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16 साल के लड़के के लिवर से निकाला 4.5 किलो का ट्यूमर, कैंसर पीड़ित की डॉक्टरों ने कैसे बचाई जान?

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आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम से हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां डॉक्टरों ने सर्जरी कर एक युवक के लिवर से 4.5 किली का ट्यूमर निकाला है. युवक की उम्र 16 साल बताई जा रही है. दरअसल यहां का एक युवक लगभग एक महीने से पेट में तेज़ दर्द और बार-बार बुखार से पीड़ित था. जब उसे अस्पतालों में दिखाया गया, तो डॉक्टरों ने उसके लीवर में संक्रमण बताकर दवाइयां दीं. हालांकि युवक को कोई फायदा नहीं हुआ.

इसके बाद उसे विशाखापत्तनम के KIMS सीतामधारा अस्पताल लाया गया. यहां जांच हुई तो पता चला कि उसे लिवर कैंसर है. इसके बाद वरिष्ठ जीआई और लिवर सर्जन डॉ. मुरलीधर नंबाडा, जिन्होंने ट्यूमर निकालने के लिए उस पर एक दुर्लभ और जटिल सर्जरी की, उन्होंने मामले को बारे में विस्तार से बताया.

युवक को दुर्लभ ट्यूमर

डॉक्टर ने कहा जब लड़का यहाँ आया, तो उसका पेट बहुत सूजा हुआ था. हमें पता चला कि उसके लिवर में कुछ गड़बड़ है. जांच के बाद, हमें पता चला कि उसे लिवर कैंसर का एक दुर्लभ ट्यूमर है. डॉक्टरों की भाषा में इसे मैलिग्नेंट हेपेटिक एंजियोमायोलिपोमा कहते हैं. यह लिवर के दाहिने हिस्से के लगभग आधे हिस्से में फैल चुका है. हमने सीटी स्कैन और एमआरआई जैसी जांचें भी की और ट्यूमर के सटीक स्थान और उसकी स्थिति का पता लगाया.

सर्जरी कर डॉक्टरों ने बचाई जान

इसके बाद, हमने तुरंत सर्जरी करने का फैसला किया. पूरी सर्जरी में लगभग साढ़े छह घंटे लगे. उन्होंने बताया यहा ट्यूमर 4.5 किलो का है. ये लगभग एक फुटबॉल के आकार का बडा ट्यूमर है. इस तरह की चीज़ को बिना किसी परेशानी के निकालना भी बहुत मुश्किल होता है. ट्यूमर से कोई रक्तस्राव नहीं होना चाहिए. साथ ही, सर्जरी के दौरान लिवर में कोई अवशेष छोड़े बिना ट्यूमर को पूरी तरह से हटाया जाना चाहिए और स्वस्थ हिस्से को सुरक्षित रखा जाना चाहिए.

डॉक्टर ने क्या कहा?

डॉक्टर ने कहा क्योंकि, लिवर हमारे शरीर का एक बहुत ही महत्वपूर्ण अंग है. चूंकि मरीज़ केवल 16 साल का है, इसलिए संभावना है कि लिवर बाद में बढ़ेगा. इसलिए, बचे हुए लिवर को सुरक्षित रखना ज़रूरी है. हालांकि, ट्यूमर के आकार के साथ-साथ, उसका स्थान भी बहुत समस्याजनक था. इसलिए, इसकी योजना बहुत सावधानी से और पूरी सटीकता के साथ बनानी पड़ी.

माता पिता ने जताया आभार

उन्होंने बताया कि सर्जरी के बाद लड़का जल्दी ठीक हो गया और पांचवें दिन उसे छुट्टी दे दी गई. अब उसकी कीमोथेरेपी के छह चक्र पूरे हो चुके हैं और वह अपनी रोज़मर्रा की गतिविधियां सामान्य रूप से कर पा रहा है. लड़के के माता-पिता ने सीतामढारा स्थित KIMS अस्पताल में सबसे जटिल सर्जरी को भी सफलतापूर्वक करने और उनके बेटे की जान बचाने के लिए अस्पताल के डॉक्टरों, कर्मचारियों और प्रबंधन का आभार व्यक्त किया.

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