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अलीगढ़ के स्वास्थ्य अधिकारियों की लापरवाही, कोरोना से मृत की मुआवजा लिस्ट में जीवित महिला

अलीगढ़। स्वास्थ्य विभाग की बड़ी लापरवाही लापरवाही अलीगढ़ में सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना मुआवजा लिस्ट में जीवित महिला को मृतक बता दिया। जिसके बाद विवाद शुरू हो गया। महिला का नाम भी मुआवजा सूची में शामिल था। स्वास्थ्य विभाग का कहना है गलती के कारण ऐसा हुआ और अब इसे सुधार लिया गया है।

अलीगढ़ जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग ने एक जीवित महिला शकुंतला देवी को मृतक बताते हुए उसकी मौत कोरोना से बताई है और उसका नाम मुआवजा सूची में शामिल कर दिया। महिला के परिजन और रिश्तेदारों का कहना है कि जब महिला जिंदा हैं तो मुआवजा क्यों लें। एक दूसरे मामले में कोरोना से जिस व्यक्ति की मौत हुई है, उसके परिजनों को मुआवजा नहीं मिल रहा है। इसके लिए परिजनों ने स्वास्थ्य विभाग के गुहार लगाई है।

अलीगढ़ के थाना बन्नादेवी क्षेत्र के मेलरोज बाईपास निवासी शकुंतला देवी व पुत्र हेमंत चौधरी ने बताया कि पिछले कई दिनों से उनके पास फोन आ रहे हैं कि कोरोना की दूसरी लहर में शकुंतला देवी की मौत हो गई है। वह उन्हें बता रहे हैं कि शकुंतला देवी जिंदा है। जो लोग फोन कर रहे हैं वह कह रहे हैं कि आप लोग कागजी कार्रवाई के लिए स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय से संपर्क करें। हेमंत का कहना है कि मुआवजा लेने से इनकार करने के बाद फोन पर बताया गया कि अगर आप साइन करते हैं तो फिर आपके खाते में 30,000 रुपये ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। सरकार ने मुआवजा राशि 50 हजार रुपये तय किया है। यानी 20 हजार रुपये किसी और की जेब में जाएंगे। हेमंत का कहना है कि उन्होंने मां का इलाज एक निजी अस्पताल में कराया गया और कोरोना से उबरने के बाद वह ठीक हो गई हैं। पीड़िता का कहना है कि मुझे दूसरी लहर के दौरान कोरोना संक्रमण हुआ था और दस दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती थीं मुझे अपनी मौत के बारे में तब पता चला जब स्वास्थ्य अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों को सत्यापन के लिए बुलाया और मुआवजा लेने के लिए कहा।

अलीगढ़ के नोडल कोविड-19 सैंपलिंग राहुल कुलश्रेष्ठ ने बताया कि जिले के पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने अप्रेल-मई महीने में घातक वायरस की दूसरी लहर के दौरान कोविड-19 से मरने वालों की एक लिस्ट तैयार की थी। लिस्ट में तत्कालीन सीएमओ ने अनजाने में पीड़िता शकुंतला देवी का नाम जोड़ दिया। कुलश्रेष्ठ ने कहा कि हमें अपनी गलती का एहसास हुआ है और हमने सुधार कर लिया है। अब हमने उनका नाम मुआवजा सूची से हटा दिया है। मामला तब सामने आया जब वर्तमान सीएमओ डॉ आनंद ने स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक पीड़ित परिवार के सदस्य को फोन करें और उन्हें संबंधित स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय से मुआवजे के रूप में 50,000 रुपये लेने के लिए कहें।

जिले में कोरोना मृतकों को लेकर स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोरोना अवधि के दौरान कोविड-19 से मरने वालों की सूची तैयार की गई है और इसमें 106 लोग हैं। इन्हें सरकार द्वारा 50000 रुपये मुआवजा दिया जा रहा है। हालांकि पहले 108 लोगों की सूची तैयार की गई थी और शकुंतला देवी जैसे दो मामले सामने आने के बाद सूची से उनका नाम हटा दिया गया है और 106 मृतकों का नाम नई सूची में शामिल किया गया है।

नहीं मिल रहा है मुआवजा

वहीं एक दूसरे मामले में ज्ञानेश नामक व्यक्ति का कहना है कि वह रफतगंज का रहने वाला है और कोरोना पॉजिटिव होने पर दूसरी लहर के दौरान दीनदयाल अस्पताल में उनके पिता सतीश चंद्र वार्ष्णेय की मौत हो गई थी। उनका अंतिम संस्कार भी कोरोना गाइडलाइंस के तहत किया गया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग उन्हें मुआवजा नहीं दे रहा है और जिले में मुआवजा सूची में जो 108 लोगों के नाम बताए गए हैं, उसमें उनके पिताजी का नाम नहीं है।

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