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लातेहार में हरियाली की बहार! वन विभाग लगा रहा 15 लाख पौधे, रोड साइड प्लांटेशन से संवरेंगी सड़कें

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लातेहार (झारखंड): जिले में प्राकृतिक हरियाली का दायरा बढ़ाने हेतु वन विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर लगभग 15 लाख से अधिक पौधे लगाने का महाभियान संचालित किया जा रहा है।

इतने विशाल स्तर पर पौधारोपण होने से जहाँ वन क्षेत्र का घनत्व बढ़ेगा, वहीं संपूर्ण लातेहार जिले का पर्यावरण भी अत्यधिक समृद्ध होगा। इसके अतिरिक्त, वन विभाग द्वारा सड़कों के दोनों ओर विस्तृत ‘रोड साइड प्लांटेशन’ (Roadside Plantation) भी किया जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में राहगीरों को शीतल छांव और स्वच्छ वायु प्रदान करेगा।

🌳 2291 वर्ग किमी में फैला है वन क्षेत्र, घनत्व सुधारने को बरसात के साथ शुरू हुआ पौधारोपण अभियान

वस्तुतः, लातेहार जिले का लगभग 2291 वर्ग किलोमीटर का भू-भाग वनों से आच्छादित है।

यद्यपि कतिपय स्थानों पर जंगलों का घनत्व कुछ कम हुआ है, फिर भी लातेहार जिला झारखंड राज्य के सर्वाधिक वनाच्छादित जिलों में प्रमुखता से गिना जाता है। यहाँ के जंगलों को पुनः सघन बनाने के उद्देश्य से वन विभाग ने इस मानसून सत्र में 15 लाख से अधिक पौधे रोपने की कार्ययोजना पर त्वरित अमल शुरू किया था। वर्षा ऋतु का प्रारंभ होते ही पौधारोपण की प्रक्रिया भी गति पकड़ चुकी थी।

🥭 वर्षा की कमी के बावजूद लक्ष्य के समीप पहुँचा विभाग, इमारती और फलदार पौधों पर विशेष जोर

यद्यपि प्रारंभ में वर्षा की आंशिक कमी के कारण पौधारोपण अभियान में कुछ व्यावहारिक व्यवधान उत्पन्न हुए थे, तथापि वन विभाग अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से निर्धारित लक्ष्य के अत्यंत निकट पहुँच गया है।

इस बार की सबसे सराहनीय बात यह है कि वन विभाग केवल इमारती लकड़ियों के वृक्ष ही नहीं, अपितु बड़े पैमाने पर विविध प्रकार के फलदार पौधे भी लगा रहा है, जिससे स्थानीय वन्यजीवों व नागरिकों दोनों को लाभ मिलेगा।

🛣️ 1835 हेक्टेयर भूमि पर रोपे जा रहे पौधे, सड़कों व स्कूलों में भी 10,000 पौधों का रोपण: DFO प्रवेश अग्रवाल

इस अभियान के संदर्भ में लातेहार के डीएफओ (DFO) प्रवेश अग्रवाल ने बताया कि लातेहार वन प्रमंडल और सोशल फॉरेस्ट्री के संयुक्त तत्वावधान में इस वर्षा ऋतु में 15 लाख से अधिक पौधे रोपित किए जा रहे हैं।

उन्होंने जानकारी दी कि यह पौधारोपण कार्य अब अपने अंतिम चरण में है और लगभग 1835 हेक्टेयर विस्तृत भूमि पर पौधे लगाए जा रहे हैं। डीएफओ ने बताया कि जिले में लगभग 10,000 पौधे विशेष रूप से सड़कों के किनारे और विद्यालय परिसरों में रोपे जा रहे हैं, ताकि भविष्य में ये स्थान हरे-भरे बने रहें।

💬 “जितने अधिक पेड़ होंगे, पर्यावरण उतना ही शुद्ध होगा”: प्रवेश अग्रवाल, डीएफओ लातेहार

“धरातल पर जितने अधिक वृक्ष अस्तित्व में रहेंगे, हमारा पर्यावरण उतना ही शुद्ध और समस्त जीव जगत के लिए अनुकूल बना रहेगा। मैं समस्त नागरिकों से सहृदय अपील करता हूँ कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में प्रतिवर्ष कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी पुत्रवत देखभाल करे।”

🐅 पलामू टाइगर रिजर्व में सिल्वीकल्चर तकनीक से जंगलों को किया जा रहा है समृद्ध

उल्लेखनीय है कि लातेहार जिले के अंतर्गत ही प्रसिद्ध पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) का विस्तृत वन परिक्षेत्र भी आता है।

पलामू टाइगर रिजर्व में भी प्रतिवर्ष बड़े पैमाने पर ‘सिल्वीकल्चर’ (Silviculture) प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके अंतर्गत जंगल में स्वतः प्राकृतिक रूप से उगे छोटे पौधों को विशेष संरक्षण प्रदान कर उन्हें बड़े वृक्षों के रूप में विकसित किया जाता है। पलामू टाइगर रिजर्व के रेंजर उमेश कुमार दुबे ने बताया कि पीटीआर के कोर व बफर इलाकों में प्राकृतिक संवर्धन हेतु सिल्वीकल्चर तकनीक को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

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