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आवारा कुत्तों का आतंक, जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर, नगरपालिका पर लापरवाही का आरोप

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राष्ट्र चंडिका न्यूज़, सिवनी: सिवनी शहर और आसपास के इलाकों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे जनता में दहशत और गुस्सा है। हाल ही में हुई एक दुखद घटना ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। लोग सीधे तौर पर नगरपालिका प्रशासन की अनदेखी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं और चेतावनी दे रहे हैं कि अगर कोई और बड़ी घटना होती है, तो इसके लिए सिर्फ और सिर्फ प्रशासन ही जिम्मेदार होगा।
प्रशासन की अनदेखी पर जनता का गुस्सा ​नागरिकों का कहना है कि उन्होंने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर कई बार नगरपालिका में शिकायत की है, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। शहर के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे वीडियो इस बात का सबूत हैं कि कुत्तों के झुंड सड़कों पर घूमते रहते हैं, जिससे राहगीर, खासकर बच्चे और बुजुर्ग, असुरक्षित महसूस करते हैं।
​प्रशासन की लापरवाही से भड़का आक्रोश
​जनता का कहना है कि उन्होंने आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर कई बार नगरपालिका में शिकायत की है, लेकिन प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। नागरिकों का आरोप है कि बच्चों और बुजुर्गों के लिए घर से बाहर निकलना भी खतरनाक हो गया है। शहर के अलग-अलग हिस्सों से आ रहे वीडियो इस बात का सबूत हैं कि कुत्तों के झुंड सड़कों पर घूमते रहते हैं, जिससे राहगीर, खासकर बच्चे, असुरक्षित महसूस करते हैं।
​इस समस्या से परेशान एक स्थानीय नागरिक ने गुस्से में कहा, “यह कोई पहला मामला नहीं है। अगर प्रशासन ने पहले ध्यान दिया होता, तो आज यह मासूम बच्ची हमारे बीच होती। अगर कोई और बड़ी घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी नगरपालिका की होगी और हम चुप नहीं बैठेंगे।”
​उग्र आंदोलन की चेतावनी
​जनता का आरोप है कि नगरपालिका प्रशासन सिर्फ कागजी कार्रवाई में उलझा हुआ है, जबकि जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हो रहा है। लोगों का कहना है कि प्रशासन की उदासीनता ने इस समस्या को और भी खतरनाक बना दिया है।
​इस घटना के बाद से सिवनी की जनता में भारी रोष है। लोग अब इस मामले में तत्काल कार्रवाई, कुत्तों की नसबंदी और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखने की मांग कर रहे हैं। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया और प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। यह घटना प्रशासन के लिए एक चेतावनी है कि इस गंभीर समस्या को अब और नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
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