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जमानत पर रिहा होंगे विस्मया के पति किरण कुमार, सुप्रीम कोर्ट ने 10 साल की सजा निलंबित की

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सुप्रीम कोर्ट ने किरण कुमार को उनकी पत्नी विस्मया की दहेज संबंधी मौत के लिए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई सजा को निलंबित कर दिया. जस्टिस एमएम सुंदरेश और के. विनोद चंद्रन की बेंच ने बुधवार को उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.

दरअसल, अपनी मौत से कुछ दिन पहले ही विस्मया ने अपने शरीर पर चोटों और घावों की तस्वीरें व्हाट्सएप के जरिए अपने रिश्तेदारों को भेजी थीं, जिसमें दावा किया गया था कि उसका पति उसे दहेज के लिए परेशान कर रहा है. उसके द्वारा भेजे गए व्हाट्सएप चैट और वॉयस नोट्स के स्क्रीनशॉट उसके मृत पाए जाने के बाद उसके परिवार द्वारा साझा किए गए थे.

ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी 10 साल की सजा

मई 2022 में ट्रायल कोर्ट ने कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 304बी (दहेज हत्या) के तहत अन्य धाराओं के अलावा दोषी पाया था और उसे 10 साल कैद की सजा सुनाई थी. इसके बाद कुमार ने अपनी दोषसिद्धि और सजा को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट का रुख किया जबकि उनकी अपील अभी भी हाईकोर्ट के समक्ष लंबित है.

SC ने जमानत पर रिहा करने का दिया आदेश

सजा को निलंबित करने के उनके आवेदन को दिसंबर, 2022 में खारिज कर दिया गया था. जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस के विनोद चंद्रन की सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने आज कुमार की हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील को स्वीकार कर लिया और उन्हें जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया.

21 जून 2021 को खिड़की से लटकी हुई पाई गई थी

विस्मया 24 साल की एक आयुर्वेद मेडिकल छात्रा थी. 21 जून 2021 को कुमार के घर के बाथरूम की खिड़की से लटकी हुई पाई गई थी. कुमार पर आईपीसी की धारा 498ए (दहेज के लिए महिला पर अत्याचार), 306 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और 304बी (दहेज हत्या) और दहेज निषेध अधिनियम, 1961 की धारा 3 और 4 के तहत मामला दर्ज किया गया था.

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