हर हादसे पर बहाने क्यों?”
,चिन्नास्वामी स्टेडियम भगदड़ : 11 मौतें, 33 घायल – जिम्मेदार कौन?
राष्ट्र चंडिका न्यूज़.बेंगलुरू के चिन्नास्वामी स्टेडियम में बुधवार शाम हुए हादसे ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या सरकार और प्रशासन आम जनता की सुरक्षा को लेकर सच में गंभीर है? रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू (RCB) के पहली बार आईपीएल विजेता बनने पर आयोजित जश्न की खुशी कुछ ही पलों में मातम में बदल गई, जब स्टेडियम के बाहर बेकाबू भीड़ में मची भगदड़ ने 11 लोगों की जान ले ली और 33 घायल हो गए।
क्या पहले से नहीं था अंदेशा? – आयोजन के लिए पुलिस और प्रशासन की तरफ से कोई पुख्ता तैयारी नहीं की गई थी, जबकि अंदाजा लगाया जा सकता था कि बेंगलुरू के क्रिकेट प्रेमी इतने ऐतिहासिक मौके पर बड़ी संख्या में जुटेंगे। आरसीबी की जीत पर जश्न पूरे शहर में उमड़ पड़ा, लेकिन क्या प्रशासन को इसका पूर्वाभास नहीं था?
मुख्यमंत्री का बयान या बहाना? – हादसे के बाद मुख्यमंत्री सिद्धारमैया का बयान भी हैरान करने वाला रहा। उन्होंने घटना की तुलना कुंभ मेले में मची भगदड़ से करते हुए कहा कि “वहां 50-60 लोग मारे गए थे, तब किसी ने आलोचना नहीं की थी।” सवाल उठता है कि क्या ऐसी तुलना से सरकार की जिम्मेदारी खत्म हो जाती है?
क्या यह बयान संवेदनशीलता की कमी नहीं दर्शाता?
बेकाबू भीड़, नाकाफी इंतजाम हजारों की संख्या में लोग जब स्टेडियम की ओर बढ़े तो ना तो सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त थी, ना ही भीड़ नियंत्रण के उपाय। भीड़ में से कई लोग पेड़ों, खंभों और दीवारों पर चढ़कर स्टेडियम में घुसने की कोशिश करते देखे गए। यह सब देखते हुए भी कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया।
किसकी जवाबदेही? – जब जश्न को लेकर इतनी भारी भीड़ की संभावना थी, तब सरकार ने सुरक्षा प्रबंधन, भीड़ नियंत्रण, और आपातकालीन सेवाओं की तैयारी क्यों नहीं की? सवाल उठता है कि क्या सरकार केवल आयोजनों की चमक-धमक में रुचि रखती है, और जब हादसा हो जाए तो बहानों के पीछे छिप जाती है?
सरकार से सवाल – क्या स्टेडियम की क्षमता का अनुमान नहीं था?भीड़ नियंत्रण के लिए कितनी पुलिस तैनात की गई थी?क्या पहले से कोई रूट प्लान या इमरजेंसी प्लान बनाया गया था?हादसे के बाद जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होगी।हर बार की तरह इस बार भी हादसे के बाद बहाने बनाए जा रहे हैं, पर सवाल यह है कि आम आदमी की जान की कीमत क्या इतनी सस्ती है? क्या प्रशासन केवल रिपोर्ट और आंकड़ों तक सीमित रह जाएगा, या कोई ठोस कदम भी उठाएगा?अब वक्त आ गया है कि सरकार जवाब दे, और जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दे।