राष्ट्र चंडिका न्यूज़,सिवनी, सिवनी जिले में पत्रकारिता के नाम पर एक बड़ा गोरखधंधा फल-फूल रहा है। यहां फर्जी पत्रकारों के कई संगठन सक्रिय हैं, जो पत्रकारों के हितों की लड़ाई लड़ने के बजाय अवैध वसूली, ब्लैकमेलिंग और अय्याशी का अड्डा बन चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि ये लोग खुद को बड़े पत्रकार बताते हैं, जबकि उनका पत्रकारिता से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।
सोशल मीडिया पत्रकार और पोर्टल संचालकों का गिरोह
इस गिरोह में यूट्यूबर, सोशल मीडिया पोर्टल संचालक, पीडीएफ पत्रकार और ऐसे लोग शामिल हैं जिनके पास न तो कोई अधिकृत समाचार पत्र है और न ही पत्रकारिता का वैध अनुभव। ये लोग सोशल मीडिया पर चंद पंक्तियाँ लिखकर या किसी अखबार की पीडीएफ कटिंग दिखाकर खुद को पत्रकार साबित करने में लगे रहते हैं। इनकी गाड़ियों पर बेधड़क ‘प्रेस’ लिखकर घूमते हैं, और इनका मुख्य काम आम जनता, व्यापारियों और सरकारी कर्मचारियों को ब्लैकमेल कर उनसे पैसे ऐंठना है।
सरकारी तंत्र को भी बना रहे ‘शिकार’
सबसे चिंताजनक बात यह है कि सरकारी अधिकारी, कर्मचारी और पुलिस विभाग भी इन फर्जी पत्रकारों को असली मानकर उनके साथ उठते-बैठते हैं। सूत्रों के अनुसार, ये लोग हर थाने और सरकारी कार्यालय में जाकर अधिकारी-कर्मचारियों को डराते-धमकाते हैं। ये फर्जी पत्रकार, भोपाल या अन्य जिलों में होने वाले कार्यक्रमों के नाम पर अवैध वसूली करते हैं और इस चंदे का उपयोग अय्याशी के लिए करते हैं।
कुछ नामी संगठनों में भी फर्जीवाड़ा
कुछ पत्रकार संगठनों में तो असली पत्रकारों की संख्या दहाई तक भी नहीं है। बाकी सभी सदस्य फर्जी हैं, जिनसे रोज ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली करवाई जाती है। इन संगठनों के अध्यक्ष खुद को बड़ा पत्रकार बताकर अपना स्वार्थ साधते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि उनके कथित समाचार पत्रों की प्रतियाँ स्थानीय अखबारों के वेस्टेज के बराबर भी नहीं हैं। इसके बावजूद, ये लोग खुद को पत्रकारों का सरदार बताकर खुलेआम लूटपाट कर रहे हैं।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
इस स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक हो गया है कि प्रशासन ऐसे फर्जी पत्रकारों और उनके संगठनों पर कड़ी कार्रवाई करे। ऐसा करने से न केवल आम जनता को इन ठगों से बचाया जा सकेगा, बल्कि सरकारी कर्मचारी भी बिना किसी दबाव के अपना काम बेहतर ढंग से कर पाएंगे। वर्तमान में तो स्थिति यह है कि सरकारी तंत्र के कर्मचारी अपना आधा समय इन फर्जी पत्रकारों के साथ चाय पीने में ही बिता रहे हैं। जनता की मांग है कि प्रशासन इस गंभीर समस्या को गंभीरता से ले और जल्द से जल्द इन पर लगाम लगाए।