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कंगाल होने की कगार पर अमेरिका! ईरान से युद्ध के बीच $39 ट्रिलियन हुआ कर्ज; भारत की इकोनॉमी से 10 गुना ज्यादा उधार, क्या डूबेगी महाशक्ति?

अमेरिका ने इजराइल के साथ मिलकर पिछले महीने ईरान पर हमला बोल दिया. हमले के अभी कुछ ही हफ्ते हुए हैं, लेकिन यह आर्थिक रूप से अमेरिका पर लगातार भारी पड़ता जा रहा है. दुनिया के सबसे अमीर देश पर भी आर्थिक संकट का दौर मंडरा सकता है और उसका राष्ट्रीय स्तर पर कुल कर्ज बुधवार तक रिकॉर्ड 39 ट्रिलियन डॉलर के पार पहुंच गया.

चौंकाने वाला यह आंकड़ा तब है जब ट्रंप प्रशासन अमेरिका की आर्थिक व्यवस्था को सही करने में लगे हैं, एक बड़ा टैक्स कानून पास करना, रक्षा खर्च और इमिग्रेशन पर सख्ती बढ़ाना, और साथ ही कर्ज को कम करने की कोशिश करना. ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार के दौरान अमेरिका का कर्ज कम करने का वादा किया था. बड़ी बात यह है कि अमेरिका का कुल कर्ज (39 ट्रिलियन डॉलर) भारत की कुल अर्थव्यवस्था से 10 गुना अधिक है.

हर दौर में लगातार बढ़ता जा रहा अमेरिका का कर्ज

गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस की ओर से अमेरिकी लोगों पर तेजी से बढ़ रहे सरकारी कर्ज की कुछ वजह भी बताई गई है, इनमें मॉर्गेज और कारों जैसी चीजों के लिए ज्यादा ब्याज दरें, निवेश के लिए कम पैसा होने की वजह से कम वेतन, और सामान तथा सेवाओं का ज्यादा महंगा होना शामिल है. देश में संतुलित बजट के पैरोकार यह चेतावनी भी देते हैं कि ज्यादा कर्ज लेने और उस पर ज्यादा ब्याज देने का लंबे समय से चला आ रहा यह चलन अमेरिकियों के लिए लाभकारी नहीं होगा. उन्हें भविष्य में और भी कड़े आर्थिक फैसलों का सामना करना पड़ सकता है.

पीटर जी. पीटरसन फाउंडेशन जो अमेरिका की लंबे समय की आर्थिक चुनौतियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए काम करने वाला एक गैर-लाभकारी संगठन है, के चेयरमैन और CEO माइकल पीटरसन ने, अपने एक बयान में कहा, “हमें इस चिंताजनक गति से हो रही बढ़ोतरी और अगली पीढ़ी पर पड़ रहे भारी आर्थिक बोझ को समझना होगा.” अमेरिका के लिए यह चिंता का विषय है. देश में चाहे रिपब्लिकन हों और डेमोक्रेटिक हों, दोनों ही पार्टियों के राष्ट्रपतियों के कार्यकाल में संघीय कर्ज में भारी बढ़ोतरी ही हुई है.

चंद महीनों में जुड़ गया एक ट्रिलियन डॉलर कर्जा

पिछले कुछ समय में अमेरिका के कर्ज में बढ़ोतरी की मुख्य वजह युद्ध, कोरोना महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर किया गया खर्च और टैक्स में की गई भारी कटौतियां रही हैं. अब अमेरिका का कर्ज 5 महीने पहले 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया था, जबकि उससे 2 महीने पहले 37 ट्रिलियन डॉलर हुआ करता था.

पीटरसन दावा करते हुए कहते हैं, “मौजूदा बढ़ोतरी की दर को देखते हुए, इस साल होने वाले चुनावों से पहले ही हमारा राष्ट्रीय कर्ज बढ़कर चौंका देने वाले 40 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा.” उन्होंने कहा, “बिना किसी ठोस योजना के, ताबड़तोड़ अंदाज में एक के बाद एक ट्रिलियन डॉलर का कर्ज लेना, ‘अस्थिरता’ की ही परिभाषा है.”

ईरान जंग में 12 बिलियन डॉलर फूंक चुका US

व्हाइट हाउस के आर्थिक सलाहकार केविन हैसेट ने पिछले दिनों अनुमान लगाया था कि ईरान में जारी जंग में अमेरिका का अब तक 12 बिलियन डॉलर से अधिक का खर्चा हो चुका है. यह अभी साफ भी नहीं है कि यह जंग आखिर कब खत्म होगा. हालांकि व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने राष्ट्रपति ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के पहले साल के दौरान संघीय घाटे में आई कमी की ओर इशारा किया था.

अमेरिकी वित्त विभाग की ‘फिस्कल डेटा’ वेबसाइट के अनुसार, वित्तीय साल 2025 में सरकार का कुल खर्च 7.01 ट्रिलियन डॉलर था जबकि राजस्व महज 5.23 ट्रिलियन डॉलर का रहा था. इस तरह से अमेरिका को 1.78 ट्रिलियन डॉलर का घाटा हुआ, हालांकि यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 41 बिलियन डॉलर कम है.

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