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सिवनी जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं का अंबार: दुग्धपान वार्ड में शौचालय न होने से महिलाएं परेशान

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राष्ट्र चंडिका न्यूज़,सिवनी। जिला चिकित्सालय, जो जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माना जाता है, इन दिनों बदहाली और कुप्रबंधन का केंद्र बना हुआ है। अस्पताल के दुग्धपान (SNCU/मैटर्निटी) वार्ड में बुनियादी सुविधाओं के अभाव ने मरीजों और उनके परिजनों की कमर तोड़ दी है। सबसे गंभीर समस्या वार्ड में बाथरूम और शौचालय का न होना है, जिसके कारण प्रसूता महिलाएं और नवजात शिशुओं की माताएं दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
मरीजों की बढ़ती मुश्किलें
अस्पताल में भर्ती महिलाओं का कहना है कि एक तरफ वे शारीरिक कमजोरी से जूझ रही हैं, वहीं दूसरी तरफ वार्ड में शौचालय की व्यवस्था न होने से उन्हें दूर के अन्य वार्डों या सार्वजनिक शौचालयों का उपयोग करना पड़ रहा है।
 भटकाव की स्थिति: शौचालय की तलाश में मरीजों को अस्पताल के एक कोने से दूसरे कोने तक चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
  संक्रमण का खतरा: प्रसूता महिलाओं को गंदगी वाले क्षेत्रों में जाने से संक्रमण (Infection) का भारी खतरा बना हुआ है, जो उनके और नवजात बच्चों के स्वास्थ्य के लिए घातक हो सकता है।
  सुरक्षा का अभाव: रात के समय महिलाओं को वार्ड से बाहर असुरक्षित रास्तों से होकर जाना पड़ता है, जिससे परिजन भी चिंतित रहते हैं।
प्रशासन की अनदेखी पर फूटा गुस्सा
मरीजों के परिजनों ने प्रशासन पर आरोप लगाया है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है। अस्पताल परिसर में स्वच्छता और सुविधाओं के बड़े-बड़े दावों के बीच, दुग्धपान कराने वाली माताओं के लिए बुनियादी सुविधा का न होना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
> “अस्पताल में इलाज तो मिल रहा है, लेकिन बुनियादी जरूरतें जैसे शौचालय के लिए हमें यहाँ-वहाँ भटकना पड़ रहा है। प्रशासन को हमारी तकलीफ दिखाई नहीं दे रही।”
 एक पीड़ित महिला मरीज
जिला चिकित्सालय में समस्याओं का यह अंबार केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है, लेकिन दुग्धपान कराने वाली महिलाओं की यह समस्या मानवीय दृष्टिकोण से भी अत्यंत गंभीर है। यदि जल्द ही शौचालयों की व्यवस्था नहीं की गई, तो मरीजों का आक्रोश उग्र रूप ले सकता है।
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