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छात्र प्रदर्शनों पर लाठीचार्ज मामले में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश! निर्दोषों को तुरंत रिहा करने के निर्देश, जानें कोर्ट की 4 बड़ी बातें

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सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने मंगलवार को दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुए पुलिस लाठीचार्ज के संवेदनशील मामले में सुनवाई की। सुनवाई के दौरान सरकार की दलीलों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में देश के दिग्गज और वरिष्ठ वकीलों की पूरी फौज मैदान में उतर गई।

पहले दिन की गहन सुनवाई में सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी, सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण समेत 10 प्रमुख वरिष्ठ वकीलों ने अपनी-अपनी दलीलें पेश कीं। सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए। पहले दिन की सुनवाई पूरी होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किए, जिनमें बिना आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सामान्य प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा करने और घटना से जुड़ी सभी पीसीआर कॉल का ब्योरा (डिटेल) पूरी तरह सुरक्षित रखने के कड़े निर्देश शामिल हैं।

⚖️ देश भर के वकीलों ने उठाई पुलिसिया अत्याचार की आवाज, बिहार में नाबालिगों को रखने का भी मुद्दा उठा

प्रदर्शनकारियों पर पुलिसिया लाठीचार्ज और अत्यधिक बल प्रयोग के खिलाफ जो मामला दाखिल हुआ है, वह एक रिट पिटीशन है। इसे एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने दायर किया है। त्रिपाठी की तरफ से पक्ष रखते हुए सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने कहा कि यह सिर्फ दिल्ली का मामला नहीं है, बल्कि पूरे देश में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस द्वारा अत्यधिक बल का प्रयोग किया गया है।

एक अन्य याचिका में सीनियर एडवोकेट श्याम दीवान ने कहा कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को झूठे मामलों में फंसाने की धमकियां दीं, जिसके वीडियो साक्ष्य मौजूद हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जजों से कराने की मांग की।

वहीं, सीनियर एडवोकेट शोएब मल्लिक ने कहा कि प्रदर्शन करने आए लोग पूरी तरह निहत्थे थे। वरिष्ठ वकील शदान फरासात ने बिहार का गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि वहां 150 नाबालिग बच्चों को 48 घंटे से पुलिस हिरासत में रखा गया है और सरकार द्वारा एफआईआर वापस लेने के बावजूद उन्हें छोड़ा नहीं गया है, साथ ही उनकी तस्वीरें अखबारों में छपवाई गईं। इसके अलावा सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने 4 मुख्य दलीलें रखीं। प्रशांत भूषण ने जुनैद नामक व्यक्ति को पुलिस प्रताड़ना और पत्थरों से भरे ट्रक का मुद्दा उठाया, जबकि एडवोकेट वृंदा ग्रोवर ने पुलिस तैनाती के बावजूद पत्थर आने पर सवाल खड़े किए।

🏛️ साक्ष्य सुरक्षित करने का राष्ट्रीय आदेश, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मांगा समय

सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट एन. हरिहरन ने बताया कि दिल्ली हाई कोर्ट ने सीसीटीवी फुटेज संरक्षित करने के निर्देश दिए हैं। इस पर मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट करते हुए कहा कि हम इस आदेश को केवल दिल्ली तक सीमित न रखकर पूरे देश में लागू करने जा रहे हैं। एडवोकेट मैथ्यूज नेदूंपरा ने संविधान के अनुच्छेद 32 की सीमाओं का जिक्र किया।

केंद्र सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि हमें मामले के सभी आधिकारिक तथ्यों को रिकॉर्ड पर रखने के लिए कुछ समय की आवश्यकता है, जिसके बाद कोर्ट के निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। वहीं, घायल पुलिसकर्मियों का पक्ष एडवोकेट एस. पट्टाराजू ने कोर्ट के समक्ष रखा।

📌 सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की 4 सबसे बड़ी और अहम बातें

  1. निर्दोषों की रिहाई: चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि उन सभी प्रदर्शनकारियों को तुरंत रिहा किया जाए, जिनका पहले से कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड नहीं है।

  2. साक्ष्यों की सुरक्षा: कोर्ट ने घटना से जुड़े सभी सीसीटीवी, पीसीआर कॉल और अन्य डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आदेश दिया है और सभी राज्यों को मामले में पेश होने के लिए कहा है।

  3. शांतिपूर्ण प्रदर्शन: सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि जब प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रख रहे थे, तो उन पर अत्यधिक बल प्रयोग करने की बिल्कुल जरूरत नहीं थी।

  4. उपद्रवियों का खतरा: जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि बड़े सार्वजनिक प्रदर्शनों के दौरान उसमें असामाजिक तत्वों और उपद्रवियों के शामिल होने का जोखिम हमेशा बना रहता है।

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