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मठ मंदिर मार्ग पर दीपावली की अलौकिक छटा, परंपरा और उत्साह का संगम

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मठ मंदिर मार्ग पर दीपावली की अलौकिक छटा, परंपरा और उत्साह का संगम
राष्ट्र चंडिका न्यूज़,सिवनी। धर्मनगरी सिवनी का हृदय स्थल कहे जाने वाला मठ मंदिर मार्ग इन दिनों रोशनी के महापर्व दीपावली के उल्लास में सराबोर है। पर्व की आहट के साथ ही यह  बाजार एक भव्य स्वरूप में सज गया है, जहां परंपरा, कला और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से आए खरीददारों की भीड़ से बाजार गुलजार है, जो दीपावली की रौनक को कई गुना बढ़ा रहा है।
दीपों की दमक से जगमगा उठा बाजार:
मठ मंदिर मार्ग के दोनों किनारों पर लगी दियों की अस्थायी दुकानें, इस पूरे क्षेत्र को एक मनमोहक रूप दे रही हैं। मिट्टी की सौंधी खुशबू के बीच रखे ये दीये, भारतीय संस्कृति के सदियों पुराने शिल्प का प्रतीक हैं। इन दुकानों पर साधारण मिट्टी के दीयों से लेकर, आकर्षक कलात्मक नक्काशी वाले डिजाइनर दीये, रंगीन दीये, और तेल के साथ मोमबत्ती रखने वाले आधुनिक दीयों का विशाल संग्रह उपलब्ध है। विक्रेता बताते हैं कि इस साल ग्राहकों में हस्तनिर्मित और पर्यावरण-अनुकूल (ईको-फ्रेंडली) दीयों की मांग सबसे अधिक है, जो दर्शाता है कि लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहना चाहते हैं।
महालक्ष्मी-गणेश की प्रतिमाएं बनीं आस्था का केंद्र:
दीपावली के पूजन का मुख्य आकर्षण, धन की देवी महालक्ष्मी और प्रथम पूज्य भगवान गणेश की प्रतिमाएं हैं। मठ मंदिर मार्ग की दुकानों पर इनकी छोटी-छोटी, मनमोहक प्रतिमाएं ख़ूब सजकर आई हैं। विशेष रूप से स्थानीय कलाकारों द्वारा तैयार की गई मिट्टी की ये मूर्तियां बेहद लुभावनी हैं। मूर्तियों की बारीक़ कारीगरी, रंगों का सुंदर मेल और मनमोहक मुद्राएं इन्हें खास बनाती हैं। ग्राहकों के लिए ये प्रतिमाएं सिर्फ पूजन सामग्री नहीं, बल्कि आस्था और शुभता का प्रतीक हैं, इसलिए इनकी बिक्री ज़ोरों पर है। मिट्टी से बनी होने के कारण ये प्रतिमाएं पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दे रही हैं, और लोग प्लास्टिक या पीओपी की मूर्तियों की जगह इन्हें प्राथमिकता दे रहे हैं।
मिट्टी शिल्प और रंगोली के रंगों की बहार:
बाजार में केवल दीये और मूर्तियां ही नहीं, बल्कि घर को सजाने के लिए मिट्टी से बने विभिन्न सजावटी सामान भी खूब बिक रहे हैं। आकर्षक डिज़ाइन के छोटे कलश, मिट्टी के सुंदर घड़े (कुल्हड़), लक्ष्मी जी के चरण, मिट्टी के तोरण और अन्य कलाकृतियां हर घर को पारंपरिक रूप से सजाने के लिए उपलब्ध हैं। इन हस्तशिल्पों में स्थानीय कारीगरों की कला और मेहनत साफ झलकती है। इसके अलावा, दीपावली के लिए रंगोली की दुकानें भी खास तौर पर सजी हैं। जीवंत रंगों के पाउडर, रंगोली के साँचे (स्टेंसिल) और चमकीले मोती (ग्लिटर) खरीदने के लिए महिलाएं और बच्चे उत्साह से जुट रहे हैं, ताकि वे अपने घरों के आंगन में कला के सुंदर नमूने उतार सकें।
स्थानीय कारीगरों और छोटे व्यवसायियों को मिला बड़ा सहारा:
यह मठ मंदिर मार्ग का बाजार स्थानीय कलाकारों और छोटे व्यवसायियों के लिए दीपावली के अवसर पर रोज़गार का एक बड़ा माध्यम बनता है। दियों और मिट्टी के सामान के विक्रेता बताते हैं कि पूरे साल वे इस पर्व का इंतजार करते हैं। इस साल भी अच्छी बिक्री से उनके चेहरे पर खुशी है। ग्राहकों द्वारा स्थानीय उत्पादों को बड़े पैमाने पर खरीदने से न सिर्फ उनकी आजीविका सुरक्षित होती है, बल्कि पारंपरिक कला को भी नया जीवन मिलता है।
खुशियों और मेल-मिलाप का त्यौहार:
मठ मंदिर मार्ग पर हो रही यह खरीदारी सिर्फ लेन-देन तक सीमित नहीं है। यह लोगों के बीच मेल-मिलाप, त्यौहार की खुशी और सामूहिक उत्साह का केंद्र बन गया है। खरीददारों का उत्साह, विक्रेताओं की मुस्कान और बाजार की जगमगाहट सिवनी में दीपावली के आगमन का स्पष्ट संकेत दे रही है। यह बाज़ार एक बार फिर साबित कर रहा है कि दीपावली केवल रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि कला, संस्कृति और आपसी सौहार्द का एक महान उत्सव है।

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