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सिवनी में ‘खाकी’ पर लगा करोड़ों की लूट का दाग: हवाला कांड में पुलिसकर्मियों पर लगे संगीन आरोप, एडिशनल एसपी पर भी सवाल

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 राष्ट्र चंडिका न्यूज़,सिवनी। “कानून सबके लिए बराबर है” की धारणा को सिवनी जिले में लगे ‘हवाला कांड’ ने बड़ा झटका दिया है। जिले में खाकी पहनने वाले कुछ पुलिसकर्मियों पर 8-9 अक्टूबर की रात हवाला का लगभग 1 करोड़ 45 लाख रुपये लूटने के संगीन आरोप लगे हैं, लेकिन अब तक उन वर्दीधारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से पूरे पुलिस महकमे की छवि पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
2.96 करोड़ की बरामदगी, 50-50 की डील का आरोप
मामला सिलादेही क्षेत्र का है, जहां एक क्रेटा वाहन से पुलिस ने 2 करोड़ 96 लाख 50 हजार रुपये की बड़ी रकम बरामद की थी। सूत्रों के अनुसार, इस रकम को देखकर कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की नीयत डगमगा गई। हवाला कारोबारी ने आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मियों ने उनसे 50-50 की डील की। हालांकि, आरोप है कि तय हिस्सेदारी से भी लगभग 25 लाख रुपये अतिरिक्त हड़प लिए गए, जिससे पूरा खेल बिगड़ गया और मामला मीडिया की सुर्खियों में आ गया।
हवाला कारोबारी का दावा है कि पुलिस ने कुल 1 करोड़ 45 लाख रुपये की हेराफेरी की है। वहीं, पूरी राशि में से 25 लाख रुपये का हिसाब न मिलने की चर्चा है, जिसकी तलाश में कुछ पुलिसकर्मी अभी भी लगे हुए हैं।
विभागीय राजनीति और अंदरूनी दरारें
पैसे के इस बड़े खेल ने सिवनी पुलिस महकमे के भीतर की कलह को भी उजागर कर दिया है। सूत्रों की मानें तो अब अधिकारी खुद को पाक-साफ साबित करने और अपने साथियों को फंसाने के लिए सबूत जुटा रहे हैं। महकमे के भीतर “मैं नहीं, वो दोषी है” की होड़ मची है, जिससे यह साफ है कि रसूखदार पुलिस अफसरों को बचाने की कोशिशें भीतरखाने से जारी हैं।
एडिशनल एसपी दीपक मिश्रा पर उठे गंभीर सवाल
इस पूरे प्रकरण में सिवनी के एडिशनल एसपी दीपक मिश्रा पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि मिश्रा सेवानिवृत्ति से पहले “विशेष मकसद” से सिवनी में पदस्थ हुए हैं। स्कॉट वसूली हो या यह हवाला कांड, हर बार जब पुलिस अधीक्षक जिले में मौजूद नहीं होते हैं, तब मिश्रा विवादों के केंद्र में आ जाते हैं।
1.45 करोड़ की कथित लूट का मामला सामने आने पर, जब एसपी जिले से बाहर थे, तब मिश्रा को जांच अधिकारी बनाया गया था। लेकिन कुछ ही घंटों में उन्हें जांच से हटा दिया गया, जिसने संदेह की सुई को और भी तेज कर दिया है।
खाकी लुटेरे ‘सुरक्षित’, कारोबारी पर कार्रवाई
इस मामले की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि एक तरफ हवाला कारोबारी के खिलाफ तो लखनवाड़ा थाने में मामला दर्ज किया जा रहा है, लेकिन दूसरी तरफ जिन पुलिसकर्मियों पर करोड़ों रुपये की लूट के संगीन आरोप लगे हैं, वे अब तक जांच की आड़ में बचे हुए हैं।
आम जनता और मीडिया पूछ रही है कि जब हवाला की रकम पुलिस के कब्जे में मिली और कारोबारी खुद लूट की बात कह रहा है, तो वर्दीधारी लुटेरों पर एफआईआर क्यों नहीं हो रही है? शहर में यह चर्चा तेज है कि यह पूरा मामला ‘ऊपर के अधिकारियों के संरक्षण’ में दबाया जा रहा है। सवाल यह है कि जब आरोपी आम नागरिक होता है तो कानून तुरंत हरकत में आता है, लेकिन आरोपी वर्दीधारी हो तो कानून क्यों मौन हो जाता है?
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