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सिवनी में 11 करोड़ का सर्पदंश घोटाला उजागर: एक व्यक्ति को 30 बार मृत दिखाकर लूटा सरकारी खजाना

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राष्ट्र चंडिका न्यूज़,सिवनी.राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख देने वाला एक बड़ा घोटाला सिवनी जिले में सामने आया है। सांप के काटने से मृत्यु के फर्जी मामलों के ज़रिए सरकारी खजाने से 11 करोड़ 26 लाख रुपये की अवैध निकासी की गई है। हैरानी की बात यह है कि कुछ व्यक्तियों को बार-बार मृत दिखाकर मुआवजा राशि की बंदरबांट की गई।
जांच में खुलासा हुआ है कि रमेश नामक व्यक्ति को 30 बार सांप के काटने से मृत बताया गया, वहीं द्वारका बाई के नाम पर 29 बार मुआवजा लिया गया। रामकुमार नामक व्यक्ति को 19 बार मृत दिखाकर 81 लाख रुपये तक निकाले गए। इस फर्जीवाड़े में एक ही नाम पर बार-बार मृत्यु दावा कर, रिकॉर्ड संशोधित कर नए बिल तैयार किए जाते थे और राशि विभिन्न खातों में स्थानांतरित की जाती थी।
यह घोटाला वर्ष 2019 से 2022 के बीच चला और इसे अंजाम देने में सरकारी सिस्टम की कई खामियां उजागर हुईं। जांच में यह भी सामने आया कि इन फर्जीवाड़ों में मृत्यु प्रमाण पत्र, पुलिस रिपोर्ट और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तक नहीं लगाई गईं, फिर भी बिल पास कर दिए गए।
मुख्य आरोपी सहायक ग्रेड-3 कर्मी सचिन दहायत के साथ 46 अन्य लोगों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है, जिनमें तत्कालीन एसडीएम अमित सिंह और पांच तहसीलदारों के नाम शामिल हैं। इस घोटाले की जांच वित्त विभाग के संयुक्त संचालक रोहित कौशल की टीम द्वारा की गई और रिपोर्ट कलेक्टर को सौंप दी गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: मामले को लेकर मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार पर तीखा तंज कसा। उन्होंने कहा, “जब केवल सिवनी में ही 11 करोड़ का घोटाला हुआ है, तो बाकी 54 जिलों की क्या स्थिति होगी, इसका अंदाज़ा लगाया जा सकता है।”
अब आगे क्या?
सिवनी कलेक्टर के पास रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इस मामले में आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। राज्यभर में इस खुलासे के बाद मुआवजा वितरण की प्रक्रियाओं की व्यापक जांच की मांग उठने लगी है।
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