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स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कोरबा में की बिलासपुर संभाग की समीक्षा, दिए अहम दिशा-निर्देश

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कोरबा (छत्तीसगढ़): प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल गुरुवार को कोरबा जिले के प्रवास पर रहे। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में उन्होंने बिलासपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले सभी जिलों की स्वास्थ्य सुविधाओं और सेवाओं की गहन समीक्षा की। इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया सहित बिलासपुर संभाग के तमाम जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), सिविल सर्जन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान मेडिकल कॉलेज कोरबा की स्वशासी समिति की भी बैठक संपन्न हुई, जिसमें विभागीय जनकल्याणकारी योजनाओं और वर्तमान में संचालित विकास कार्यों की प्रगति का बिंदुवार मूल्यांकन किया गया।

🩺 संभाग स्तरीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों की गहन समीक्षा, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाने पर जोर

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि संभाग स्तरीय समीक्षा बैठक में केंद्र व राज्य सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य योजनाओं और राष्ट्रीय कार्यक्रमों के क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा हुई।

बैठक में विशेष रूप से मातृ मृत्यु दर (MMR) और शिशु मृत्यु दर (IMR) को न्यूनतम स्तर पर लाने, मलेरिया नियंत्रण, मौसमी संक्रामक बीमारियों की रोकथाम, कुष्ठ रोग और सिकल सेल एनीमिया जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान व उपचार की रणनीतियों की समीक्षा की गई। इसके अतिरिक्त, अस्पतालों में आवश्यक मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक चिकित्सीय उपकरणों की उपलब्धता को लेकर भी सार्थक निर्णय लिए गए।

🔬 सीटी स्कैन और एमआरआई मशीनों की स्थापना प्रक्रिया अंतिम चरण में: स्वास्थ्य मंत्री

कोरबा जैसे औद्योगिक जिले के सरकारी अस्पतालों में वर्षों से एमआरआई (MRI), सीटी स्कैन (CT Scan) और सोनोग्राफी जैसी उच्चस्तरीय मशीनों के लंबित होने के विषय पर मंत्री ने स्पष्टीकरण दिया।

उन्होंने कहा कि यह विभाग की लापरवाही या प्रशासनिक उदासीनता का विषय नहीं है। एमआरआई और सीटी स्कैन अत्यधिक संवेदनशील और तकनीकी रूप से महत्वपूर्ण उपकरण होते हैं, जिनकी खरीद के लिए तय पैरामीटर्स, विभिन्न स्तरों की तकनीकी समितियों का अनुमोदन और गुणवत्ता मानकों का शत-प्रतिशत पालन अनिवार्य होता है। मंत्री ने आश्वस्त किया कि मशीनों की खरीद प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और बहुत जल्द इन्हें जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में स्थापित कर आम जनता के लिए शुरू कर दिया जाएगा।

👨‍⚕️ प्रदेशभर में रेडियोलॉजिस्ट की कमी दूर करने का रोडमैप, शुरू होंगे विशेष टेक्नीशियन कोर्स

जिले में मात्र एक रेडियोलॉजिस्ट की पदस्थापना और सोनोग्राफी के लिए मरीजों को एक-एक माह की लंबी वेटिंग मिलने के सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार किया कि पूरे प्रदेश में रेडियोलॉजिस्ट की कमी बनी हुई है।

“रेडियोलॉजिस्ट और सोनोग्राफी विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए हमने इस शैक्षणिक वर्ष से प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में विशेष टेक्नीशियन कोर्स शुरू किए हैं। कोरबा मेडिकल कॉलेज में भी यह प्रशिक्षण पाठ्यक्रम शीघ्र शुरू किया जाएगा। इससे हमें प्रशिक्षित टेक्नीशियन मिलेंगे, जिनकी तैनाती सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) तक की जाएगी। वर्तमान में वैकल्पिक व्यवस्था कर कोरबा में अतिरिक्त रेडियोलॉजिस्ट की नियुक्ति के प्रयास किए जा रहे हैं।”श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री

🎓 कोरबा को मिली बीएससी नर्सिंग कॉलेज की मंजूरी, प्राध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया होगी शुरू

जिले के शासकीय जीएनएम कॉलेज में बीते एक दशक से भवन और शिक्षकों की कमी के मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि कोरबा के लिए बीएससी नर्सिंग (B.Sc. Nursing) कॉलेज की विधिवत स्वीकृति प्रदान कर दी गई है।

इसके लिए सर्वसुविधायुक्त भवन की व्यवस्था के साथ-साथ अध्यापन कार्य हेतु आवश्यक लेक्चरर्स और प्रोफेसर्स की भर्ती प्रक्रिया शीघ्र ही प्रारंभ की जाएगी। इस शैक्षणिक सत्र से ही जिले में नर्सिंग कॉलेज का विधिवत संचालन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

🏗️ कोरबा मेडिकल कॉलेज भवन का 60% निर्माण कार्य पूरा, सुपरस्पेशलिटी में होगा अपग्रेड

कोरबा मेडिकल कॉलेज के नए परिसर का उल्लेख करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि नए भवन निर्माण का लगभग 60 प्रतिशत कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हो चुका है और शेष कार्य भी तीव्र गति से पूरा किया जा रहा है।

निर्माण कार्य पूरा होते ही मेडिकल कॉलेज को पूरी तरह नए भवन में स्थानांतरित कर संचालित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता पहले राज्य के सभी मौजूदा मेडिकल कॉलेजों के बुनियादी ढांचे को पूरी तरह मजबूत और आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है। इसके उपरांत आगामी चरणों में इन्हें चरणबद्ध तरीके से सुपरस्पेशलिटी और मल्टीस्पेशलिटी अस्पतालों के रूप में उन्नत (Upgrade) किया जाएगा।

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