सीएजी रिपोर्ट केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का लिखित दस्तावेज, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने बोला तीखा हमला
नई दिल्ली: दिल्ली सरकार में मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने रविवार को प्रदेश बीजेपी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए पूर्ववर्ती आप सरकार पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सीएजी (CAG) की ताजा रिपोर्ट अरविंद केजरीवाल सरकार के भ्रष्टाचार का प्रामाणिक लिखित दस्तावेज है। प्रवेश वर्मा ने रेखांकित किया कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में कभी समय पर ऑडिट नहीं कराया जाता था, जबकि वर्तमान सरकार के महज 18 महीनों के भीतर ही 24 सीएजी रिपोर्ट आ चुकी हैं। 7 अगस्त 2026 को प्रस्तुत 31 मार्च 2023 तक की कैग रिपोर्ट में ही लगभग 3500 करोड़ रुपये की गंभीर वित्तीय अनियमितताएं उजागर हुई हैं।
📊 1185 मैन्युअल टेंडर और अरबिट्रेशन क्लॉज के जरिए जन-धन की लूट का आरोप
प्रवेश साहिब सिंह ने प्रेस वार्ता में विस्तृत ब्योरा देते हुए कहा कि सीएजी रिपोर्ट से यह पूरी तरह स्पष्ट हो चुका है कि अरविंद केजरीवाल ने प्रशासनिक नियमों की धज्जियां उड़ाकर कार्य किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऑनलाइन प्रक्रिया को दरकिनार कर 1185 मैन्युअल टेंडर जारी किए गए तथा टेंडरों के भीतर मनमाने ‘अरबिट्रेशन क्लॉज’ डालकर अरबों रुपये का घोटाला किया गया और जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक वित्तीय वर्ष में किए गए एक-एक प्रशासनिक फेरबदल का काला चिट्ठा इस आधिकारिक रिपोर्ट में दर्ज है।
🧾 ₹68,680 करोड़ के फर्जी E-Way Bills और ₹70,410 करोड़ का बकाया टैक्स न वसूलने का दावा
कैग रिपोर्ट के आंकड़ों का हवाला देते हुए मंत्री ने बताया कि दिल्ली की जनता का लगभग 70,410 करोड़ रुपये का राजस्व (Tax Revenue) कुछ चुनिंदा बड़े व्यापारियों पर बकाया था, जिसे पांच वर्षों से अधिक समय से सरकार द्वारा जानबूझकर वसूल नहीं किया गया।
आरोप है कि जीएसटी (GST) विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर बकाया राशि रोकी गई। इसके अतिरिक्त 8,334 ऐसे कारोबारी थे, जिनका जीएसटी रजिस्ट्रेशन निरस्त (Cancel) होने के बावजूद वे लगातार ई-वे बिल बनाते रहे। रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2023 तक 68,680 करोड़ रुपये के बोगस ई-वे बिल जारी किए गए तथा 4,076 नॉन-फाइलर्स द्वारा 11,635 करोड़ रुपये के बिल जेनरेट किए गए।
⚡ पावर सब्सिडी योजना में भारी गड़बड़ी, खाली घरों व 0 बिल वालों को भी बांटी गई सब्सिडी
प्रवेश साहिब सिंह ने बताया कि कुल 6.10 करोड़ E-Way Bills में से मात्र 0.10 प्रतिशत की ही औपचारिक जांच की गई, जिसमें 70 मामलों के निरीक्षण में 344 गैर-अनुपालन पाए गए, जिनका सीधा वित्तीय प्रभाव ₹3,071.92 करोड़ रहा।
विभिन्न सरकारी योजनाओं में हुई गड़बड़ियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि बिजली सब्सिडी योजना के तहत 50 हजार ऐसे उपभोक्ताओं को ₹17.81 करोड़ की सब्सिडी दी गई, जिनका 12 महीनों तक शून्य (Zero) बिल था। इसी प्रकार 6 से 11 महीने तक बंद पड़े घरों के 90 हजार उपभोक्ताओं को भी ₹11.88 करोड़ की सब्सिडी जारी की गई। कुल मिलाकर पॉवर सब्सिडी के नाम पर ₹42 करोड़ रुपये के नियम-विरुद्ध भुगतान की गहन जांच कराई जाएगी।
🏭 इंडस्ट्रियल पार्क की जमीन पर ₹29.45 करोड़ का निष्फल व्यय, 97% टेंडरों की फाइलें गायब
बीजेपी नेता ने दावा किया कि वर्ष 1998 से पूर्व जब दिल्ली में भाजपा की सरकार थी, तब बापरोला क्षेत्र में इंडस्ट्रियल पार्क हेतु भूमि अधिग्रहित की गई थी।
किंतु सीएजी रिपोर्ट के अनुसार, बीते 28 वर्षों में वहां कोई विकास कार्य नहीं हुआ, जिससे ₹29.45 करोड़ का निष्फल व्यय हुआ और ₹15.79 करोड़ का ग्राउंड रेंट बकाया हो गया। उन्होंने कहा कि 1185 मैन्युअल टेंडरों में से 97 प्रतिशत कॉन्ट्रैक्ट अवॉर्ड की फाइलें सरकारी रिकॉर्ड से पूरी तरह गायब हैं।
🏥 एलएनजेपी अस्पताल निर्माण में प्रति बेड लागत ₹33 लाख से बढ़ाकर ₹72 लाख करने का आरोप
प्रवेश साहिब सिंह ने आरोप लगाया कि केजरीवाल सरकार के कार्यकाल में फाइलों पर मुख्यमंत्री के हस्ताक्षर न होने के कारण उनके मंत्री जेल गए।
उन्होंने एलएनजेपी (LNJP) अस्पताल निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि अस्पताल में प्रति बेड स्वीकृत लागत ₹33 लाख होनी चाहिए थी, किंतु बार-बार के दौरों और लागत पुनरीक्षण के बाद इसे ₹72 लाख प्रति बेड पहुंचा दिया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि विगत 11 वर्षों में हुए प्रत्येक वित्तीय घोटाले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषियों से पाई-पाई का हिसाब लिया जाएगा।
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