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सुंदरगढ़ भूमि विवाद: बिना ग्रामसभा की सहमति 12 गांवों की जमीन पर कब्जा, आप सांसद संजय सिंह ने संसद में दिया नोटिस

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नई दिल्ली/सुंदरगढ़: आम आदमी पार्टी (AAP) ने ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले में आदिवासी समुदाय की लगभग 950 एकड़ कृषि योग्य भूमि के अधिग्रहण को लेकर केंद्र एवं राज्य की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा जुबानी हमला बोला है।

आप के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने पेसा (PESA) कानून के प्रावधानों को दरकिनार कर ‘डालमिया सीमेंट’ के औद्योगिक विस्तार हेतु आदिवासी समाज से 950 एकड़ जमीन बलपूर्वक छीन ली है। पेसा एक्ट के सुस्पष्ट नियम कहते हैं कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों की भूमि का अधिग्रहण करने से पूर्व संबंधित ग्राम पंचायतों की लिखित सहमति अनिवार्य है, परंतु प्रशासनिक स्तर पर कोई अनुमति नहीं ली गई और पुलिस बल के प्रयोग से 5 ग्राम पंचायतों के लगभग 12 गांवों की भूमियों पर अवैधानिक कब्जा कर लिया गया।

⚖️ “उद्योगपतियों के लिए आदिवासियों-किसानों से छिनी जा रही जमीन”, संजय सिंह ने संसद में दिया नोटिस

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि संपूर्ण देश में किसानों, आदिवासियों, दलितों और वंचित वर्गों की जमीनों को उचित मुआवजा दिए बिना अधिग्रहित करना और पुलिस बल का भय दिखाकर उन्हें बेदखल करना सरकार की कार्यशैली बन गया है।

उन्होंने बताया कि कानून के अनुसार बिना पंचायत और जनजातीय समाज की स्वीकृति के उनकी पैतृक भूमि का अंतरण नहीं किया जा सकता। सुंदरगढ़ में लगभग 11-12 गांवों के लोगों से कोई विमर्श नहीं किया गया। यह प्रकरण अब सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) में भी विचाराधीन है और उन्होंने इस विषय को संसद में उठाने हेतु कार्यस्थगन प्रस्ताव का नोटिस दिया है। उन्होंने ओडिशा सरकार से मांग की कि आदिवासियों के साथ हो रहे इस अन्याय को अविलंब रोककर अवैध अधिग्रहण निरस्त किया जाए।

🌾 “धान बेचने गए तो पता चला जमीन कट गई”, भूमि मालिक राकेश रोशन ने सुनाई आपबीती

प्रेसवार्ता के दौरान सुंदरगढ़ निवासी और पीड़ित भूमि मालिक राकेश रोशन ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि ओडिशा के मुख्यमंत्री, सुंदरगढ़ क्षेत्र से आने वाले केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री और स्वयं देश की राष्ट्रपति आदिवासी समुदाय से हैं, फिर भी धरातल पर आदिवासियों की जमीनों को अवैध रूप से छिनने से नहीं बचाया जा रहा है।

उन्होंने बताया, “हमारी 950 एकड़ से अधिक भूमि हमारी बिना किसी पूर्व सूचना अथवा सहमति के दस्तावेजों से काट ली गई। जब हम अपनी धान की फसल बेचने मंडियों में गए, तब हमें ज्ञात हुआ कि हमारी खाते की भूमि कम कर दी गई है। हमारी यह लड़ाई वर्ष 2018 से निरंतर जारी है। हमने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन किए, लंबी पदयात्राएं निकालीं और राजभवन के समक्ष धरना भी दिया, परंतु बदले में हमारे लोगों पर झूठे मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल में डाला गया।”

🚜 खड़ी फसलों पर चलाए गए बुलडोजर, सीएजी और आरडीसी की रिपोर्ट में भी नियम उल्लंघन की पुष्टि

राकेश रोशन ने भावुक होते हुए बताया कि पुलिस बल की मौजूदगी में जबरन भूमि अधिग्रहण के समय उनके खेतों में मसूर और उड़द की फसलें लहलहा रही थीं।

उन फसलों को भारी डोजर मशीनें लगाकर नष्ट कर दिया गया और 20-20 फीट गहरे गड्ढे खोद दिए गए। वर्तमान में लगभग 27 एकड़ भूमि पर पत्थर निकालकर खनन (Mining) का कार्य संचालित किया जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) तथा राजस्व मंडल आयुक्त (RDC) की आधिकारिक रिपोर्टों में भी यह बात स्वीकार की गई है कि ग्राम सभा की कानूनी सहमति नहीं ली गई थी। डालमिया सीमेंट पूर्व में भी चार बार भूमि ले चुका है, और अब आदिवासियों के पास भविष्य की पीढ़ियों हेतु सीमित भूमि ही बची है।

💬 “पेसा एक्ट के तहत अनुसूचित क्षेत्र है सुंदरगढ़, 10 हजार लोगों की आजीविका पर संकट”: निशिकांत मोहपात्रा

“सुंदरगढ़ का यह संपूर्ण क्षेत्र पेसा एक्ट के तहत पूर्णतः अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) घोषित है। रात के अंधेरे में पुलिस को गांवों में घुसाकर ग्रामीणों को प्रताड़ित किया जा रहा है। इस असंवैधानिक निर्णय से 10 हजार से अधिक ग्रामीणों की आजीविका पर संकट गहरा गया है। आम आदमी पार्टी आदिवासियों के इस न्यायपूर्ण संघर्ष में उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी है।”

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