Ram Mandir Trust: चंपत राय का इस्तीफा मंजूर, कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी बोले- ‘हुंडियों से चढ़ावे की चोरी हुई’
अयोध्या में राम मंदिर ट्रस्ट की एक अहम बैठक हुई, जिसके बाद कई चौंकाने वाली बातें निकलकर सामने आईं। बैठक में राम मंदिर में आए चढ़ावे और खर्च का पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक किया गया। इसके साथ ही ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया। अब चंपत राय के कामकाज की जिम्मेदारी कृष्ण मोहन को सौंपी गई है। करीब तीन घंटे तक चली इस बैठक के दौरान ट्रस्ट के सदस्यों ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के कामकाज पर गंभीर सवाल भी उठाए।
‘निश्चित रूप से भूल हुई, हुंडियों से चोरी हुआ चढ़ावा’
इस पूरे मामले को लेकर राम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद गिरी ने मीडिया से खास बातचीत की। उन्होंने स्वीकार किया कि, “कभी सोचा नहीं था कि ऐसा होगा। निश्चित रूप से हमसे भूल हुई है। हुंडियों से चढ़ावे की चोरी हुई है। हमें सीईओ (CEO) को पहले ही रख लेना चाहिए था।” उन्होंने बताया कि कमियों की जांच शुरू कर दी गई है और इसके लिए तीन लोगों की एक विशेष समिति बनाई गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह किसी प्रकार के दबाव में नहीं हैं।
‘चंपत राय ने गलत लोगों पर यकीन किया’
गोविंद गिरी ने महासचिव चंपत राय के इस्तीफे पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा, “चंपत राय ने गलत लोगों पर विश्वास किया। हम उन्हें दोषी कह सकते हैं, लेकिन यह चारित्रिक दोष नहीं है। अगर हम इसे गलत नहीं मानते, तो उनका त्यागपत्र स्वीकार ही क्यों करते? निश्चित रूप से कार्यकलापों में गलती हुई है, इसीलिए उनके त्यागपत्र को एकमत से स्वीकार किया गया।” उन्होंने एसबीआई (SBI) की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जो जिम्मेदारियां बड़े लोगों को पूरी करनी थीं, वे नहीं की गईं, जिसका यह परिणाम सामने आया है। चंपत राय की एकमात्र गलती करीबियों पर भरोसा करना थी।
दान में मिली सभी 2800 सामग्रियां पूरी तरह सुरक्षित
कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने रजिस्टर दिखाते हुए स्पष्ट किया कि राम मंदिर को दान में मिली सभी 2800 सामग्रियां पूरी तरह सुरक्षित हैं। उन्होंने कहा कि मंदिर को दान की जाने वाली कुछ सामग्रियों की चोरी होने को लेकर अफवाह फैलाई गई थी, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। कागभुशुंडि, रामचरितमानस और पादुकाएं जैसी सभी महत्वपूर्ण चीजें अपनी जगह सुरक्षित हैं। दान में मिली सभी सामग्रियों का पूरा रिकॉर्ड और रजिस्टर रखा जा रहा है, ताकि भविष्य में कोई भी उनके कामकाज पर उंगली न उठा सके।
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