रीवा SP द्वारा रिटायर्ड IG सिकरवार पर निकाले 11.61 लाख की रिकवरी आदेश पर CAT ने लगाई रोक! SP को भेजा नोटिस
जबलपुर (मध्य प्रदेश): रीवा में पदस्थ रहे सेवानिवृत्त पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) द्वारा पुलिस अधीक्षक (एसपी) रीवा के रिकवरी आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT) जबलपुर पीठ ने बड़ा निर्णय सुनाया है।
अधिकरण ने मामले की सुनवाई करते हुए एसपी रीवा द्वारा जारी 11 लाख 61 हजार रुपये की वसूली के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक (Stay) लगा दी है। इसके साथ ही अधिकरण ने रीवा पुलिस अधीक्षक को कारण बताओ नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब तलब किया है।
📜 2024 में हुए थे रिटायर, अप्रैल 2026 में रीवा SP ने थमाया 11.61 लाख की वसूली का नोटिस
याचिकाकर्ता डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार ने कैट के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वे वर्ष 2024 में रीवा जोन के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (IG) पद से सेवानिवृत्त हुए थे।
उनके सेवानिवृत्त होने के बाद अप्रैल 2026 में पुलिस अधीक्षक रीवा द्वारा 11 लाख 61 हजार रुपये की वसूली का प्रशासनिक नोटिस जारी किया गया। नोटिस में चेतावनी दी गई थी कि यदि यह राशि जमा नहीं की जाती है, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी और यह राशि उनकी पेंशन से भी काटी जा सकती है।
💼 कनिष्ठ आईपीएस से वेतन विसंगति के कारण मिला था एरियर्स, नियमानुसार हुआ था वेतन निर्धारण
रिटायर्ड आईजी ने याचिका में स्पष्ट किया कि यह बकाया राशि वर्ष 2012 से उनके वेतन निर्धारण में सुधार के उपरांत प्रदान की गई थी।
उनसे कनिष्ठ (जूनियर) आईपीएस अधिकारियों का वेतन उनसे अधिक निर्धारित था, जिसे दुरुस्त करने हेतु उन्होंने नियोक्ता को अभ्यावेदन प्रस्तुत किया था। वर्ष 2012 से उनके वेतन निर्धारण को सुधारा गया था और पूर्व की स्वीकृत राशि का एरियर्स वैध रूप से दिया गया था।
⚖️ “एसपी के अधिकार क्षेत्र से बाहर है आदेश”, गृह मंत्रालय ही है सक्षम प्राधिकारी
अधिकरण में दायर याचिका में यह दलील दी गई कि सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी होने के नाते उनकी नियोक्ता भारत सरकार (गृह मंत्रालय व कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग – DoPT) है।
इस विषय में मध्य प्रदेश शासन या जिला पुलिस अधीक्षक को अपने अधिकारों से बाहर जाकर ऐसा कोई आदेश जारी करने का विधिक अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि सेवानिवृत्त अधिकारी के विरुद्ध इस प्रकार की अवैध वसूली सर्वोच्च न्यायालय के स्थापित दिशा-निर्देशों के विरुद्ध है, अतः इस पर तुरंत रोक लगाई जाए।
🏛️ कोई गलत जानकारी नहीं देने का दावा, सीनियर एडवोकेट पंकज दुबे ने की पैरवी
याचिका में रेखांकित किया गया है कि पुलिस अधीक्षक के पत्र में ऐसा कोई उल्लेख नहीं है कि याचिकाकर्ता ने कोई भ्रामक या गलत जानकारी देकर एरियर्स प्राप्त किया था।
अधिकरण में याचिकाकर्ता डॉ. महेंद्र सिंह सिकरवार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज दुबे, सोनाली पांडे एवं प्रथमेश पगारे ने सशक्त पैरवी की। कैट ने तर्कों को स्वीकार करते हुए रिकवरी आदेश पर रोक लगा दी है।
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