर्ष सावन माह में यहाँ से छुरीगढ़ धाम तक लगभग 20 किलोमीटर लंबी विशाल कांवड़ यात्रा आयोजित की जाती है।

इस धार्मिक यात्रा में कोरिया जिले एवं आसपास के अंचलों से हजारों की संख्या में कांवड़िए पवित्र जल लेकर बम-बम भोले का उद्घोष करते हुए पदयात्रा पूर्ण करते हैं। राजा के दीवान और उनकी पत्नी की यह अमर प्रेम कहानी जहाँ एक ओर पर्यटकों व दर्शनार्थियों को अपनी ओर आकर्षित करती है, वहीं प्रेमाबाग और प्रेमाशंकर महादेव का यह पावन नाम आज भी समाज को निष्काम प्रेम, समर्पण और अटूट श्रद्धा का अमर संदेश दे रहा है।

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