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राम मंदिर दान चोरी मामला: कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी का बड़ा बयान, कहा – “इस्तीफा नहीं दूँगा, शिवाजी का अनुयायी हूँ”

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श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी महाराज ने अपने इस्तीफे की अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया है कि वे अपने पद से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा, “मैं छत्रपति शिवाजी महाराज का अनुयायी हूं, भागने वालों में से नहीं हूं।” उन्होंने स्वीकार किया कि मंदिर में हुई घटना ट्रस्ट के लिए एक बड़ा झटका और शर्म की बात है। उन्होंने कहा कि वे पद छोड़ने के बजाय व्यवस्था को मजबूत करने और प्रायश्चित करने पर ध्यान दे रहे हैं।

🛡️ सुरक्षा और व्यवस्था में बड़े बदलाव

गोविंद देव गिरी ने बताया कि मंदिर में दानपात्रों की सुरक्षा को लेकर अब नई गाइडलाइंस लागू की गई हैं:

  • ड्रेस कोड: दान की गिनती के दौरान अंदर जाने वाले सभी लोगों के लिए ड्रेस कोड अनिवार्य कर दिया गया है।

  • CCTV निगरानी: अब CCTV कैमरे हर समय चालू रहेंगे और उन्हें बंद करने की अनुमति नहीं होगी।

  • सख्ती: गिनती के बाद बाहर निकलने वाले प्रत्येक व्यक्ति की गहन तलाशी ली जाएगी।

  • अनुष्ठान: घटना के प्रायश्चित के लिए मंदिर में 70 पंडितों द्वारा 10 दिनों का अनुष्ठान किया जा रहा है।

🔍 एसआईटी जांच और चंपत राय का इस्तीफा

उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की एसआईटी जांच से वे संतुष्ट हैं और चंपत राय ने अपना इस्तीफा स्वयं सौंपा है। उन्होंने कहा कि दान राशि के संग्रहण में बैंक (SBI) के कर्मचारियों की भी भूमिका थी, जिस पर भरोसा किया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे चंपत राय की लापरवाही की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए दान के पारदर्शी प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध हैं।

🚫 गलत सूचनाओं का खंडन

गोविंद देव गिरी ने मीडिया में चल रही गलत खबरों पर भी सफाई दी:

  • संपत्ति: उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके नाम पर कोई संपत्ति नहीं है और वे पुणे में अपने पुराने निवास स्थान पर ही रह रहे हैं।

  • चोरी की राशि: उन्होंने बताया कि चोरी हुई राशि को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है, जबकि उनके अनुसार यह राशि लगभग 3 करोड़ रुपये के आसपास है।

  • राजनीतिक संबंध: उन्होंने स्पष्ट किया कि इस घटना का किसी भी राजनीतिक दल या संगठन से कोई संबंध नहीं है।

  • सिंधी समाज की दान राशि: उन्होंने बताया कि सिंधी समाज द्वारा दान की गई सोने की ईंटों के बारे में समाज को जवाब दे दिया गया है और उन्होंने स्वयं अपनी भूल स्वीकार कर ली है।

अंत में उन्होंने जोर देकर कहा कि देशभर के करोड़ों राम भक्तों का विश्वास फिर से कायम करना ही उनकी पहली प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि दोषियों को सख्त सजा दिलाई जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

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