जंतर-मंतर पर पैलेट गन के छर्रे से गई छात्र साहिल की आंख की रोशनी: खाकी पहनने का सपना टूटा, राहुल गांधी ने उठाया मामला
झज्जर (हरियाणा): जिस खाकी वर्दी को पहनकर देश सेवा करने और अपने परिवार का सहारा बनने का सपना एक 19 वर्षीय युवा रात-दिन देख रहा था, उसी व्यवस्था में इस्तेमाल हुई पैलेट गन के छर्रों ने उसकी आंखों के आगे अंधेरा कर दिया।
यह पीड़ादायी कहानी है दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन के छर्रे लगने से अपनी आंख की रोशनी गंवाने वाले साहिल लोहचब की, जो मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले के भूपनियां गांव के निवासी हैं। साहिल का परिवार करीब 10 वर्ष पूर्व दिल्ली के नजफगढ़ में किराए के मकान में आकर रहने लगा था।
🚕 दिव्यांग पिता का सहारा: 10-12 वर्ष की उम्र में सीखी ड्राइविंग, पढ़ाई के साथ चलाई टैक्सी
पारिवारिक पृष्ठभूमि और संघर्ष की दास्तान:
-
दिव्यांग पिता और कमजोर आर्थिक स्थिति: साहिल के पिता दीपक पोलियो के कारण दिव्यांग हैं। परिवार की आर्थिक तंगी के चलते साहिल ने बचपन से ही पढ़ाई के साथ-साथ परिवार का हाथ बंटाना शुरू किया।
-
टैक्सी चलाकर संभाला परिवार: घर में आय का मुख्य स्रोत टैक्सी चलाना ही था। साहिल ने 10-12 वर्ष की उम्र में ही ड्राइविंग सीख ली थी। वे रोजाना 4 से 5 घंटे टैक्सी चलाकर घर का खर्च और अपने दो छोटे भाइयों (कक्षा 6वीं और 9वीं) की पढ़ाई का जिम्मा संभालते थे।
-
ऑनलाइन कोचिंग से तैयारी: टैक्सी चलाने के बाद बचे हुए समय में साहिल घर पर ही ऑनलाइन कोचिंग के माध्यम से दिल्ली पुलिस भर्ती परीक्षा की कड़ी तैयारी कर रहे थे।
🏥 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर बदली जिंदगी, एम्स में चला उपचार
घटनाक्रम और राहुल गांधी का समर्थन:
-
प्रोटेस्ट के दौरान हादसा: नीट (NEET) पेपर लीक मामले में दिल्ली यूनिवर्सिटी के छात्र साहिल विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए थे। साहिल का कहना है कि सुरक्षा बलों द्वारा इस्तेमाल की गई पैलेट गन के छर्रे सीधे उनकी दाईं आंख और चेहरे पर लगे।
-
एक आंख की रोशनी खत्म: छर्रे लगने से उनकी दाईं आंख की रोशनी पूरी तरह चली गई और चेहरे पर गंभीर चोटों के निशान रह गए। घटना के बाद दिल्ली एम्स (AIIMS) में उनका लंबा इलाज चला।
-
राजनीतिक व विधिक पहल: घटना के बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने परिवार से मुलाकात की और इलाज में सहयोग दिया। मामले में दिल्ली पुलिस के खिलाफ सख्त कार्रवाई व एफआईआर की मांग को लेकर संसद मार्ग थाने पर भी विरोध दर्ज कराया गया।
💔 टूटा पुलिस में भर्ती होने का सपना, निष्पक्ष जांच और न्याय की गुहार
भविष्य की चुनौतियां और विधिक मांगें:
-
मेडिकल अनफिट होने की विवशता: आंख की रोशनी चले जाने के कारण साहिल अब दिल्ली पुलिस भर्ती की मेडिकल परीक्षा के लिए अयोग्य हो चुके हैं, जिससे उनका वर्दी पहनने और परिवार की गरीबी दूर करने का सपना चकनाचूर हो गया।
-
जीविकोपार्जन का संकट: आंख में गंभीर चोट के कारण अब वे न तो पहले की तरह पढ़ाई कर पा रहे हैं और न ही टैक्सी चलाकर घर की आर्थिक मदद कर पा रहे हैं।
-
दोषियों पर कार्रवाई की मांग: पीड़ित साहिल और उनके परिवार ने निष्पक्ष पुलिस जांच की मांग की है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था और उनकी जिंदगी बर्बाद करने का जिम्मेदार कौन है।
Comments are closed, but trackbacks and pingbacks are open.